,

18 साल, 1 सवाल: निठारी के मासूमों का कातिल कौन?

पंधेर–कोली दोनों बरी, इंसाफ की आखिरी उम्मीद भी खत्म? अगर दोनों निर्दोष हैं… तो आखिर उन बच्चों को किसने मारा? कौन है असली हत्यारा? क्या..

Devika Avatar

by

4 minutes

Read Time

Nithari Kand

पंधेर–कोली दोनों बरी, इंसाफ की आखिरी उम्मीद भी खत्म?

अगर दोनों निर्दोष हैं… तो आखिर उन बच्चों को किसने मारा? कौन है असली हत्यारा? क्या यही न्याय है?

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सबूत नहीं, इसलिए रिहाई

निठारी कांड (Nithari Kand) के मुख्य आरोपी सुरिंदर कोली (Surinder Koli) को सुप्रीम कोर्ट ने ठोस सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
जस्टिस विक्रम नाथ ने आदेश दिया कि 18 साल पुराने इस केस में अभियोजन आरोप सिद्ध नहीं कर सका, इसलिए कोली को रिहा किया जाए।

यह पहला मामला नहीं है जब सालों तक चले ट्रायल के बाद किसी आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया हो, लेकिन यह भारत के सबसे खौफनाक कांडों में से एक है—और यही इसे और डरावना बनाता है।

2006: नोएडा के निठारी (Nithari) की गलियों में गायब होते बच्चे

नोएडा सेक्टर-31 के पीछे बसे निठारी गांव (Nithari Village)में एक के बाद एक बच्चे लापता होने लगे।
किसी को नहीं पता था कि यह गायब होना, भारत की सबसे भयानक क्राइम कहानियों (Crime Stories) में बदल जाएगा।

बाद में एक नाले से बच्चों की हड्डियाँ मिलीं—और देश दहल उठा।
जांच में नाम आया—

  • मोनिंदर सिंह पंधेर (Moninder Singh Pandher)– स्थानीय व्यवसायी

  • सुरिंदर कोली (Surinder Koli)– उसका घरेलू नौकर

और फिर खुलने लगा 15 से अधिक प्रवासी परिवारों के लापता बच्चों का भयावह सच।

कोली का स्वीकारोक्ति—या एक विवादित कबूलनामा?

पूछताछ के दौरान कोली ने कथित तौर पर कहा—

  • वह बच्चों को मिठाई का लालच देकर लाता था

  • उनके साथ दुष्कर्म करता था

  • हत्या कर शव फेंक देता था

कुछ आरोपों में तो यह भी कहा गया कि शवों के अंगों का उपयोग हुआ…
यहां तक कि नरभक्षण (Cannibal) के दावे भी किए गए।

लेकिन—
ये सब कथित कबूलनामे और विवादित गवाहियों पर आधारित थे।
न्यायालय में इनमें से बहुत कुछ टिक नहीं पाया।

2009–2023: मौत की सजा से लेकर बरी होने तक का सफर

निठारी कांड(Nithari Kand) में 13 बड़े केस दर्ज हुए।
सीबीआई कोर्ट और निचली अदालतों ने कोली को लगातार कई मामलों में फांसी (Hang till Death) की सजा सुनाई।
2014 में उसका ब्लैक वारंट भी जारी हो चुका था।

  • 8 सितंबर 2014 – फांसी दी जानी थी

  • ठीक 4 घंटे पहले – सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी

2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी कर दिया।
दो बाकी मामलों में अब सुप्रीम कोर्ट से भी रिहाई मिल गई।

निठारी (Nithari): वह घर, जहां से आतंक की गंध उठी थी

29 दिसंबर 2006
पंधेर के घर के पीछे की नाली से 8 बच्चों के कंकाल मिले थे।
यहीं से भयावह कहानी सामने आई:

2005–2006 में दर्जनों बच्चियाँ और बच्चे गायब हुए—
जिनमें से कई के शव इसी इलाके से बरामद हुए।

यह मामला सिर्फ दरिंदगी का नहीं, बल्कि पुलिस की लापरवाही और जांच की विफलता का प्रतीक बन गया।

पुलिस पर गंभीर सवाल: लापरवाही, भ्रष्टाचार(Corruption) और ढिलाई

लापता बच्चों के परिजनों ने शुरू से कहा—

  • पुलिस ने शिकायतें गंभीरता से नहीं लीं

  • गायब बच्चों को ‘घर से भागे हुए’ बताकर मामला दबाया

  • कुछ अधिकारियों पर तो रिश्वत लेने के आरोप भी लगे

  • स्थानीय लोगों का दावा: शव हमें मिले, पुलिस ने क्रेडिट ले लिया

पुलिस इतने वर्षों तक पीड़ितों की सटीक संख्या तक तय नहीं कर पाई।
डीएनए टेस्ट ही एकमात्र आधार था।

निठारी आज: दर्द, डर और अनुत्तरित सवालों का गांव

निठारी (Nithari) की गलियों में आज भी एक सन्नाटा चलता है।
जो लोग अपने बच्चों की यादों के साथ जी रहे हैं—
उनके लिए यह फैसले नए ज़ख्म खोल देते हैं।

नोएडा (Noida) सेक्टर-31 कोठी नंबर D-5, जो कभी डर का पता बन गई थी—
अब और भी बड़ी पहेली बन गई है:
अगर कोली और पंधेर निर्दोष हैं… तो असली हत्यारा कौन?

2009 का पहला फैसला: मौत की सजा

13 फरवरी 2009
सीबीआई अदालत ने कोली और पंधेर दोनों को सजा-ए-मौत सुनाई।
कोली के कबूलनामे को आधार बनाकर अदालत ने कहा था—

  • हत्या के बाद दुष्कर्म का प्रयास

  • शव के अंग काटे गए

  • और कथित नरभक्षण

अदालत ने इसे सबसे घिनौना अपराध बताया था।

फांसी से कुछ घंटे पहले मिला जीवन

9 सितंबर 2014
मेरठ जेल—
फांसी की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं।
कोली को हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया था।

रात 11:45 बजे सुप्रीम कोर्ट में अचानक विशेष सुनवाई बुलाई गई।
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने दलील दी कि मामले की दोबारा सुनवाई जरूरी है।

ठीक रात 1 बजे से पहले, अदालत ने फैसला सुनाया—
कोली की फांसी पर रोक।

और आज—
18 साल बाद—
वह पूरी तरह बरी हो चुका है।

सबसे बड़ा सवाल अब भी जिंदा है…

निठारी के असली हत्यारे का क्या?

18 साल बाद भी इंसाफ कहाँ है?

क्या यह केस भारतीय जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी नाकामी है?

About The Author

About the Author

About Us

Welcome to HowTBS, your go-to digital destination for insightful stories, breaking news, and deep dives into the topics that shape our world.

BlockSpare — News, Magazine and Blog Addons for (Gutenberg) Block Editor

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports