Category: खबरें और राजनीति

  • इस रेस्टोरेंट में परोसा जा रहा था इंसानों का मांस, पुलिस ने कराया बंद

    इस रेस्टोरेंट में परोसा जा रहा था इंसानों का मांस, पुलिस ने कराया बंद

    हैवानियत की भी हद है, इस दुनिया में कैसे कैसे लोग होते हैं. इस रेस्टोरेंट में लोग इंसानी मांस खाते थे लेकिन ये बात उन्हें भी पता नहीं थी. जब पुलिस को ये हैवानियत पता चली तो तुरंत ही इस रेस्टोरेंट को बंद करा दिया गया.

     

    नाइजीरिया के दक्षिण-पूर्वी प्रांत अनमबरा में चलने वाले इस होटल के बारे में स्थानीय लोगों को कुछ अजीब लगा तो उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी. पुलिस ने जब रेस्टोरेंट में छापा मारा तो उन्हें वहाँ पर खून और प्लास्टिक में लिपटी हुई इंसानी खोपड़ियां मिलीं. ये लोग वहाँ आने वाले ग्राहकों को ही अपना शिकार बना लेते थे.

     

    पुलिस ने वहाँ से दस लोगों को गिरफ्तार किया है. साथ ही ऑटोमैटिक बन्दूक और बम भी बरामद हुए हैं.

    दरअसल इस रेस्टोरेंट में कहना खाने गए पादरी को जब अनुमान से काफी कम बिल आया तो उन्हें शक हुआ, इस बाबत पूंछने पर वहाँ के कर्मचारी ने बताया की उन्हें केवल मांस का एक छोटा सा टुकड़ा दिया गया था इसीलिए बिल कम आया है. लेकिन उन्हें नहीं पता था की उन्हें इंसानी मांस परोसा गया था.

    https://www.youtube.com/watch?v=KzNNodMxL_0

  • खुशखबरी: फ्रीडम 251 की कैश ऑन डेलिवरी 28 जून से शुरू

    खुशखबरी: फ्रीडम 251 की कैश ऑन डेलिवरी 28 जून से शुरू

    रिंगिंग बेल्स कंपनी ने दावा किया है की वो अपने सबसे सस्ते फोन फ्रीडम 251 को 28 जून से डेलिवरी देना चालू कर रहे हैं.

     

    उन्होंने तमाम धोखेधड़ी के दावों को खारिज किया है. कंपनी ने कहा है की जिन्होंने कैश ऑन डेलिवरी के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराया है उन्हें यह फोन 28 जून से मिलना शुरू हो जाएगा.

     

    इस फ़ोन को सस्ता होने के बावजूद ये खूबियां ख़ास बनाती हैं:

    4इंच के डिस्प्ले के साथ 3.2 मेगा पिक्सेल का मेन कैमरा और .3 मेगा पिक्सेल का फ्रंट कैमरा इसमें चार चाँद लगाते हैं. 1.3 गीगाहर्त्ज का क्वाडकोर प्रोसेसर, 1 जीबी रैम, और 8 जीबी इंटरनल मेमोरी जिसे आप 32 जीबी तक बढ़ा सकते हैं. 1450 mAh  बैटरी थोड़ी सी कम हो सकती है.

  • कैराना कांड पर कुछ लाइने

    कैराना कांड पर कुछ लाइने

    चलो चले कुछ राजनीति कर आएं,

    2017 आ गया है, चलो अपनी सरकार बनाये,

    न हिन्दू लड़ें, न मुस्लिम लड़ें, चलो इन हिन्दू मुस्लिमों को लड़ायें,

    आओ चलो, अपनी सरकार बनाये,

    जहां दंगे न हों, चलो वहाँ दंगे कराये,

    जनता न मरे तो मरवाएं,

    हिन्दू मुस्लिम को भरमाये,

    चलो 2017 आ गया है, राजनीति की रोटियां सिकवाएं,

    आओ अपनी सरकार बनाएं.

    क्या है कैराना का सच: पढ़ने के लिए क्लिक करें : http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/politics/truth-of-kairana-by-three-ground-reports/articleshow/52740142.cms

  • टीना डाबी: सिविल सेवा टॉपर – क्या वास्तव में वो अयोग्य है?

    टीना डाबी: सिविल सेवा टॉपर – क्या वास्तव में वो अयोग्य है?

    ये तो मैं भी कहता हूँ आरक्षण हटाओ, लेकिन जिन्हे आज़ादी के पहले से लेकर और बाद तक मंदिरों में जाने, कुए से पानी भरने तक से रोक गया, उन्हें भी मुख्य धारा में आने का अधिकार है.

     

    दलितों और पिछड़ों को मुख्य धारा में लाने के लिया हमारे संविधान में आरक्षण का विधान किया गया है जिसका फायदा उन्हें मिला भी. लेकिन अब स्थित ये है की जो दलित और पिछड़े मुख्य धारा में आ गए हैं वही सबसे ज्यादा आरक्षण का फायदा उठते हैं. और जिन्हें अभी तक आरक्षण का फायदा नहीं मिला वो अब भी गरीबी में जी रहे हैं.

     

    लेकिन जो अभी तक गरीब हैं उन्हें आरक्षण जरूर मिलना चाहिए. लेकिन वो ऐसे गरीब नहीं होने चाहिए जिनकी सालाना आय ६ लाख रुपये हो.

     

    एक तरफ २०-२५ रुपये रोजाना कमाने वाला गरीबी रेखा पार कर अमीरी की श्रेणी में आ जाता है और दूसरी तरफ गुजरात में ५० हजार रुपये तक महीना कमाने वाले गरीब बनकर आरक्षण पाते हैं.

     

    अब बात करते हैं टीना डॉबी और अंकित की जिनका मेसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है की अंकित के ज्यादा नंबर होते हुए भी वो फेल हो गया और टीना के काम नंबर होते हुए भी वो आरक्षण के सहारे पास हो गयी.

     

    आपको बता दें कि टीना डॉबी पहली दलित हैं जो 22 साल की उम्र में सिविल सेवा में टॉपर बनी हैं.

    Tina Dabi - Civil Services Topper, Really or Not

    हाँ ये सत्य है की प्री एग्जाम में टीना ने आरक्षण का सहारा लिया, और ये उसका हक़ है जो संविधान ने उसे दिया है. लेकिन सिविल सेवा के मेन (मुख्य) पेपर में टीना ने कोई आरक्षण नहीं लिया और जनरल कैटेगरी में परीक्षा दी है. मुख्य परीक्षा में टीना को २०२५ में से १०६३ नंबर मिले हैं. जबकि दूसरे नंबर पर अतहर आमिर हैं जिन्हें १०१८ नंबर मिले हैं. तीसरे नंबर पर जसमीत सिंह हैं जिन्हें १०१४ नंबर मिले हैं. पहली और दूसरी रैंक में ४५ अंकों का फासला है जो की बहुत बड़ा है.

     

    इसलिए ये कहना सरासर गलत है की टीना ने अयोग्य होते हुए भी सिविल सेवा में टॉप किया है.
    और भी पढ़ें: http://abpnews.abplive.in/india-news/viral-sach-truth-of-viral-message-on-tina-dabis-success-2-382185/

  • भारत में जातिवाद: कौन कहता है जातिवाद ख़त्म हो गया है?

    भारत में जातिवाद: कौन कहता है जातिवाद ख़त्म हो गया है?

    अभी कुछ दिनों की बात है, महाराष्ट्र के वाशिम जिले के कलाम्बेश्वर गाँव में रहने वाले बापूराव ताजडे की पत्नी को पड़ोसियों ने सिर्फ इसलिए कुएं से पानी नहीं भरने दिया क्यूंकि वो नीची जाति से थी. वैसे तो ये कोई नयी बात नहीं है, लेकिन इस महिला के पति ने जो कर दिखाया वो किसी आश्चर्य से कम भी नहीं है.

     

    इस बात से आहत हो कर ताजडे ने “मांझी द माउंटेन मैन” की तरह हठ कर ली और अपना कुआं खोदने की ठान ली. आठ घंटे मजदूरी करने के बाद 6 घंटे रोजाना खुदाई का काम करते हुए ताजडे ने 40 दिन में अपना कुआं खोद डाला और ये आज के आधुनिक भारत में जातिवाद के मुंह पर करारा तमाचा है.

    Who Says Casteism is Ended in India?

    ताजडे ने अपनी लगन से वो कर दिखाया जो वहाँ पर किसी ने भी सोचा नहीं था, क्यूंकि वहाँ पर आसपास के लगभग सभी कुएं और बोरवेल सूख चुके हैं. अब उस कुएं से गाँव के सभी दलित अपनी प्यास बुझा रहे हैं.

     

    इतना होने के बावजूद ताजडे गाँव के उन तथाकथित उच्च जाति (निम्न हरकतों वाले ) के लोगों के नाम नहीं बता रहे हैं. वह कहते हैं इस से गाँव के आपसी सद्भाव को ठेस पहुंचेगी तथा लड़ाई झगड़े की सम्भावना भी हो सकती है.

    जरा सोचिये क्या इसी तरह भारत से जातिवाद ख़त्म होगा?

    फोटो साभार: www.ndtv.com, www.india.com

  • देखें जापान से कितनी सस्ती है भारत की बुलेट ट्रेन

    देखें जापान से कितनी सस्ती है भारत की बुलेट ट्रेन

    हम सब भारतवासी देश की पहली बुलेट ट्रेन चलने का बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं. इसी कड़ी में रेल मंत्रालय ने बुलेट ट्रेन का किराया बताया है जो फर्स्ट क्लास AC से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा होगा.

    Why India needs Bullet Train

    जापान में टोक्यो से क्योटो के बीच की 513 किलोमीटर की दूरी के लिए लगभग 8000 रुपये चुकाने पड़ते हैं. जबकि भारत में मुंबई से अहमदाबाद के बीच की 508 किलोमीटर की दूरी के लिए लगभग 3300 रुपये चुकाने पड़ेंगे. अभी मुंबई से अहमदाबाद के बीच दुरंतो एक्सप्रेस के फर्स्ट क्लास AC का किराया लगभग 2200 रुपये है.

    Why India needs Bullet Train

     

    अनुमान है की 2023 तक लगभग 36000 लोग बुलेट ट्रेन की यात्रा करेंगे जबकि 2053 तक लगभग 186000 लोग इस ट्रेन की यात्रा कर सकेंगे. यह यात्रा लगभग 3 घंटे की होगी जिसमे यात्रा समय लगभग 2 घंटे 7 मिनट का और बाकी समय स्टेशनों पर रुकने में व्यतीत होगा. मुंबई से अहमदाबाद के बीच में कुल 12 स्टेशन बनेंगे और यह प्रोजेक्ट लगभग 97636 करोड़ रुपये में पूरा होगा.
    आखिर में काम की बात, ये ट्रेन सिर्फ ख़ास लोगों के लिए है, 90% भारतीयों के लिए इसमें बैठना तो एक बड़ा ख्वाब ही होगा.

  • ये ट्रक वाले भी ना, क्या क्या लिखते हैं

    ये ट्रक वाले भी ना, क्या क्या लिखते हैं

    हमारे देश में ट्रकों पर बहुत सारे सदविचार लिखे हुए मिल जाते हैं, लेकिन कभी कभी ये इतने फनी भी हो  जाते हैं की हंसने को दिल करता है.

     

    आती क्या खंडाला, क्या बात है…. ये ट्रक वाला भी शायद आमिर खान और रानी मुखर्जी का बड़ा वाला भक्त है.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    सही है, ये गाडी तो ईराक के पानी से ही चलेगी.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    हे भगवान्! ये तो हम सबकी जलाने में लगा है.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    पर आप ने तो दिल्ली में कांग्रेस और भाजपा की बैंड बजा दी. अब क्या कहेंगे.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    ये हिन्दुस्तानियों ने अंग्रेजी का क्या हाल बन दिया. अंग्रेज भी शरमा जाएंगे.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    ये है असल हिंदुस्तानी. अपना घर अपना देश सबसे महान. हम तो लखनऊ को भी लन्दन से कम नहीं समझते हैं.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    गाडी चलाने वाले की दिल की दास्ताँ. सही में बेचारा घर से बेघर हो जाता है. महीनो में घर का चक्कर लग पाता है. बड़ी कठिन जिंदगी है इन ट्रक वालों की भी.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    किसके इन्तजार में है ये कुंवारा स्टाफ.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    ये पढ़ लो अंग्रेजी. समझ में आ गयी तो अच्छा है नहीं तो कोई बात नहीं. बेचारा अंग्रेज तो अपना सिर पीट लेगा. और हम हिन्दुस्तानी कुछ मुस्कराएंगे.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    जिंदगी की हकीकत से वाकिफ है ये ट्रक वाला. अगर गर्लफ्रेंड होती तो पूरी कमाई उसके खर्चे उठने में ही चली जाती.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    हंस मत पगली प्यार हो जाएगा.. सही कह रहा है.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    क्या बात है… लेकिन कुछ लोग मानते कहाँ हैं, खुद तो हरिद्वार पहुँचते ही हैं और दूसरों को भी पहुंचा देते हैं.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    इससे तो दूर ही रहो. कहीं पीछे पड़ गयी तो सुनामी की तरह ही ले डूबेगी.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    हॉर्न धीरे से बजाएं, नहीं तो ऑन्टी पुलिस बुला लेगी…

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    ओह माई गॉड!! हम तो हम, अंग्रेज भी शरमा जाएंगे इस अंग्रेजी पर.

    Funny Truck Writings and Slogans in India
    “बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला” तो हमने भी सुना था, पर ये तो एकदम नया है.

    Funny Truck Writings and Slogans in India

    Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/

  • क्या आपने भारत की आखिरी चाय की दूकान देखी है?

    क्या आपने भारत की आखिरी चाय की दूकान देखी है?

    उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-तिब्बत की सीमा से लगभग 24 किलोमीटर दूर एक गांव में भारत की अंतिम चाय की दूकान है. दरअसल यह गाँव ही भारत का अंतिम गाँव है. या यूँ कहें उधर से आने वालों के लिए यह भारत का पहला गाँव है और चाय की यह पहली दूकान है.

    Last Tea Shop of India

    देश के अंतिम गांव का असली नाम ‘माणा’ है जो बद्रीनाथ धाम से 3 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है.

    Last Tea Shop of India

    इस अंतिम चाय की दुकान के पास ही वेदव्यास की गुफाएं है। कहते हैं कि इन्हीं गुफाओं में वेदव्यास ने महाकाव्य ‘महाभारत’ रचा था।

    Last Tea Shop of India

    इस दुकान का नाम यहां भारत की 10 भाषाओं में लिखा है ताकि यहां से गुजरने वाले ज्यादातर लोग इस दुकान को पहचान सकें.

    Last Tea Shop of India

    लो जी , भारत की सबसे बड़ी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी इस दुकान को देश की अंतिम चाय की दुकान होने का सर्टिफिकेट दे दिया है.

    Last Tea Shop of India

    तो एक फोटो तो जरूर बनता  है।

    Last Tea Shop of India
    Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/photomazza/weird-world/at-tibet-border-you-will-find-indias-last-tea-shop/Indias-last-tea-shop/photomazaashow/51672636.cms

  • सुख और दुःख – बस यही तो है जिंदगी

    सुख और दुःख – बस यही तो है जिंदगी

    हम सब जानते हैं, जिंदगी के दो पहलु होते हैं – सुख और दुःख.

    मैंने इस बुजुर्ग आदमी को एक रेलवे स्टेशन पर देखा, जो अपनी ट्रेन आने का इन्तजार कर रहा था. उसके साथ में दो सुन्दर घोड़े के खिलौने थे. जाहिर है वो उसके पोते पोतियों के लिए होंगे.

    जब वह घर पहुंचेगा तो उसके पोते पोती खिलौने पाकर ख़ुशी से झूम उठेंगे, लेकिन वो बच्चे उस बुजुर्ग की पीड़ा को नहीं समझेंगे.

    जैसाकि आप इस फोटो में देख रहे हैं वो जरूर एक किसान होगा, जो पूरी जिंदगी अनाज उगाने में व्यतीत कर देता है लेकिन बदले में उसे मिलते हैं नाम मात्र के पैसे.

    इस कृषि प्रधान भारत देश को स्वतंत्र हुए साठ साल से भी ज्यादा हो गए हैं लेकिन किसानों की दशा वहीं की वहीं है. किसान तब भी कर्ज में डूबा था और अब भी कर्ज में डूबा है, पहले साहूकारों का, और अब खाद बीज वालों और आढ़तियों का.

    मुझे याद है, जब अनाज पैदा होता था तो उसका कुछ हिस्सा अगली फसल के बीज के लिए रख दिया जाता था. पर अब उपज बढ़ाने के चक्कर में हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल बढ़ता गया स्थिति वहीं की वहीं रह गयी. अब अगली फसल के लिए दस गुने दाम पर हाइब्रिड बीज खरीदो क्यूंकि इन हाइब्रिड अनाज के बीजों को खाया तो जा सकता है पर दोबारा उगाया नहीं जा सकता है.

    अब किसान को इतने महंगे बीज और खाद खरीदने के लिए खाद बीज वालों से उधार करना पड़ता है. जब फसल तैयार होती है तो किसानों को जल्दी ही उसे बेचने पड़ता है ताकि उधार चुकाकर अगली फसल की तयारी की जा सके. इस समय अनाज के दाम काम होते हैं और इसका फायदा आढ़ती उठते हैं जो काम कीमत पर फसल खरीदकर स्टॉक में रख लेते हैं और जब कीमत बढ़ती है तब बेचते हैं.

    यह चक्र किसान के जीवन में जिंदगी भर चलता है. सूखा हो बाढ़ सारा रिस्क भी किसान का ही. अब इस देश का भाग्य विधाता फांसी न लगाए तो और क्या करे.

  • सावधान – कैमरे कहीं भी हो सकते हैं

    सावधान – कैमरे कहीं भी हो सकते हैं

    आजकल कैमरों का बड़ा जोर है. बड़े से लेकर छोटे कैमरे कहीं भी मिल जाते हैं. पहले सिर्फ नेगेटिव या रील वाले ही कैमरे होते थे पर अब तो डिजिटल कैमरों ने दुनिया ही बदल दी. मोबाइल में कैमरा, कहीं भी निकल और चालू हो गए, फोटो खींचने में या फिर वीडियो बनाने में.

     

    पेन कैमरा और बटन कैमरों ने तो भ्रष्टाचार (रिश्वत) को बहुत ही जोखिम भरा बन दिया. रिश्वत लेते समय ध्यान नहीं दिया तो पेन कैमरा पूरी वीडियो बना लेगा और यूट्यूब पे आपकी इज्जत की धज्जियाँ उड़ा देगा.

     

    सीसीटीवी कैमरों ने तो कार और बाइक चोरों की नाक में दम कर रखा है. बाइक चुराते समय आसपास आते जाते लोगों को तो देख लिया लेकिन कैमरों पर ध्यान नहीं दिया. नतीजा, फेसबुक और यूट्यूब पर आपकी चोरी के तरीके पर पुलिस रिसर्च कर रही होगी.

     

    लेकिन सबसे खतरनाक है MMS, लड़कियां गलती करते वक्त ध्यान नहीं देती हैं. बॉयफ्रेंड चालाकी से MMS, बना लेते हैं. फिर ब्लूटूथ से MMS एक मोबाईल से दूसरे मोबाईल तक होते हुए इंटरनेट तक जा पहुँचता है. फिर शुरू होता है खूनी खेल. इज्जत जाने के डर से माँ -बाप और लड़की फांसी लगाते हैं.