उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-तिब्बत की सीमा से लगभग 24 किलोमीटर दूर एक गांव में भारत की अंतिम चाय की दूकान है. दरअसल यह गाँव ही भारत का अंतिम गाँव है. या यूँ कहें उधर से आने वालों के लिए यह भारत का पहला गाँव है और चाय की यह पहली दूकान है.
देश के अंतिम गांव का असली नाम ‘माणा’ है जो बद्रीनाथ धाम से 3 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है.

इस अंतिम चाय की दुकान के पास ही वेदव्यास की गुफाएं है। कहते हैं कि इन्हीं गुफाओं में वेदव्यास ने महाकाव्य ‘महाभारत’ रचा था।

इस दुकान का नाम यहां भारत की 10 भाषाओं में लिखा है ताकि यहां से गुजरने वाले ज्यादातर लोग इस दुकान को पहचान सकें.

लो जी , भारत की सबसे बड़ी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी इस दुकान को देश की अंतिम चाय की दुकान होने का सर्टिफिकेट दे दिया है.

तो एक फोटो तो जरूर बनता है।





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