Author: Surendra Rajput

  • भारत का एक ऐसा गाँव जहां लड़की के जन्म पर 111 पौधे लगाए जाते हैं

    भारत का एक ऐसा गाँव जहां लड़की के जन्म पर 111 पौधे लगाए जाते हैं

    भारत एक ऐसा देश है जहां पर पुत्र प्राप्ति के लोग न जाने क्या क्या करते हैं और पुत्री को बोझ की तरह देखते हैं, वहीं राजस्थान के पिपलांत्री नामक गाँव में पुत्री जन्म को एक उत्सव की तरह मनाते हैं और उसे यादगार बनाने के लिए 111 फलदार वृक्षों का रोपण करते हैं. इस गाँव का यह लड़की बचाओ अभियान अपनी तरह का अनूठा है और पूरी दुनिया के लिए अनुकरणीय है.

     

    इस गाँव के लोग पुत्री जन्म के समय 21000 रुपये और परिवार द्वारा 10000 रुपये (कुल 31000 रुपये) 20 साल के लिए फिक्स डिपॉजिट करते हैं ताकि शादी के लायक होने पर पैसे की कमी आड़े न आये.

    Piplantri is an Indian Village where People Planted 111 Trees on Birth of a Girl

    साथ ही लड़की के माता पिता द्वारा एक एफिडेविट भी साइन कराया जाता है जिसमे लड़की की उचित शिक्षा, और जब तक उम्र न हो तब तक शादी न करने और लड़की के जन्म के समय लगाए गए पौधों की उचित देख रेख करना आवश्यक है.

    Piplantri is an Indian Village where People Planted 111 Trees on Birth of a Girl

    इसलिए यहां के लोग सिर्फ पेड़ लगाते भर ही नहीं हैं बल्कि उनकी उचित देख भाल भी करते हैं. पेड़ों को दीमक आदि से बचाने के लिए पेड़ों के आस पास एलो-वेरा (घृतकुमारी) के पौधे भी लगाते हैं. ये पेड़ -पौधे और खासकर एलो-वेरा यहां के कई परिवारों के लिए जीविका के साधन भी बन गए हैं.

     

    राखी के दिन इस गाँव में अजब माहौल होता है, राखी के दिन लडकियां पौधों को राखी बांधती हैं.

     

    यह अपने आप में अनूठी परंपरा इस गाँव के श्याम सुन्दर पालीवाल ने शुरू की थी जब उनकी पुत्री छोटी उम्र में ही चल बसी थी. पिछले 6 सालों में यहां पर लगभग 2.5 लाख से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं.

    Piplantri is an Indian Village where People Planted 111 Trees on Birth of a Girl

    गाँव वालों का कहना है की यहां पर पिछले 7-8 सालों से कोई भी पुलिस केस नहीं हुआ है.

     

    आखिर में, इस गाँव की परंपरा सिर्फ इस गाँव तक ही न रहकर पूरे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में होनी चाहिए. आओ हम सब इस परम्परा का हिस्सा बने और पूरी धरती को हरा भरा बनाएं.

     

    Image Source:

    www.theplaidzebra.com

    www.gaiadergi.com

    https://meramukhiya.wordpress.com

     

  • कबाड़ और बेकार पड़े स्मार्टफोन की कीमत जानकार आप रह जाएंगे दंग

    कबाड़ और बेकार पड़े स्मार्टफोन की कीमत जानकार आप रह जाएंगे दंग

    आजकल सभी लोग स्मार्टफोन के दीवाने हैं. जब भी कोई नया स्मार्टफोन मार्केट में आता है तो उसकी खूबियां देखकर सभी का मन उसे खरीदने का होता है.

     

    लेकिन अगर आपका फोन खराब हो गया है तो उसकी कोई कीमत न समझते हुए उसे या तो कबाड़ में फेंक देते हैं या फिर किसी कबाड़ी को दे देते हैं.

     

    लेकिन शायद आप नहीं जानते होंगे की ये बेकार पड़े स्मार्टफोन भी कीमती होते होते हैं. इनकी कीमत के बारे आप सुनेंगे तो दंग रह जाएंगे क्योंकि इन स्मार्टफोन को बनाने में बहुत सारी धातुएं प्रयोग होती हैं. इन फोन को बनाने में सोना, चांदी तो प्रयोग होते ही हैं साथ ही एपल आईफोन बनाने में प्लेटिनम का भी प्रयोग होता है.

     

    अब तो आप समझ ही गए होंगे की आपके बेकार पड़े स्मार्टफोन भी अच्छी खासी कीमत रखते हैं. और इन फ़ोन को रिसायकिल करके इन धातुओं को निकाल लिया जाता है.

     

    आइये जाने कितना क्या निकलता है स्मार्टफोन खराब होने के बाद:

    Value of Your Old and Scrap Smartphones

    अगर10 लाख स्मार्टफोन को रिसायकिल किया जाए तो:

    16 टन ताँबा,

    350 किलो चांदी,

    34 किलो सोना,

    15 किलो पैलेडियम, निकलता है.

     

    एक एपल आईफोन में देखें क्या क्या निकलता है:

    सोना: 0.034 ग्राम,

    चांदी: 0.34 ग्राम,

    पैलेडियम: 0.015 ग्राम,

    प्लेटिनम: 0.001 ग्राम,

    एल्युमिनियम: 25 ग्राम,

    ताँबा: 15 ग्राम.

     

    देखें वर्ष 2014 में इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ से कितना पैसा कमाया गया:

    प्लास्टिक: 901 अरब रुपये,

    ताँबा: 776 अरब रुपये,

    सोना: 762 अरब रुपये,

    लोहा और स्टील: 659 अरब रुपये,

    अल्युमिनियम: 234 अरब रुपये,

    पैलेडियम: 132 अरब रुपये,

    चांदी: 44 अरब रुपये,

     

    ये कमाई तब है जबकि केवल 10% स्मार्टफोन रिसायकिल हो रहे हैं.

     

    क्या आप जानते हैं: 2014 में इलेक्ट्रॉनिक कबाड़ से जो सोना निकला था वो दुनिया के कुल सोने के उत्पादन का 11% था.

     

    Source: http://navbharattimes.indiatimes.com/other/infographics/tech/why-mining-mobile-phones-for-precious-metals-makes-sense/articleshow/54933301.cms

  • गार्जियंस ऑफ़ द गैलेक्सी – 2 (मार्वेल): पहला टीजर जारी, जरूर देखें

    गार्जियंस ऑफ़ द गैलेक्सी – 2 (मार्वेल): पहला टीजर जारी, जरूर देखें

    हॉलीवुड के शौकीनों के लिए मार्वेल का एक और तोहफा “गार्जियंस ऑफ़ द गैलेक्सी – 2” के रूप में मिलने वाला है. जिन्होंने इस मूवी का पहला भाग देखा होगा और पसंद किया होगा उनके लिए दूसरे भाग का इन्तजार अगले साल 2017 में ख़त्म हो रहा है क्योंकि 5 मई 2017 को इस फिल्म का दूसरा भाग रिलीज हो रहा है.

    मार्वेल ने मूवी का पोस्टर भी जारी किया है, जिसे आपने ऊपर देखा ही होगा.

     

    स्पेस आधारित यह फिल्म अजूबे कलाकारों और चमत्कारों से भरी होगी. दूसरे भाग का टीजर मार्वेल ने आज ही जारी किया है. आइये देखें क्या ख़ास होगा इस फिल्म में:

     

    Source: https://techcrunch.com/2016/10/19/watch-the-first-teaser-for-marvels-guardians-of-the-galaxy-vol-2

  • विकास किसका, देश या सांप्रदायिकता का? गन्दी राजनीति के उदाहरण

    विकास किसका, देश या सांप्रदायिकता का? गन्दी राजनीति के उदाहरण

    “मंदिर-मस्जिद दाढ़ी चोटीकाट रहे बोटी-बोटी

    बांट रहे हैं हम बच्चों कोछीन रहे हैं सबकी रोटी।।”

    भारत विश्व में अकेला ऐसा धर्मनिरपेक्ष देश हैजहां सभी धर्मों का सम्मान और महत्व है। धर्मनिरपेक्ष शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह संशोधन सभी धर्मों की समानता और धार्मिक सहिष्णुता सुनिश्चित करता है। भारत में हर व्यक्ति को अपने पसन्द के किसी भी धर्म की उपासनापालन और प्रचार करने का अधिकार है। ऐसे तमाम धार्मिक अधिकार दिए गए हैंलेकिन कहीं न कहीं धार्मिक अधिकारों का हनन  भी हुआ हैजिसे हम सांप्रदायिकता का नाम भी दे सकते हैं।

    देश के 1947 में विभाजन पर भड़के दंगों ने कई लाख लोगों के घरों का उजाड़ दिया। लोगों ने इसे अपनी नीयती मानकर मन को समझा लिया क्योंकि देश भारत-पाकिस्तान के रूप में बंट गया था। फिर से आपसी भाइचारे की नींव डलने लगी थी, देश विकास की ओर अग्रसर होने को तैयार था, लेकिन कहते हैं न कि जख्म कभी न कभी तो हरे हो ही जाते हैं, बस उनको कुरेदने वाले शख्स चाहिए।

    देश में आजादी के बाद से लेकर अब तक न जाने कितनी बार देश के किसी न किसी हिस्से में किसी न किसी कारण से दंगे हुए हैं। आखिर क्यों होते है दंगेइसका जवाब हमें पुराने बीते सालों में हुए दंगों से मिलता है। देश में पहला सांप्रदायिक दंगा 1961 में मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ। उसके बाद से आज तक दंगों की झड़ी सी लग गयी-बात चाहे 1969 में गुजरात दंगों की हो, 1984 में सिख विरोधी हिंसा की हो, 1987 में मेरठ के दंगों की हो,1989 में भागलपुर दंगों की हो, 2002 में गुजरात दंगों की हो, 2008 में कंधमाल की हिंसा हो या हाल ही में असम की होजिसमें सात दिनों में जारी हिंसा में करीब दो लाख लोगों ने घर छोड़ा या मुजफ्फरनगर दंगों की होजो लड़की के साथ छेड़छाड़ के मुद्दे से शुरू हुआ और दंगों के रूप में सामने आया। हाल ही में गोहत्या के मामले पर विवाद शुरू हो गया है। जिसे लेकर दो समुदाय फिर से आमने-सामने हैं। इसकी शुरूआत मुंबई में भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार की ओर से गोश्त की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाने से हुई। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 1932 के रनबीर पैनल कोड के गोमांस प्रतिबन्धित कानून को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के इस फैसले पर दो महीने तक के लिए रोक लगा दी है।

    विकास का एजेंडा हमें 2014 के लोकसभा चुनाव से देखने को मिल रहा हैवहीं दूसरी ओर देश में तनाव बढ़ता जा रहा है।  ‘मेक इन इंडियाÓ,’डिजिटल इंडियाÓ के नारों ने जो जोर विकास के एजेंडे पर दिया थाइस मुद्दे ने इसे पीछे छोड़ दिया है। राजनेता लोगों की संवेदनाओं से खेलकर अपना वोट बैंक तैयार करने में लगे हैं। इसे तब और ज्यादा तूल दियाजब ग्रेटर नोएडा के दादरी के बिसाहड़ा गांव के व्यक्ति इकलाख की गोमांस रखने और खाने की अफवाह के कारण पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। उसके पुत्र को भी घायल कर दिया। जहां नेता राजनैतिक करियर संवारने के लिए भड़काऊ भाषण दे रहे हैं। वहीं कुछ मुस्लिम नेताओं ने इस विवाद को शांति से खत्म करने की कोशिश और गोकशी पर कानून बनाने के लिए भी सरकार से अपील की है।

    राष्ट्र्रपति प्रणब मुखर्जी,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंहऔर कई नेताओं ने इस हत्या की निंदा की है और सहिष्णुता और सौहार्द की मीठी बोली को देश का गौरव बता भाइचारे का संदेश दिया है। पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू सहित साहित्यकारों ने भी अपनी भावना प्रकट की है।

    कई साहित्यकारों ने इस घटना के विरोध में खुद को दिए गए पुरस्कारों को लौटा दिया है। परंतु देश के मीडिया ने इस विवाद को जरूरत से ज्यादा तूल देना शुरु कर दिया हैजो उनकी टीआरपी के लिए सुखद हो सकता है। लेकिन देश के लिए दु:खद बात है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी इस हत्या की कड़ी निंदा की है और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ा हुआ है। यूपीए-की सरकार ने दंगा निरोधक कानून को साल 2011 में अन्तिम रूप दे दिया था। इस विधेयक के मसौदे के अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि देश में सांप्रदायिक हिंसा पर नियन्त्रण पाने का एक महत्वपूर्णगंभीर व प्रभावी प्रयास होगा। विधेयक राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। यह अभी राज्यसभा में लम्बित है। सभी देश और खुद का विकास चाहते हैंलेकिन अफवाहों से खेलते देश का नहींजहां ये नारा दिया जाए-

    “लगाया था जो उसने पेड़ कभी, अब वह फल देने लगा, मुबारक हो हिन्दुस्तान में, अफवाह के नाम पे कत्ल होने लगा”

    अब यह निर्णय देश की जनता के साथ ही लोकतंत्र के भावी नेताओं के लिए भी जरूरी हो गया है- विकास किसकादेश या सांप्रदायिकता का?

    लेखक: वैशाली पाराशर

  • कैंसर क्या है? बीमारी या बिजनेस? क्या इसका प्राकृतिक उपचार संभव है?

    कैंसर क्या है? बीमारी या बिजनेस? क्या इसका प्राकृतिक उपचार संभव है?

    “कैंसर शब्द ही झूठ है…”

     

    आपको विश्वास नहीं होगा, लेकिन कैंसर कोई बीमारी नहीं बल्कि ये बहुत बड़ा बिजनेस है.

    हम सबके मन में एक विश्वास पैदा किया गया की कैंसर बच्चे, बूढ़े और जवान किसी को भी हो सकता है.

     

    दुनिया में बड़े बड़े बिजनेसमैन, राजनेता हैं जो बहुत सारी चीजों को कंट्रोल करते हैं, और उन्हें अपने हिसाब से चलाकर खूब पैसा कमाते हैं. लेकिन जब तक यह आम जनता जान पाती है तब तक वो करोड़ों, अरबों रुपये कमा चुके होते हैं.

     

    क्या आपने “World Without Cancer” किताब पढ़ी है? शायद नहीं, क्योंकि इसे दुनिया की कई भाषाओं में ट्रांसलेट करने से रोक दिया गया है. लेकिन क्यों? ये आप इस पोस्ट को पूरी पढ़ने के बाद समझ जाएंगे.

     

    कैंसर क्या है: कैंसर कुछ नहीं है, ये केवल विटामिन B17 की कमी है.

     

    इसलिए कीमोथेरेपी,सर्जरी और बहुत अधिक साइड इफेक्ट वाली दवाओं को खाने से बचना चाहिए. क्योंकि इसके बाद आप एक बार डॉक्टर के चक्कर के नहीं निकल पाएंगे.

     

    पुराने जमाने की एक हकीकत सुनिये, तब हवाई जहाज नहीं थे, लोग पानी के जहाज़ों पर यात्रा करते थे. एक देश से दूसरे देश तक जाने में महीनों लग जाते थे. महीनों तक खान – पान अव्यवस्थित हो जाता था जिसकी वजह से स्कर्वी नाम का रोग हो जाता था. इस स्कर्वी की वजह से बहुत से लोग मर जाते थे. लेकिन बिजनेसमैन इसमें भी कहाँ काम थे, उन्होंने दवाओं के नाम पर करोड़ों कमाए. लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पता लगाया तो पता चला की ये सिर्फ विटामिन “C” की कमी थी. इसका मतलब यह कोई बीमारी नहीं थी.

     

    कैंसर भी ठीक इसी तरह है. मानवता के दुश्मनों ने कैंसर इंडस्ट्री खड़ी की और इसे बिजनेस बना कर करोड़ों कमाए.

    Cancer- Illness or Business

    कैंसर इंडस्ट्री द्वितीय विश्व युद्ध के बाद खूब फली फूली. कैंसर से लड़ने के लिए, इतनी देरी, और अत्यधिक खर्चे की जरूरत नहीं थी. लेकिन जब कैंसर का कारण खोज लिया गया था तो इससे जनता को जागरूक किया जा सकता था. लेकिन नहीं, क्योंकि जो लोग इस धंधे में शामिल थे वो ही सरकार बनाने और गिराने का काम भी करते हैं.

     

    कैंसर के कारण और बचाव के लिए आपको क्या करना है:

     

    जिसको भी कैंसर है उसे सबसे पहले जानना है की कैंसर क्या है. डरने की बात नहीं है, आपको कैंसर के कारण की जांच करनी चाहिए.

     

    क्या आप आजकल सुनते हैं कोई स्कर्वी से मर गया? नहीं, क्योंकि इसका बचाव है.

     

    चूँकि कैंसर सिर्फ विटामिन B17 की कमी है, 15 से 20 Apricot (खुबानी) के बीज खाना पर्याप्त होगा.

     

    अंकुरित गेहूं खाइये. अंकुरित गेहूं चमत्कारिक रूप से कैंसर-रोधी दवा है. इसमें भरपूर मात्रा में द्रव ऑक्सीजन और Laetrile जो बहुत ही मजबूत कैंसर-रोधी है, पाया जाता है. यही Laetrile सेब के बीजों में भी पाया जाता है जो उच्च क्वालिटी का विटामिन B17 (Amygdalin) होता है.

     

    अमेरिका की दवा कम्पनियाँ अब Laetrile का प्रोडक्शन करने लगी हैं.यह दवा मेक्सिको में बनती थी और अमेरिका में स्मगलिंग के जरिये आती है.

     

    डॉक्टर हेरोल्ड मैनर की किताब “Death of Cancer” में लिखा है की Laetrile से कैंसर का ट्रीटमेंट 90% से ज्यादा कामयाब होता है.

     

    किस – किस में Amygdalin (Vitamin B17) पाया जाता है:

    फलों के बीज. इनमे भारी मात्रा में प्राकृतिक विटामिन B17 पाया जाता है. सेब के बीज, खुबानी, नासपाती, आडू और सूखे बेर के बीज.

     

    फलियां और अनाज: अंकुरित मसूर, सेम और मटर के दाने.

     

    कड़वा बादाम और भारतीय बादाम.

     

    बेरी: लगभग सभी तरह की बेरी, शहतूत, ब्लूबेरी, रास्पबेरी और स्ट्रॉबेरी.

     

    तिल और सन के बीज.

     

    जई / जौ / बेझर का दलिया, भूरे चावल, ब्लॉक गेंहू, तिल, बाजरा और राई का दलिया.

     

    कैंसर रोधी खाना:

    Cancer- Illness or Business

    खुबानी के बीज

    सेब, आडू, नासपाती, चेरी और बेर के बीज

    सेम

    बाकला

    गेंहूँ के जवारे

    बादाम

    रास्पबेरी

    एल्डर बेरी

    स्ट्राबेरी

    काले शहतूत

    ब्लूबेरी

    Buckwheat

    ज्वार

    जौ

    बाजरा

    काजू

    मकदामिया

    अंकुरित बीन

     

    ये सब विटामिन B17 के प्राकृतिक स्रोत हैं.

     

    कैंसर के कारण:

     

    कैंसर का मुख्य कारण है हमारा अव्यवस्थित खान-पान और नशे की लत. न खाने वाले केमिकल ना चाहते हुए भी खाने के साथ खाना. आप जो बर्तन साफ़ करने का लिक्विड और हाथ साफ़ करने का लिक्विड इस्तेमाल करते हैं वो कितना भी साफ़ करने के बावजूद पूरी तरह साफ़ नहीं होता है. और ये दो कैंसर के मुख्य स्रोत हैं.

     

    आप पक्का यही कहेंगे की हम ये नहीं खाते हैं, और बर्तन व हाथ खूब अच्छी तरह से धुलते हैं.

     

    लेकिन आप कितनी भी अच्छी तरह से बर्तन चमका ले या फिर कितनी भी अच्छी तरह से हाथ साफ़ कर ले, लेकिन केमिकलयुक्त ये लिक्विड बर्तनों द्वारा सोख लिए जाते हैं. जब हम इन बर्तनों में खाना बनाते हैं या फिर खाना खाते हैं तो ये केमिकल गरमागरम खाने के साथ घुल जाते हैं और सीधे हमारे पेट में जाते हैं.

     

    इसका भी इलाज है, आप बर्तन धोने के लिक्विड की आधी बोतल खाली करके उसमे उतना ही सिरका मिला ले. बस हो गया.

     

    ये रक्त-कैंसर का कारण है, इससे अपने आपको और अपने परिवार को बचाइए.

     

    कुछ लोग इस लिक्विड से फल और सब्जियां भी धोते हैं. लेकिन ये लिक्विड फलों द्वारा सोख लिया जाता है. इस तरह फल और सब्जियों को धोने के बजाय आप नमक में या नमक के पानी में कुछ देर रखें और उन्हें धो लें. इन्हें ताजा रखने के लिए सिरके में रखें.

     

    इस जानकारी को सिर्फ अपने तक ही सीमित न रखें बल्कि दूसरों को भी बताये. शेयर जरूर करें.

     

    Sources:

    http://www.newsrescue.com/secret-uncovered-cancer-not-disease-business/

    http://waystobeatcancer.eu/10-proven-alternative-cancer-treatments/

    https://draxe.com/vitamin-b17/

  • हमारे देश का पासपोर्ट कितना ताकतवर है, जानिये किन किन देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं

    हमारे देश का पासपोर्ट कितना ताकतवर है, जानिये किन किन देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं

    पासपोर्ट की ताकत:

    अमेरिका और इंग्लैण्ड के पासपोर्ट पर वहाँ के लोग बिना वीजा के 150 से अधिक देशों की यात्रा कर सकते हैं. यही पासपोर्ट की ताकत है की आप अपने देश के पासपोर्ट पर कितने देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं, या फिर आपके उस देश में पहुँचने पर तुरंत वीजा मिल जाता है. इन देशों में जाने के लिए आपको पहले से वीजा बनवाने के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं है.

     

     

    सबसे ताकतवर देश:

    जर्मनी 158

    स्वीडन 158

    इंग्लैण्ड 157

    इटली 156

    सिंगापुर 155

    अमेरिका 155

    जापान 154

    मलेशिया 151

    ऑस्ट्रेलिया 151

    ताइवान 120

    रूस 104

    चीन 55

    भारत 49

    नेपाल 40

    श्रीलंका 39

    बांग्लादेश 37

    पाकिस्तान 27

    अफगानिस्तान 24

     

    देखें अपने देश के पासपोर्ट की ताकत:

    भारतीय पासपोर्ट धारक 49 देशों की यात्रा बिना वीजा के कर सकता है, या फिर उस देश में पहुँचने पर तुरंत वीजा बन सकता है जबकि पाकिस्तान 27 देश, चीन 45 देश व बांग्लादेश के लोग केवल 37 देशों की यात्रा कर सकते हैं.

     

     

     

    देखें हम किस किस देश में बिना वीजा के घूम सकते हैं:

    1. भूटान
    2. हॉन्गकॉन्ग
    3. भारत
    4. साउथ कोरिया
    5. मकाउ
    6. नेपाल
    7. अंटार्टिका
    8. सैशेल्स

    9 . फैरो  मकदूनिया

    1. स्वालबार्ड
    2. डॉमिनिका
    3. ग्रेनेडा
    4. हैती
    5. जमैका
    6. मोन्टसेर्रट
    7. St. Kitts & Nevis
    8. St. Vincent & Grenadines
    9. त्रिनिदाद  और टोबैगो
    10. Turks & Caicos Islands
    11. ब्रिटिश वर्जिन इसलैंड्स
    12. अल साल्वाडोर
    13. इक्वेडोर
    14. कुक आइलैंड
    15. फिजी
    16. माइक्रोनेशिया
    17. निउए
    18. सामोआ
    19. वानातू
    20. कंबोडिया
    21. इंडोनेशिया
    22. लाओस
    23. थाईलैंड
    24. तिमोर लेस्ते
    25. इराक  (बसरा)
    26. जॉर्डन
    27. Comoros Is.
    28. मालदीव्स
    29. मॉरिशस
    30. केप वेर्डे
    31. दजिबॉती
    32. इथियोपिया
    33. गैम्बिया
    34. Guinea-Bissau
    35. केन्या
    36. मेडागास्कर
    37. मोजांबिक
    38. Sao Tome & Principe
    39. तंज़ानिया
    40. टोगो
    41. यूगांडा
    42. जॉर्जिया
    43. ताजीकिस्तान
    44. St. Lucia
    45. निकारागुआ
    46. बोलीविया
    47. गुयाना
    48. नॉरू
    49. पलाउ
    50. टवालू

     

    साभार (डाटा और फोटो):

    http://www.indiatimes.com/news/india/ever-wondered-how-many-countries-the-indian-passport-will-let-you-travel-to-without-a-visa-244943.html

    https://www.passportindex.org/byRank.php

  • विकसित भारत की एक तस्वीर  – फटे कपडे, हाथ में पट्टी और जमीन पर खाना – पालमती देवी

    विकसित भारत की एक तस्वीर – फटे कपडे, हाथ में पट्टी और जमीन पर खाना – पालमती देवी

    भारत के रॉकेट चंद्रमा पर पहुँच गए हैं, बुलेट ट्रेन चलने वाली है, विकास की ओर चार कदम चलकर विकसित देश का तमगा भी मिलने वाला है. लेकिन क्या यही विकास है?

     

    रांची, मरीज पालमती देवी, हाथों में पट्टी बंधी हुई, बिना प्लेट के फर्श पर खाना खाती हुई, क्या दोष है? गरीबी या नीची जाति या फिर संवेदनहीनता?

     

    सरकारी अस्पताल “रिम्स” के हड्डी रोग वॉर्ड में एडमिट पालमती देवी के पास अपनी प्लेट नहीं थी. प्लेट मांगने पर अस्पताल के रसोईकर्मियों ने प्लेट की कमी बताते हुए प्लेट देने से मना कर दिया. इसके बाद वार्डबॉय ने मरीज से ही फर्श साफ़ कराया और चावल और सब्जी फर्श पर ही रख दी. गरीबी की मारी पालमती देवी फर्श पर ही खाना खाने को मजबूर हुई.

     

    अभी कुछ दिन पहले ही दाना मांझी के साथ हुई घटना ने दुनिया के सामने देश का सिर नीचा कर दिया था, अब फिर से अस्पतालों की संवेदनहीनता सामने आयी है.

     

    क्या यही देश का विकास है? देश के किसान और गरीबों की कोई सुनने वाला है भी या नहीं? भारत माता और गौ माता के बीच में हम सब अपनी माताओं को शायद भूल ही गए हैं.
    Image Source: khabar.ndtv.com

  • लॉकहीड SR-71 ब्लैकबर्ड – अमेरिकन एयर फ़ोर्स का यह जहाज आपके दिमाग की बत्ती गुल कर देगा

    लॉकहीड SR-71 ब्लैकबर्ड – अमेरिकन एयर फ़ोर्स का यह जहाज आपके दिमाग की बत्ती गुल कर देगा

    जो जहाज हम आज सपने में देखते हैं, अमेरिकन एयर फ़ोर्स उस जहाज को आज से 17-18 साल पहले रिटायर कर चुका है. अमेरिका इतने विकसित जहाज को सन 1964 में बना चुका था जब हमारे देश के पास अँधेरे में उड़ने वाले जहाज भी नहीं थे. इस जहाज की स्पीड के बारे में सुन कर आपकी आँखें चौड़ी हो जाएंगी. आइये इस जहाज की कुछ खासियतें आपको बताते हैं.

     

    लॉकहीड SR-71 ब्लैकबर्ड नाम है इस जहाज का. यह जहाज अमेरिकी एयर फ़ोर्स में 1964 से 1998 तक रहा. इस तरह के सिर्फ 32 जहाज थे जिनमे 12 एक्सीडेंट में नष्ट हुए थे नोट करने वाली बात ये है की इनमे से एक भी जहाज दुश्मन नष्ट नहीं कर पाया.

    Blackbird Spy Plane of US Air Force

    इस प्लेन को मैक 3 से भी तेज उड़ने के लिए बनाया गया था. यह स्टील्थ टाइप का पहला जहाज था जो राडार को धोखा दे सकता था. इसे डार्क ब्लू या लगभग काले रंग में रंगा गया था ताकि ये रात में भी आसमान में दिखाई न दे, और यही कारण था की इसका नाम ब्लैकबर्ड पड़ा. इसकी खासियत इसकी तेज रफ़्तार और बहुत ही अधिक ऊँचाई पर उड़ना था जिसकी वजह से इसे ट्रैक कर पाना नामुमकिन था.

     

    इसे बनाने में ज्यादातर टाइटेनियम का प्रयोग किया था, इसके शीशे 2 इंच मोटे क़्वार्टज़ के बनाये गए थे. क्योंकि इसकी अत्यधिक स्पीड की वजह से इसकी विंडस्क्रीन का टेम्परेचर 360 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता था.

     

    इसके पायलट के लिए स्पेशल मास्क होता था क्योंकि जो मास्क साधारण फाइटर प्लेन के पायलट के लिए  काम में लाये जाते थे वो केवल 13000 मीटर तक ही काम करते है. लेकिन यह प्लेन 24000 मीटर की ऊँचाई पर उड़ता है जहां हवा का प्रेशर और ऑक्सीजन बहुत ही कम हो जाते हैं. इसके लिए आतंरिक दबाव वाले सूट उपयोग में लाये जाते है जिसमे ऑक्सीजन की कमी होने पर ऑनबोर्ड ऑक्सीजन की सप्लाई करके सूट का दबाव नार्मल किया जाता है. इसके पायलट का सूट अंतरिक्ष यात्रियों के लेवल का था.

    Blackbird Spy Plane of US Air Force

    इस प्लेन की पहली फ्लाइट 22 दिसंबर 1964 में हुई थी. इस प्लेन का सर्वाधिक ऊँचाई पर उड़ने का रिकार्ड 25,929.03 मीटर का है जबकि स्पीड के मामले में भी इसका रिकार्ड 3,529.56 किलोमीटर प्रति घंटे(सन 1976) का है.

     

    खासियत:

     

    यह अब तक का दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला प्लेन है.

     

    25 साल के इतिहास में इसपर 4000 मिसाइल छोड़ी गयी लेकिन इसके अत्याधुनिक सिस्टम जो मिसाइल की स्पीड के हिसाब से प्लेन की स्पीड को बढ़ा देता था की वजह से 25 साल में इस जहाज को कोई भी मिसाइल छू तक नहीं पायी है.

     

    इतने तेज स्पीड में उड़ने के बावजूद इसके कॉकपिट में इतनी शांति रहती थी की आप पिन गिरने की आवाज भी सुन सकते थे.

     

    यह दुश्मन के राडार सिग्नल और कम्युनिकेशन सिस्टम को डिस्टर्ब कर सकता था.

     

    इसका नेविगेशन सिस्टम (R2-D2) इतना जबरदस्त था की दोपहर में जमीन पे खड़े हुए भी यह 61 तारों को देख सकता था.

     

    इस जहाज को बनाने के लिए काफी मात्रा में टाइटेनियम की जरूरत थी. लेकिन टाइटेनियम का सबसे बड़ा सप्लायर सोवियत संघ (अब रूस) था जो अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन भी था. इसलिए CIA ने दुनिया भर में फर्जी कम्पनियाँ बनाकर सोवियत संघ से पर्याप्त मात्रा में टाइटेनियम खरीद लिया. एक तरह से ये सब अवैध और स्मगलिंग की श्रेणी में आता है.

    Blackbird Spy Plane of US Air Force

    इस प्लेन के खड़े होने पर इसका फ्यूल लीक होता रहता था क्योंकि इसे इसी तरह बनाया गया था. लेकिन इस फ्यूल को सीधे आग से भी आग नहीं लगती थी. इसमें सिर्फ उड़ान भरने का ही फ्यूल होता था, टैंक में फ्यूल उड़ान के दौरान ही भरा जाता था क्योंकि खड़े होने पर इसके बॉडी पैनल ठन्डे होने की वजह से ढीले हो जाते थे. इसी वजह से इसका फ्यूल खड़े होने पर लीक होता रहता था.

     

    इस प्लेन का क्रू मेंबर बनने के लिए आपकी उम्र 25-40 के बीच, शादीशुदा और अपने इमोशन पर कंट्रोल होना चाहिए.

     

    इस प्लेन में हवा में ही फ्यूल भरने की सुविधा थी.

     

    इसके टायर भी साधारण नहीं थे. अल्युमिनियम मिक्स टायर भी केवल 20 बार ही लैंड कर सकते थे जबकि स्पीड कम करने के लिए पैराशूट का भी प्रयोग होता था.

     

    पोलाराइड कैमरा के फाउंडर इस जहाज के डिजाइन के इंचार्ज थे. वो इसलिए क्योंकि ब्लैकबर्ड एक जासूसी विमान था और वो फोटोग्राफी के बारे में बहुत कुछ जानते थे.

     

    इस प्लेन की टेस्टिंग रहस्यमयी Area-51 में हुई थी.

     

    यह प्लेन एक घंटे में 20000 किलोग्राम से ज्यादा फ्यूल जला देता था, हर 90 मिनट में इसे दोबारा भरना पड़ता था. लेकिन मैक 2 की स्पीड (सुपरसोनिक स्पीड) के बाद इसकी छमता बढ़ जाती थी. इसके पीछे “रैमजेट इफेक्ट” का नियम था जिसमे सुपरसोनिक स्पीड में हवा और फ्यूल दोनों कंप्रेस हो जाते हैं.

     

    Images and Resources:

    https://en.wikipedia.org/wiki/Lockheed_SR-71_Blackbird

    www.cnn.com

    www.Iliketowastemytime.com

    www.sbnation.com

    https://www.thrillist.com/cars/facts-history-and-trivia-about-the-fastest-plane-in-the-world-the-supersonic-lockheed-martin-sr71-blackbird-spy-plane

    http://sploid.gizmodo.com/rare-photos-of-the-sr-71-blackbird-show-its-amazing-his-1670184930

    http://www.historyinorbit.com/15-fascinating-facts-about-the-sr-71-blackbird-the-fastest-plane-on-earth/

  • ये 10 स्थान अगर अभी नहीं देखे तो फिर कभी नहीं देख पाएंगे

    ये 10 स्थान अगर अभी नहीं देखे तो फिर कभी नहीं देख पाएंगे

    किसी ने ठीक ही कहा है:

    सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहाँ?

    जिंदगी गर कुछ रही तो नौजवानी फिर कहाँ?

     

    लेकिन यहां बात कुछ अलग है क्योंकि जिंदगानी और नौजवानी रही या न रही लेकिन घूम तो सकते ही हैं, लेकिन अगर घूमने वाली जगह ही न रहे तो??

     

    तो आइये हम आपको बताने जा रहे हैं 10 ऐसी जगहों के बारे में जो धीरे – धीरे ख़त्म हो रही हैं और कुछेक वर्षों में ये या तो पूरी तरह ख़त्म हो जाएंगी या फिर उनके अवशेष ही देखने को मिलेंगे.

     

    इसका मुख्य कारण है प्रदूषण. जिसकी वजह से दुनिया का स्वरुप ही बदलता जा रहा है. पहाड़ पिघल रहे हैं, जंगल समाप्त हो रहे हैं और कई जीव प्रजातियां या तो ख़त्म हो गयी हैं या फिर ख़त्म होने की कगार पर आ गयी है.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    १. गालापागोस आइलैंड:

    12% की दर से टूरिज्म सेक्टर के बढ़ते प्रभाव, होटल, रेस्टॉरेंट और मोटर गाड़ियों की वजह से इन निर्जन वीरान दीपों की खूबसूरती ख़त्म हो रही है. स्मगलिंग द्वारा बाहर से आये हुए जानवर यहां के जीवों और जंगलों को प्रभावित कर रहे हैं. क्रूज शिप द्वारा आये हुए चूहे भी यहां की प्राकृतिक सम्पदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

     

    लगभग 9000 तरह के जीव इस दीप और आसपास के समुद्री पानी में रहते हैं.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    २. मालदीव:

    मालदीव दुनिया के सबसे निचला देश है, जो एशिया के सबसे कम आबादी और क्षेत्रफल वाला है. 1200 दीपों में से लगभग 80% दीप समुद्र तल से 1 मीटर से भी काम ऊँचाई पर हैं जो लगभग 100 साल में समुद्र में डूब सकते हैं. यह समस्या कितनी गंभीर है इसका अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं की 2008 में यहां के राष्ट्रपति ने भविष्य में यहां के लोगों को बसाने के लिए भारत समेत दूसरे देशों में जमीन खरीदनी शुरू कर दी है.

     

    ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्र तल में बढ़ोत्तरी और कोरल ब्लीचिंग की वजह से डूबने के खतरा.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    ३. ग्रेट बैरियर रीफ:

    बढ़ते समुद्री तापमान, जल प्रदूषण और चक्रवातों की वजह से कोरल चट्टानें ख़त्म हो रही हैं और समुद्री पानी के तेजाबीकरण के कारण कोरल (मूंगा) के रंग ख़त्म हो रहा है. ऐसा संभावित है की 8000 साल पुराने ये 60% कोरल रीफ 2030 तक समाप्त हो सकते हैं.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    ४. वेनिस:

    वेनिस पर भी डूबने के खतरा मंडरा रहा है. बढ़ते समुद्र तल की वजह से स्थिति और खतरनाक हो गयी है. हर साल बढ़ रही बाढ़ आने की संख्या भी इसके डूबने के पुख्ता सबूत दे रहे हैं. पिछले 100 सालों में वेनिस 9 इंच समुद्र में डूब चूका है.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    ५. मृत सागर:

    यह दुनिया के सबसे निचला स्थान है जो समुद्र तल से 1388 फ़ीट नीचे है. इसके पानी में आप बिना तैरे भी नहीं डूबेंगे. इसका पानी समुद्र से 10 गुना ज्यादा खारा है. मृत सागर पिछले 40 साल में एक तिहाई रह गया है और 80 फ़ीट सूख गया है. पुराने होटल और रेस्टॉरेंट अब इसके किनारे से 1 किलोमीटर दूर हो गए हैं. इसके पानी के मुख्य श्रोत केवल जॉर्डन नदी है लेकिन आस पास के देशों द्वारा इस नदी के पानी के पानी के अत्यधिक उपयोग की वजह से यहां पर नाम मात्र के पानी आता है, इसलिए ये अगले 50 साल में पूरी तरह सूख जाएगा.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    ६. ऐल्प्स पर्वत:

    यहां का तापमान 1880 से अब तक दो गुना बढ़ चूका है. ऐल्प्स के ग्लेसियर पिघल रहे हैं और इनके 2050 तक पूरी तरह गायब हो जाने की संभावना है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से यहां का तापमान 0.72 डिग्री F हर दस साल में बढ़ रहा है.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    ७. मेडागास्कर:

    मेडागास्कर दुनिया का चौथा सबसे बड़ा आइलैंड है. जंगली वातावरण बुरी तरह से नष्ट हो रहा है जिसकी वजह से यहां के जंगल और जानवर ख़त्म हो रहे हैं. यहां के जंगलों को अगर अभी नहीं बचाया गया तो मेडागास्कर को ख़त्म होने में 35 साल से भी कम समय लगेगा.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    ८. कांगो बेसिन:

    यह ऐमेज़ॉन के बाद दुनिया के दूसरा सबसे बड़ा बरसाती जंगल है जो 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. यहां के जंगल दुनिया की 40% ऑक्सीजन के उत्पादन करते हैं. कांगो बेसिन की विशालता का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं की यह सात देशो की सीमा में फैला हुआ है.

     

    संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अगर अभी इसके बचाव की कोशिश नहीं की गयी तो दो तिहाई जंगल और इसके अनोखे पौधे और जानवर 2040 तक ख़त्म हो सकते हैं. अवैध खनन, खेती और गुरिल्ला युद्ध की वजह से 10 मिलियन एकड़ जंगल हर साल ख़त्म हो रहा है.
    Visit Travel Places before They Destroyed

    ९. ग्लेशियर नेशनल पार्क:

    100 साल पहले तक यहां 150 ग्लेशियर थे लेकिन साल 2005 तक यहां पर केवल 27 ग्लेशियर बचे हैं. और अनुमान है की 2030 तक बचे हुए ग्लेशियर भी गायब हो जाएंगे. ग्लोबल वार्मिंग और पानी व बर्फ की कामी के चलते ये ग्लेशियर नष्ट होने की कगार पर हैं.

    Visit Travel Places before They Destroyed

    १०. ताज महल:

    ताज महल के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे. यह हमारे देश का प्रमुख पर्यटन स्थल है. ताज महल 1632 में बनना शुरू हुआ था और 21 साल में पूरा हुआ था. इसे बनाने में 20000 व्यक्ति और 1000 हाथियों की मदद ली गयी थी. इसका मुख्य गुम्बद 35 मीटर ऊंचा है. इसे देखने के लिए 30 से 40 लाख लोग हर साल आगरा आते हैं.

     

    भीड़ और वायु प्रदूषण की वजह से इसके संगमरमर की सफेदी पर पीलेपन की परत चढ़ती जा रही है. कई सौ साल पुरानी इस इमारत पर गिरने के ख़तरा भी मंडरा रहा है. कई जगह पुनर्निर्माण के काम होता रहता है. कई कमरे और मुख्य कब्रें जो मुख्य गुम्बद के नीचे जमीन के अंदर हैं वो पहले से ही बंद किये जा चुके हैं.

     

    हो सकता है इसे अगले 4-5 सालों में ही जनता के लिए बंद कर दिया जाए और सिर्फ दूर से ही देखने की अनुमति प्रदान की जाए.

     

    इस विडियो को देखें:

    https://www.youtube.com/watch?v=ylx_uW6ocTc

    Image Source: http://mentalfloss.com/