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ईरान-इजरायल युद्ध और अल नीनो का दोहरा प्रहार: वैश्विक चावल संकट के बीच क्या भारत बनेगा दुनिया का सहारा?

वैश्विक बाजार (Global Market) में उथल-पुथल, खाद्य सुरक्षा (Food Security) पर बढ़ता खतरा मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और अल..

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Global Rice Supply Under Pressure Iran Crisis, El Niño and India’s Rising Role

वैश्विक बाजार (Global Market) में उथल-पुथल, खाद्य सुरक्षा (Food Security) पर बढ़ता खतरा

मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और अल नीनो (El Nino) के असर ने वैश्विक चावल बाजार (Global Rice Market) को चिंता में डाल दिया है। उर्वरक संकट (Fertilizer Crisis), महंगा ईंधन (High Fuel Prices), सप्लाई चेन में रुकावटें (Supply Chain Disruptions) और दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) में सूखे (Drought) की आशंका ने 2025-26 फसल वर्ष के लिए वैश्विक खाद्य सुरक्षा (Global Food Security) पर सीधा खतरा पैदा कर दिया है।

चावल (Rice) एशिया (Asia) और अफ्रीका (Africa) के करोड़ों लोगों का मुख्य भोजन है। ऐसे में इसकी आपूर्ति (Rice Supply) में मामूली कमी भी अंतरराष्ट्रीय कीमतों (Global Prices) को तेज़ी से बढ़ा सकती है और गरीब तथा मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर भारी दबाव डाल सकती है।

ईरान युद्ध (Iran War) का असर: उर्वरक (Fertilizer) और ईंधन (Fuel) की सप्लाई प्रभावित

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर दिख रहा है। यही मार्ग खाड़ी देशों (Gulf Countries) को वैश्विक बाजार (Global Market) से जोड़ता है। ईंधन (Fuel) और उर्वरकों (Fertilizers) की आवाजाही प्रभावित होने से चावल उत्पादन लागत (Rice Production Cost) तेज़ी से बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका असर सिर्फ निर्यातक देशों (Exporting Countries) तक सीमित नहीं है, बल्कि आयात-निर्भर देशों (Import-Dependent Countries) तक भी पहुंच रहा है। थाईलैंड (Thailand) और वियतनाम (Vietnam) जैसे प्रमुख निर्यातकों के साथ-साथ फिलीपींस (Philippines) और इंडोनेशिया (Indonesia) जैसे आयात-निर्भर देशों में भी संकट गहराने लगा है।

अल नीनो (El Nino) ने बढ़ाई मुश्किलें

दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) में अल नीनो (El Nino) के कारण इस साल के दूसरे हिस्से में अधिक गर्मी (Heatwave) और सूखे (Drought) की स्थिति बनने की आशंका है। इसका सीधा असर चावल की पैदावार (Rice Yield) पर पड़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO – Food and Agriculture Organization) के मुख्य अर्थशास्त्री (Chief Economist) मैक्सिमो टोरेरो (Maximo Torero) के अनुसार, बढ़ती लागत (Rising Costs) के कारण किसान पहले ही कम उर्वरक (Lower Fertilizer Use) और कम संसाधनों (Lower Inputs) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे इस साल के अंत और अगले साल की शुरुआत में वैश्विक चावल आपूर्ति (Global Rice Supply) और कमजोर हो सकती है।

किसानों ने घटाया बुवाई का रकबा

ईंधन (Fuel) और उर्वरकों (Fertilizers) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने किसानों (Farmers) को बुवाई (Sowing) कम करने पर मजबूर कर दिया है।

थाईलैंड (Thailand) में स्थिति चिंताजनक

थाईलैंड (Thailand) के चाई नाट (Chai Nat) प्रांत में उर्वरक (Fertilizer) की कीमत 850 बाट से बढ़कर 1000 से 1200 बाट प्रति बोरी तक पहुंच गई है। कई छोटे किसानों (Small Farmers) ने उर्वरक का उपयोग आधा कर दिया है, जिससे पैदावार (Yield) प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

फिलीपींस (Philippines) में उत्पादन गिरने का खतरा

फिलीपींस (Philippines), जो दुनिया का सबसे बड़ा चावल आयातक (Largest Rice Importer) है, गंभीर दबाव में है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि देश का उत्पादन (Rice Production) सामान्य 19-20 मिलियन टन से काफी नीचे जा सकता है। आयात (Imports) के जरिए कमी पूरी करना भी आसान नहीं होगा क्योंकि कई निर्यातक देश (Exporting Nations) प्रतिबंध बनाए हुए हैं।

इंडोनेशिया (Indonesia) में भी गिरावट के संकेत

इंडोनेशिया (Indonesia) के सांख्यिकी ब्यूरो (Statistics Bureau) के अनुसार मार्च से मई के बीच धान कटाई का क्षेत्र (Harvested Area) 10.6% घटकर 3.85 मिलियन हेक्टेयर रह सकता है। वहीं बिना पिसे चावल (Unmilled Rice) का उत्पादन 11.12% घटकर 20.68 मिलियन टन रहने का अनुमान है।

चावल की सप्लाई चेन (Rice Supply Chain) बनी नई चुनौती

चावल बाजार (Rice Market) केवल उत्पादन संकट (Production Crisis) से नहीं जूझ रहा, बल्कि लॉजिस्टिक्स (Logistics) भी बड़ी समस्या बन चुकी है।

  • पॉलीप्रोपाइलीन बैग (Polypropylene Bags) की कमी
  • ट्रकों (Trucks) की सीमित उपलब्धता
  • बंदरगाहों (Ports) तक माल पहुंचाने में देरी
  • समुद्री परिवहन (Shipping) में व्यवधान

एक अंतरराष्ट्रीय व्यापारी (International Trader) के शब्दों में, एशिया (Asia) में चावल की लॉजिस्टिक्स (Rice Logistics) “बुरे सपने” जैसी हो गई है।

FAO का रिकॉर्ड उत्पादन (Record Production) अनुमान, लेकिन जोखिम बरकरार

FAO (Food and Agriculture Organization) ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि 2025-26 में वैश्विक चावल उत्पादन (Global Rice Production) लगभग 2% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर (Record High) पर पहुंच सकता है। लेकिन मौजूदा हालात इस अनुमान पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उर्वरक संकट (Fertilizer Crisis), ईंधन महंगाई (Fuel Inflation) और मौसम की मार (Weather Impact) जारी रही, तो उत्पादन अनुमान (Production Forecast) वास्तविकता से काफी दूर साबित हो सकता है।

भारत (India) बनेगा दुनिया का बड़ा सहारा

इन तमाम चिंताओं के बीच भारत (India) वैश्विक बाजार (Global Market) के लिए राहत की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है।

अमेरिकी कृषि विभाग (US Department of Agriculture) के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक (Largest Rice Exporter) भारत (India) के पास करीब 42 मिलियन टन चावल भंडार (Rice Stock) मौजूद है। यह वैश्विक स्टॉक (Global Stock) का लगभग पांचवां हिस्सा है।

अगर आने वाले महीनों में वैश्विक उत्पादन (Global Production) में गिरावट आती है, तो भारत (India) का यह विशाल चावल भंडार (Rice Reserves) दुनिया के कई देशों के लिए सहारा बन सकता है।

कीमतों (Rice Prices) में बढ़ोतरी की आशंका

फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में चावल की कीमतें (Rice Prices) अपेक्षाकृत स्थिर हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह स्थिरता लंबे समय तक नहीं रह सकती।

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जल्द सामान्य नहीं हुआ, तो अगले कुछ हफ्तों में चावल की कीमतों (Rice Prices) में तेज़ उछाल देखा जा सकता है। इतिहास गवाह है कि 2008 में निर्यात प्रतिबंधों (Export Restrictions) के कारण चावल की कीमतें दोगुनी से अधिक बढ़ गई थीं।

निष्कर्ष (Conclusion)

उर्वरक संकट (Fertilizer Crisis), महंगा ईंधन (High Fuel Prices), अल नीनो (El Nino) का खतरा और वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) की बाधाएं—ये सभी मिलकर दुनिया के सबसे अहम खाद्यान्न चावल (Rice) पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा (Food Security) और महंगाई (Inflation) दोनों बड़ी वैश्विक चुनौती (Global Challenge) बन सकती हैं। ऐसे कठिन दौर में भारत (India) का विशाल चावल भंडार (Rice Stock) दुनिया के लिए राहत की सबसे मजबूत उम्मीद बनकर सामने आ रहा है।

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