भारतीय परंपरा में गुरु को गोविंद से बढ़कर आदर दिया गया है। इसकी वजह यह है कि गुरु अपने शिष्यों को सांचे में ढालकर एक ऐसा मनुष्य तैयार करने की क्षमता रखता है जो ईश्वर की बनाई सृष्टि को नई दिशा दे सकता है और अपनी अमर कीर्ति से इतिहास के पन्नों में अपना नाम अंकित कर सकता है। शिक्षक दिवस के अवसर पर हम आपको ऐसे ही कुछ गुरुओं की याद दिलाते हैं जिनके शिष्यों के नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं।
शिव:
सृष्टि में सबसे पहले गुरु भगवान शिव ही माने जाते हैं। इन्होंने पूरी दुनिया को नृत्य, व्याकरण और संगीत का ज्ञान दिया। इनके प्रमुख शिष्यों में शनि महाराज, परशुरामजी का नाम आता है। शनि महाराज नवग्रहों में दंडाधिकारी हैं और इनके न्याय से भगवान शिव भी नहीं बच पाए हैं। परशुरामजी ने भगवान शिव से ज्ञान प्राप्त करके गुरु शिष्य परंपरा को आगे चलाया। इनके कई शिष्यों के नाम इतिहास में अंकित हैं।

वशिष्ठः
भगवान राम ने अपने तीनों भाईयों के साथ इनसे ज्ञान प्राप्त किया था। इन्होंने भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम और अन्य भाईयों को धर्म की राह पर चलना सिखाया था।

संदीपिनीः
दुनिया को गीता का ज्ञान देने वाले भगवान श्रीकृष्ण को इन्होंने ज्ञान दिया था। इन्हीं के आश्रम में सुदामाजी और श्रीकृष्ण ने शिक्षा पाई थी। इन्ही के आश्रम में श्रीकृष्ण को परशुरामजी से सुदर्शन चक्र प्राप्त हुआ था।

परशुरामः
गुरु परंपरा में परशुरामजी का नाम बहुत ही आदर से लिया जाता है। इनके शिष्यों में ऐसे महायोद्धा हुए जिनसे देवता भी भयभीत रहते थे। महाभारत के महायुद्ध में इनके तीन शिष्यों भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण ने भाग लिया था। ये तीनों ही कौरवों के प्रधान सेनापति हुए और छल द्वारा युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए।

द्रोणाचार्यः
महाभारत की कथा इनके बिना अधूरी है। इन्होंने परशुरामजी से प्राप्त ज्ञान को गुरु परंपरा के तहत आगे बढ़ाया। इनके प्रमुख शिष्यों में कौरव, पांडव और अश्वत्थामा का नाम आता है। अर्जुन इनका प्रिय शिष्य था।

श्रीकृष्णः
महाभारत का एक महायोद्धा जिसने महज 16 साल की उम्र में अकेले ही पूरी कौरव सेना के महायोद्धाओं से युद्ध किया और अपनी वीरता से सभी को हैरान कर दिया उस वीर का नाम अभिमन्यु था। इस योद्धा के गुरु इनके मामा भगवान श्रीकृष्ण थे। महाभारत के महायुद्ध का परिणाम कुछ और होता अगर यह योद्धा उस युद्ध में नहीं होता।चक्रव्यूह को तोड़ना अर्जुन, श्रीकृष्ण और अभिमन्यु के अलावा किसी और को नहीं आता था। द्रोणाचार्य चक्रव्यूह में फंसाकर युधिष्ठिर को बंदी बना लेना चाहते थे लेकिन अभिमन्यु ने द्रोणाचार्य की चाल को नाकाम बना दिया। जब अकेले इन्हें कोई परास्त नहीं कर पा रहा था तब सभी ने एक साथ मिलकर इन पर वार करना शुरू कर दिया और अंत में वीरगति को प्राप्त हुआ।

गोविंद भगवत्पाद:
आदिगुरु शंकराचार्य जिन्होंने चार धामों की स्थापना की उनके गुरु गोविंद भगवत्पादजी थे। शंकराचार्यजी ने इनसे ज्ञान प्राप्त करके अद्वैत सिद्धांत का प्रचार किया और अपने समकालीन सभी विद्वानों को शास्त्रार्थ में पराजित किया। वेदांतसूत्रों और उपनिषदों पर इनकी टिकाएं काफी प्रसिद्ध हैं।

रामकृष्ण परमहंस:
आधुनिक युग के प्रमुख संतों और दार्शनिकों में एक नाम आता है स्वामी विवेकानंदजी का जिन्होंने अपने सिद्धांत और ज्ञान से पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर दिखाया था। इनके गुरु थे रामकृष्ण परमहंस। इनके सानिध्य और ज्ञान से विवेकानंद जगत प्रसिद्ध हुए।
Source: https://navbharattimes.indiatimes.com/astro/photo/teachers-day-special-teachers-in-mythology-47168/8/




![भारतीय नागरिक बोध और वैश्विक छवि [Indian Civic Sense and Global Image]](https://howtbs.com/wp-content/uploads/2026/07/Civic-Sense-150x101.png)






![भारतीय नागरिक बोध और वैश्विक छवि [Indian Civic Sense and Global Image]](https://howtbs.com/wp-content/uploads/2026/07/Civic-Sense-300x201.png)




