ये तो मैं भी कहता हूँ आरक्षण हटाओ, लेकिन जिन्हे आज़ादी के पहले से लेकर और बाद तक मंदिरों में जाने, कुए से पानी भरने तक से रोक गया, उन्हें भी मुख्य धारा में आने का अधिकार है.
दलितों और पिछड़ों को मुख्य धारा में लाने के लिया हमारे संविधान में आरक्षण का विधान किया गया है जिसका फायदा उन्हें मिला भी. लेकिन अब स्थित ये है की जो दलित और पिछड़े मुख्य धारा में आ गए हैं वही सबसे ज्यादा आरक्षण का फायदा उठते हैं. और जिन्हें अभी तक आरक्षण का फायदा नहीं मिला वो अब भी गरीबी में जी रहे हैं.
लेकिन जो अभी तक गरीब हैं उन्हें आरक्षण जरूर मिलना चाहिए. लेकिन वो ऐसे गरीब नहीं होने चाहिए जिनकी सालाना आय ६ लाख रुपये हो.
एक तरफ २०-२५ रुपये रोजाना कमाने वाला गरीबी रेखा पार कर अमीरी की श्रेणी में आ जाता है और दूसरी तरफ गुजरात में ५० हजार रुपये तक महीना कमाने वाले गरीब बनकर आरक्षण पाते हैं.
अब बात करते हैं टीना डॉबी और अंकित की जिनका मेसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है की अंकित के ज्यादा नंबर होते हुए भी वो फेल हो गया और टीना के काम नंबर होते हुए भी वो आरक्षण के सहारे पास हो गयी.
आपको बता दें कि टीना डॉबी पहली दलित हैं जो 22 साल की उम्र में सिविल सेवा में टॉपर बनी हैं.
हाँ ये सत्य है की प्री एग्जाम में टीना ने आरक्षण का सहारा लिया, और ये उसका हक़ है जो संविधान ने उसे दिया है. लेकिन सिविल सेवा के मेन (मुख्य) पेपर में टीना ने कोई आरक्षण नहीं लिया और जनरल कैटेगरी में परीक्षा दी है. मुख्य परीक्षा में टीना को २०२५ में से १०६३ नंबर मिले हैं. जबकि दूसरे नंबर पर अतहर आमिर हैं जिन्हें १०१८ नंबर मिले हैं. तीसरे नंबर पर जसमीत सिंह हैं जिन्हें १०१४ नंबर मिले हैं. पहली और दूसरी रैंक में ४५ अंकों का फासला है जो की बहुत बड़ा है.
इसलिए ये कहना सरासर गलत है की टीना ने अयोग्य होते हुए भी सिविल सेवा में टॉप किया है.
और भी पढ़ें: http://abpnews.abplive.in/india-news/viral-sach-truth-of-viral-message-on-tina-dabis-success-2-382185/




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