Author: Surendra Rajput

  • दिखावा: जिन्दगी जीने को तरसती रही, लोग जन्म दिन मनाते रहे

    दिखावा: जिन्दगी जीने को तरसती रही, लोग जन्म दिन मनाते रहे

    आज की इस दौड़-भाग वाली जिंदगी में लोग हँसते – मुस्कराते दिखाई पड़ते हैं लेकिन हकीकत में अंदर से टूटे हुए होते हैं. बड़े शहरों की जिंदगी शायद कुछ ऐसी ही है.

    मौत हर दिन –
    पास सरकती रही,
    हम जन्म दिन मनाते रहे,
    जिन्दगी जीने को तरसती रही.
    दिखावे से लिपी -पुती,
    धोखे से रंगी -पुती,
    पातळ में –
    आकाश खोजती जिन्दगी,
    अन्धकार को
    समझ प्रकाश
    दौड़ती रही,
    अपने को ही छलती रही, जो मिला था
    उसे तो भूलती रही
    और नित नया पाने को
    तरसती रही, भागती रही
    अंधी दौड़ में फंसती रही,
    मौत पास सरकती रही
    जिन्दगी जीने को तरसती रही.

    साभार: अज्ञात

  • मेरे सब्र का न ले इम्तिहान, मेरी खामोशियों को सदा न दे

    मेरे सब्र का न ले इम्तिहान, मेरी खामोशियों को सदा न दे

    किसी को प्यार करना और उसे हमेशा के लिए पा सकना जिंदगी की सबसे खूबसूरत घटना है…

    लेकिन किसी को बेइंतिहा प्यार करना और उसे खो देना, यह जिंदगी की दूसरी ऐसी घटना है जो हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होती है…

    आखिर खोने से पहले बहुत कुछ जो हमने पाया होता है, उसे हमसे कोई छीन नहीं सकता.

     

    मेरे सब्र का न ले इम्तिहान, मेरी खामोशियों को सदा न दे।
    तेरे बगैर जी न सके, उसे जिन्दगी की दुआ न दे।

    Hindi Poem and Shayari - Mere Sabr ka Na Le Imtihaan

    तू अजीज दिल-ओ-नजर से है, तू करीब रग-ऐ-नजर से है।
    मेरे जिस्म-ओ-जान का ये फासला, कहीं वक्त और बढ़ा न दे।

    तुझे भूल के भी भुला न सकूं, तुझे चाह के भी पा न सकूं।
    मेरी हसरतों को शुमार कर, मेरी चाहतों का सिला न दे।

    जरा देख चाँद की पत्तियों ने, बिखर-बिखर तमाम शब्।
    तेरा नाम लिखा है रेत पर, कोई लहर आके मिटा न दे।

    नए दौर के नए ख्वाब हैं, नए मौसमो के गुलाब हैं।
    ये मोहब्बतों के चिराग है, उन्हें नफरतों की हवा न दे।

    Hindi Poem and Shayari - Mere Sabr ka Na Le Imtihaan

    मैं उदासियों न सजा सकूं, कभी जिस्म-ओ-जान के नजर पर।
    न दिए जले मेरी आँख में, मुझे इतनी सख्त सजा न दे।

    मो. हासिम सिद्दीकी द्वारा भेजी गयी

  • श्री कृष्ण और कर्ण संवाद – जीवन का सार

    श्री कृष्ण और कर्ण संवाद – जीवन का सार

    महाभारत के बारे में कौन नहीं जानता, यह युद्ध धर्म की रक्षा हेतु पांडवों और कौरवों के बीच लड़ा गया. कुरुक्षेत्र में लड़ा गया यह धर्म युद्ध असीम जन-धन हानि के लिए विख्यात है साथ ही इस युद्ध से गीता जैसा  महाग्रन्थ मिला जो जीवन के गूढ़ रहस्यों से हमें अवगत कराता है. कहा गया है की गीता में जीवन के हर सवाल का जवाब है.

    महाभारत की बात करें तो इसका हर चरित्र और उनका जीवन हमें कुछ न कुछ सीख देते हैं. इस युद्ध को   मुख्यतः पांडव और कौरवों के नजरिये से देखा गया है, लेकिन इस पूरी महाभारत में का एक किरदार की हमेशा अनदेखी हुई है, वो है कर्ण.

    कर्ण को हमेशा ही दुर्योधन के समर्थक के रूप में देखा गया, लेकिन अगर इसे मित्रता के रूप में देखें तो हमेशा ही कर्ण सबसे आगे दिखाई देता है. कर्ण को जब सबने दुत्कार दिया, चाहे वो कर्ण की माँ कुंती हो या गुरु द्रोणाचार्य हों, तब दुर्योधन ने मित्रता निभाई. उस मित्रता का बदला कर्ण ने महाभारत  में दुर्योधन के पक्ष में युद्ध लड़कर और अपनी जान देकर निभाया.

    कर्ण का चरित्र अपने आप में वीरता की मिसाल है और हमें कई सीख देता है.

    महाभारत युद्ध में श्री कृष्ण और कर्ण के बीच हुए संवाद की बात करें तो यह भी जीवन का गूढ़ ज्ञान है और जीवन के कई सवालों का हल मिलता है.

    आइये देखें श्री कृष्ण और कर्ण के बीच हुए संवाद के मुख्य अंश:

    कर्ण:

    हे कृष्ण, जन्म लेते ही मेरी माँ ने मुझे छोड़ दिया, गरीब घर में होते हुए भी मैं शूरवीर पैदा हुआ तो इसमें मेरा क्या दोष है? गुरु द्रोणाचार्य ने पांडवों और कौरवों को शिक्षा दी लेकिन मुझे शिक्षा नहीं दी क्यूंकि मैं क्षत्रिय नहीं था.

    मैंने परशुराम से शिक्षा ली, लेकिन यह जानने के पश्चात् की मैं क्षत्रिय नहीं हूँ, मुझे सब शिक्षा भूल जाने का श्राप दिया.

    द्रौपदी के स्वयंवर में मेरा सिर्फ इसलिए अपमान हुआ क्यूंकि मैं क्षत्रिय नहीं था. मेरी माता ने भी सिर्फ अपने पांच पुत्रों की रक्षा करने के लिए यह सत्य बताया की मैं उनका पुत्र हूँ.

    जो कुछ आज मैं हूँ वो सब दुर्योधन की देन है. तो फिर मैं उसके पक्ष में युद्ध करके भी क्यों गलत हूँ.

    श्री कृष्ण का उत्तर:

    हे कुंती पुत्र कर्ण, हाँ तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ. लेकिन मेरी कहानी तुमसे कुछ ज्यादा अलग नहीं है. मेरा जन्म कारागार में हुआ और जन्म के तुरंत बाद ही माँ बाप से बिछड़ गया. मेरी मृत्यु जन्म से पहले ही तय कर दी गयी.

    तुम कम से कम धनुष वाण और घोड़े और रथ के साथ खेलते हुए बड़े हुए, लेकिन मैं गाय, बछड़े, गोबर और झोपडी में बड़ा हुआ. चलना सीखने से पहले ही मुझ पर कई प्राणघातक हमले हुए. कभी पूतना तो कभी बकासुर…

    मैं सोलहवें साल में गुरु संदीपनी के पास शिक्षा लेने जा पाया. लेकिन हमेशा ही लोगों को यह लगता था की मैं उनके कष्ट हरने के लिए पैदा हुआ हूँ.  तुमने कम से कम अपने प्रेम को पा लिया और उस कन्या से विवाह किया जिसे तुम प्रेम करते थे. लेकिन मैं अपने प्रेम को विवाह में नहीं बदल पाया. और तो और  मुझे उन सब गोपियों से विवाह करना पड़ा जो मुझसे प्रेम करती थी या जिन्हें मैंने राक्षसों से मुक्त कराया.

    इतना सब कुछ होने के बावजूद तुम शूरवीर कहलाये जबकि मुझे भगोड़ा कहा गया.

    इस महाभारत के युद्ध में अगर दुर्योधन जीता तो तुम्हें इसका बड़ा श्रेय मिलेगा लेकिन अगर पांडव युद्ध जीते भी तो मुझे क्या मिलेगा. सिर्फ यही की इतने विनाश का कारण मैं हूँ.

    इसलिए हे कर्ण! हर किसी का जीवन हमेशा चुनौतियों भरा होता है. हर किसी के जीवन में कहीं न कहीं अन्याय होता है. न सिर्फ दुर्योधन बल्कि युधिष्ठिर के साथ भी अन्याय हुआ है. किन्तु सही क्या है ये तुम्हारे अंतर्मन को हमेशा पता होता है. इसलिए हे कर्ण अपने जीवन में हुए अन्याय की शिकायत करना बंद करो और खुद का विवेचन करो. तुम अगर सिर्फ जीवन में अपने साथ हुए अन्याय की वजह से अधर्म के रास्ते पर चलोगे तो यह सिर्फ तुम्हें विनाश की तरफ ले जाएगा.

    अधर्म का मार्ग केवल और केवल विनाश की तरफ जाता है.

  • मेरी प्रार्थना – मैं ईश्वर से क्या मांगता हूँ

    मेरी प्रार्थना – मैं ईश्वर से क्या मांगता हूँ

    मेरे देव,

     

    मुझे संकटों से बचाओ, यह प्रार्थना करने मैं तुम्हारे द्वार नहीं आया. मैं तो वह शक्ति मांगने आया हूँ, जो संकटों में संघर्ष कर खिलती है.

     

    मैं जीवन के दुखों से भयभीत हो, उनसे रक्षा करने की प्रार्थना करने नहीं, उन दुखों का सामना करने का साहस मांगने आया हूँ.

     

    मैं मंझधार से हाँथ पकड़ कर निकालने की प्रार्थना करने नहीं, उसी में तैरते रहने का उत्साह मांगने आया हूँ.

     

    तुमने मुझे काँटों पर चलने की प्रेरणा दी, गिरने पर उठ चलने का सहारा दिया. मुझे सदा अपनी छाया दी, तभी तो मैं तुझसे यह वरदान मांगने आया हूँ की कोई मुझे विष पिलाये, तब भी मैं उसे अमृत पिला सकूँ.

  • क्या जानते हैं आप कानपुर का धार्मिक इतिहास

    क्या जानते हैं आप कानपुर का धार्मिक इतिहास

    वैदिक, पौराणिक और धार्मिक आस्था तथा ऐतिहासिकता को समेटे कानपूर आर्य सभ्यता का प्राचीन केंद्र रहा है. कानपूर जनपद का भू-भाग पुण्यतोया गंगा – यमुना के दोआब भाग में स्थित है. कानपूर के इस भू-भाग में पौराणिक काल के बहुत से ऋषि मुनियों का प्रवास और जन्म स्थान की मान्यता भी है. जनपद में गंगा का प्रवेश आकिन ग्राम से होता है. आकिन ग्राम में सप्त ऋषि प्रधान अंगिरा का आश्रम होने की मान्यता है. ब्रह्मा के मानस पुत्र अंगिरा तपस्या से अग्नि के सामान तेजवान थे. श्री कृष्ण ने पाशुपत योग की प्राप्ति महृषि अंगिरा से ही किया था. अंगिरा को चौथे द्वापर का व्यास भी कहा गया है. इसी तरह गंगा किनारे सैबसू ग्राम में कश्यप पुत्र विभाण्डक के पुत्र श्रृंगी का आश्रम है. श्रृंगी एक कर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे. अंगदेश में अकाल होने पर राजा रोमपाद को सुझाव दिया गया की ब्रह्मचारी श्रृंगी के अंगदेश आने पर अकाल समाप्त हो सकता है. रोमपाद ने प्रयास कर उन्हें बुलाया जिससे वर्षा हुई. राजा ने अपनी पालित पुत्री का विवाह श्रृंगी से कर दिया तथा श्रृंगी ने राजा दशरथ के पुत्र्येष्टि यज्ञ को पूरा कराया. गंगा के सुरम्य तट पर बिठूर में बाल्मीकि का आश्रम है. भगवान् राम की पत्नी सीता ने यहीं प्रवास किया था, लव कुश का जन्म भी यहीं हुआ था तथा रामायण महाकाव्य की रचना भी यहीं हुई थी.

    दैत्य राज बलि की राजधानी ‘मूसानगर’ में शुक्राचार्य का स्थान माना जाता है. भगवान वामन के तीन पग भूमि दान में बाधा बनने पर उनकी आँख जाती रही. यहां पर शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी के नाम पर सरोवर भी विद्धमान है. देवयानी का विवाह ययाति के साथ हुआ, जिनकी राजधानी जाजमऊ में थी.

    सेंगुर नदी के तट पर निगोही ग्राम में तपस्वी और क्रोधमूर्ति दुर्वासा ऋषि का आश्रम है. उन्होंने भक्त अंबरीश को शाप तथा दुष्यन्तपत्नी शकुंतला को शाप दिया था. इसी तरह ग्राम “परसौरा” भगवान परशुराम और “चिंता निवादा” उनके पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम माना जाता है. भृगु पुत्र ऋचीक और गाधिपुत्री सत्यवती से जमदग्नि ऋषि का जन्म हुआ. भगवान् परशुराम को विष्णु का अवतार माना जाता है. “नार” ग्राम नारदाश्रम के नाम से प्रसिद्ध है. नारद पूर्व में दासी पुत्र थे.

    महाभारत कालीन द्रोणपुत्र चिरंजीवी अश्वत्थामा का जन्मस्थान शिवराजपुर के पास ककयपुर में खेरेश्वर में है. मान्यता है की सप्त चिरंजीवियों में से अश्वत्थामा आज भी खेरेश्वर महादेव का प्रातः अभिषेक करते हैं. भक्तराज ध्रुव की राजधानी बहिर्ष्मतीपूरी बिठूर में मानी जाती है. बालिपुत्र बाणासुर की राजधानी “बनीपारा” में है. वहां पर बना ऊषाबुर्ज आज भी उनकी पुत्री का स्मरण दिलाता है. ययाति से जाजमऊ और माता-पिता के भक्त श्रवण कुमार के नाम से “सरवन खेड़ा” प्रसिद्ध है. आज भी यह पौराणिक धार्मिक तीर्थ आध्यात्मिक पर्यटन की ओर लोगों को आकर्षित करते हैं. इनसभी तीर्थ स्थलों के विकास पर शासन को अवश्य ध्यान देना चाहिए.
    साभार: सचिन तिवारी

  • इस फिल्म मेकर ने बाहुबली-2 में ऐसी 5 कमियां निकाली कि राजमौली को उत्तर देने के लिए मजबूर होना पड़ा

    इस फिल्म मेकर ने बाहुबली-2 में ऐसी 5 कमियां निकाली कि राजमौली को उत्तर देने के लिए मजबूर होना पड़ा

    बाहुबली-2 की ऐसी कमियां जिसे आप भी नहीं पकड़ सके.

    राजमौली की बाहुबली-2 ” द कॉन्क्लुजन “ हिन्दुस्तान सिनेमा के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए आगे बढ़ती जा रही है. लोगों ने पहली मूवी की भांति ही इस मूवी को भी पसंद किया और राजमौली सहित सभी किरदारों की प्रशंसा की. पूरी दुनिया से जहां इस फिल्म को रेकार्ड तोड़ सफलता मिल रही है वहीँ एक फिल्म मेकर ने इस फिल्म की 5 ऐसी कमियां निकाली की राजमौली को उत्तर देने पर विवश होना पड़ा.

    आइये देखते हैं पूरा मसला क्या है:

    फिल्म मेकर विग्नेश शिवान ने फिल्म की प्रंशसा करते हुए एक ट्वीट किया और इस फिल्म की पांच कमियों की ओर इंगित किया जिन्हें पढ़कर आप भी विग्नेश के ट्ववीट के कायल हो जाएंगे.

    विग्नेश के अनुसार बाहुबली -2 के दर्शक अभी और भी देखना चाहते हैं इसलिए बाहुबली -३ बनाने के लिए प्रार्थना करते हैं. इस फिल्म की प्रशंसा में विग्नेश आगे लिखते हैं:

    1. इतने शानदार शो के लिए १२० रुपये की टिकट बहुत कम लग रही है, इसलिए एक कलेक्शन बॉक्स  या प्रोड्यूशर का अकॉउंट नंबर भी एक्स्ट्रा पेमेंट के लिए देना चाहिए.

    2. बाहुबली-2 की लम्बाई बहुत ही कम है. इतने मस्त अनुभव को आपने केवल 3 घंटे में ख़त्म कर दिया.

    3. इतना शानदार और परफेक्ट वर्क, दूसरे फिल्म मेकर्स को अपने काम को परफेक्शन के साथ करने के लिए प्रेरित करते हैं.

    4. बाहुबली-2 “कॉन्क्लुजन” नहीं होना चाहिए. इसमें तो 10 पार्ट का “इन्क्लूजन” होना चाहिए, जिससे हम निकट भविष्य में और चमत्कार देख सके.

    5. इस फिल्म के रेकॉर्ड देखकर समझ नहीं आता है कि इसके रेकॉर्ड तोड़ने वाली फिल्म बनने में कितना साल और लगेंगे.

    देखें विग्नेश ने क्या ट्वीट किया:

    विग्नेश के ट्वीट को पढ़कर राजमौली अपने आपको रोक नहीं पाए और विग्नेश को रिप्लाई किया.

     

    क्या आप विग्नेश द्वारा बाहुबली-2 में निकाली गयी कमियों से संतुष्ट हैं?

    अगर हाँ तो कमेंट और शेयर करें.

    Source: http://topyaps.com/baahubali-5-mistakes

  • क्या कोई समय चुरा सकता है? आइये देखते हैं, कैसे करते हैं लोग समय की चोरी

    क्या कोई समय चुरा सकता है? आइये देखते हैं, कैसे करते हैं लोग समय की चोरी

    आपने लोगों को टाइम पास करते सुना होगा, समय काटते, समय बर्बाद करते सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी सुना है की लोग समय की चोरी भी करते हैं.

     

    हाँ जी आपने सही सुना, बहुत सारे लोग करते हैं समय की चोरी. हो सकता है आप में से भी कुछ लोग समय चुराते हों.

     

    आइये देखते हैं कैसे….

     

    क्या कभी आप सरकारी ऑफिस में गए हैं? वहाँ पर कितने कर्मचारी अपना काम करते दिखते हैं, या फिर अपनी कुर्सी पर मिलते हैं? समझ लीजिये जो काम नहीं कर रहा है वह समय की चोरी कर रहा है.

     

    सरकार उनको 8 या 9 घंटे काम करने की तनख्वाह देती है लेकिन क्या वो अपना काम ईमानदारी से करते हैं?

     

    यह हाल सिर्फ सरकारी ऑफिसों का ही नहीं है बल्कि प्राइवेट सेक्टर में भी लोग जम कर समय चुराते हैं.

     

    लोग कैसे कैसे तरीके आजमाते हैं समय चुराने के लिए:

     

    1. लंच टाइम या ब्रेक को लम्बा खींचना: अगर कोई कर्मचारी रोज-रोज लंच टाइम ख़त्म होने के बाद भी सीट पर नहीं मिलता है तो समझ लीजिये वो समय चुरा रहा है. सरकारी स्कूल हों या सरकारी ऑफिस, शायद ही कोई समय चोरी न करता हो.

     

    1. दूसरे कर्मचारी की उपस्थिति लगाना: इसे अंग्रेजी में Buddy Punching कहते हैं. अगर कोई कर्मचारी देरी से आता है तो दूसरा सहयोगी उसकी उपस्थिति लगा देता है. यह भी समय चोरी का उपाय है. इस तरह की समय चोरी को कम करने के लिए प्राइवेट सेक्टर जहां सीसीटीवी कैमरा और फिंगर प्रिंट सेंसर का उपयोग करने लगे हैं वहीँ सरकारी ऑफिसों में भी इस तरह की इलेक्ट्रॉनिक मशीनो का उपयोग शुरू हो गया है. लेकिन सरकारी ऑफिस में अगर ये मशीन अगर एक बार खराब हुई तो उसे ठीक होने में भी कई साल लग सकते हैं. क्यूंकि मशीन ठीक करने वाले भी तो समय चुराते हैं.

     

    1. कंपनी के डाटा/इंटरनेट को दूसरे कामों में खर्च करना: आजकल सोशल मीडिया का दौर है और हर कोई फेसबुक और व्हाट्सएप्प चला रहा है. लेकिन इन निजी कामों को भी लोग कंपनी के इंटरनेट से ही करते हैं, और साथ ही कंपनी जिस काम के लिए उन्हें सैलरी दे रही है उस काम के बजाय फेसबुक चलाते हैं. इस तरह की समय चोरी कम करने के लिए कंपनी आजकल कर्मचारियों के कम्प्यूटर पर सोशल साइट्स को ब्लॉक कर रही हैं.

     

    1. ऑफिस में गप्पे मारना: अगर कोई कर्मचारी ऑफिस के समय में गप्पे मार रहा है तो इसका सीधा मतलब है वह दोगुना समय चोरी कर रहा है, अपना तो कर ही रहा है साथ ही एक और कर्मचारी को अपने साथ गप्प मारकर समय चोरी करवा रहा है. इस तरह का माहौल दूसरे कर्मचारियों की एकाग्रता भंग करता है जो काम कर रहे होते हैं.

     

    1. टाइम कार्ड भूलना या खो जाना: समय चोरी रोकने के लिए टाइम कार्ड का इस्तेमाल आजकल चलन में है. लेकिन कुछ घाघ लोग इसकी भी काट निकाल लेते हैं. वह हर दूसरे दिन “टाइम कार्ड घर भूल आया” या “टाइम कार्ड खो गया” जैसे बहाने बनाते हैं.

     

    1. काम को समय पर पूरा न करना: अगर किसी कर्मचारी के सामने फाइलों का ढेर लगा है तो इसका मतलब सिर्फ यह नहीं है की वह बहुत काम करता है, इसका एक मतलब ये भी हो सकता है कि वो बिलकुल काम न करता हो. या फिर समय चोरी कर आज के काम को कल पर छोड़ता हो और कुछ समय पश्चात् न किया कुआ काम उसके मेज पर फाइलों के ढेर के रूप में दिखाई देने लगता है.

     

    1. मीटिंग के बहाने समय चुराना: बेमतलब की मीटिंग को लम्बा खींचकर भी समय चोरी करते हैं लोग.

    Time Theft

    1. ऑफिस के समय को निजी कामों में खर्च करना: अगर इमरजेंसी को छोड़ दे तो भी लोग ऑफिस टाइम में लोग खूब फ़ोन पर बाते करते हैं या फिर अपना निजी काम करते हैं. प्राइवेट ऑफिसों में तो कई जगह फ़ोन को ऑफिस के गेट पर ही जमा करवा लिया जाता है.

     

    1. उस कर्मचारी की सहायता करना जिसे सहायता कि जरूरत न हो: किसी काम को अगर एक कर्मचारी कर रहा है और जानबूझ कर दूसरा कर्मचारी उस काम में पहले कर्मचारी कि सहायता कर रहा है तो इसका साफ़ मतलब है कि वो भी समय चोरी कर रहा है.

     

    Source: http://rmagazine.com/time-theft-10-ways-employees-stretch-time-at-work/

    Image Source: komiclogic.com, mynbc5.com

  • चारधाम यात्रा अब डिजिटल: उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने चारधाम यात्रियों के लिए लांच किया एंड्राइड मोबाइल ऍप

    चारधाम यात्रा अब डिजिटल: उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने चारधाम यात्रियों के लिए लांच किया एंड्राइड मोबाइल ऍप

    वर्ष 2017 में अप्रैल के अंतिम सप्ताह से चारधाम यात्रा शुरू होने जा रही है. इस यात्रा में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने पिछले वर्ष “एक्सप्लोर आउटिंग” (Explore  Outing ) नाम की एंड्राइड मोबाइल ऍप लांच की थी. इस ऍप के जरिये चारधाम यात्रा करने वाले यात्री अपने आस-पास की जानकारी और यात्रा से जुड़े लेटेस्ट अपडेट प्राप्त कर सकते हैं.

     

    उत्तराखंड पर्यटन सचिव शैलेश बगोली के अनुसार इस ऍप से यात्री रेस्टोरेंट, होटल, पुलिस, अस्पताल, पेट्रोल पम्प, शौचालय और एटीएम के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

     

    यह ऍप केवल न केवल चारधाम के यात्रियों बल्कि टूरिज्म सेक्टर के कारोबारियों के लिए भी बनाया गया है, यहां पर होटल और रेस्टोरेंट जैसी सर्विस  देने वाले भी अपने बिज़नेस को रजिस्टर कर सकते हैं.

     

    इस ऍप से आस-पास के कुछ किलोमीटर के अंदर आने वाले मुख्य ट्रेवल डेस्टिनेशन के बारे में भी जानकारी मिलेगी और साथ ही अगर आप वीकेंड के लिए प्रोग्राम बना रहे हैं तो यह ऍप आपको 50 से 100 किलोमीटर की रेंज में आने वाली घूमने योग्य जगहों के बारे में भी जानकारी प्रदान करेगा.

     

    इस ऍप पर लाइव रूट मैप की जानकारी भी मिलेगी. इस ऍप पर यात्री फोरम में अपनी जानकारी फोटो के साथ शेयर कर सकते हैं. चूँकि चारधाम यात्रा के मार्ग कठिन पहाड़ों से होकर गुजरता है, इसलिए कभी भी रास्ते में व्यवधान आदि होने और सड़क के ठीक होने पर यात्री तुरंत इसकी जानकारी ऍप के माध्यम से दूसरे यात्रियों को दे सकते हैं.

     

    इस ऍप में लाइव मौसम की जानकारी भी दी गयी है, जिससे मौसम के अनुसार यात्री अपनी यात्रा को जारी रख सकते हैं.

     

    एक्सप्लोर आउटिंग ऍप पर्यटकों की सुविधा के साथ सुरक्षा का भी ध्यान रखता है और लेटेस्ट जानकारियां नोटिफिकेशन के माध्यम से मोबाइल पर आती रहती हैं.

     

    यह ऍप सिर्फ चार धाम ही नहीं बल्कि भारत के सभी यात्री इस्तेमाल कर सकते हैं और रास्ते में पड़ने वाली समस्याओं का समाधान इस ऍप के माध्यम कर सकते हैं.

     

    “एक्सप्लोर आउटिंग” (Explore  Outing ) ऍप को आप http://uttarakhandtourism.gov.in/ पर दी गयी लिंक से या फिर सीधे गूगल प्ले स्टोर पर सर्च करके या इस लिंक पर क्लिक करके (https://play.google.com/store/apps/details?id=com.gabbit.travelhelper ) डाउनलोड और इनस्टॉल कर सकते हैं.

     

    और जानकारी के लिए देखें:

    http://www.exploreouting.com/

    http://uttarakhandtourism.gov.in/

    http://timesofindia.indiatimes.com/city/dehradun/Tourism-app-launched-for-char-dham-yatra-pilgrims-other-tourists/articleshow/52015992.cms

    http://www.dailypioneer.com/state-editions/dehradun/explore-outing-mobile-app-launched-to-boost-char-dham-tourism.html

    http://www.news18.com/news/india/tourism-ministry-launches-a-mobile-app-to-help-users-explore-16-indian-cities-698257.html

     

    http://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-13939645.html

    http://m.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-13935434.html?src=articleREL

    http://www.samaylive.com/regional-news-in-hindi/uttarakhand-news-in-hindi/349988/uttarakhand-tourism-department-has-launched-a-mobile-application.html

  • 10 मिनट में हेलीकॉप्टर से दिल्ली दर्शन, वो भी केवल 2500 रुपये में

    10 मिनट में हेलीकॉप्टर से दिल्ली दर्शन, वो भी केवल 2500 रुपये में

    अभी तक केवल वीआईपी लोग ही हेलीकाप्टर में बैठ और घूम पाते थे, लेकिन अब आप भी हेलीकाप्टर से दिल्ली  की सैर कर सकते हैं और वो भी मात्र 2500 रुपये में. पहले दिल्ली और आस पास के इलाकों में हेलीकॉप्टर की सामान्य उड़ानों पर प्रतिबन्ध था लेकिन अब सरकारी हेलिकॉप्टर सेवा देने वाली कंपनी पवन हंस अपने रोहिणी स्थित हेलिपोर्ट से दिल्ली दर्शन सेवा शुरू करने जा रही है. अभी दिल्ली दर्शन सेवा केवल सप्ताहांत में उपलब्ध होगी लेकिन कुछ समय के अंदर इसे रोजाना शुरू किया जाएगा. आप दिल्ली दर्शन के लिए www.pawanhans.co.in पर टिकट बुक करा सकते हैं.

     

    आपको बता दें की पवन हंस दिल्ली दर्शन की दो तरह की सेवाएं देने जा रहा है जिसमे 20 मिनट की यात्रा के लिए 5000 रुपये और 10 मिनट की यात्रा के लिए 2500 रुपये वसूलें जाएंगे.

     

    20 मिनट की यात्रा में दिल्ली के पीतमपुरा टॉवर, मजनूं का टीला, लाल किला, राजघाट और अक्षरधाम मंदिर के आसपास के इलाकों के नजारे दिखाए जाएंगे. लेकिन 10 मिनट की सेवा में कवर होने वाले इलाकों की अभी जानकारी नहीं दी गयी है.

     

    दिल्ली के रोहिणी में देश का पहला हेलिपोर्ट अभी कुछ समय पहले ही शुरू किया गया है. यहां से कुछ समय में नजदीकी शहरों के लिए भी उड़ान शुरू करने पर विचार चल रहा है. दिल्ली से मेरठ और मथुरा के लिए सेवाएं शुरू हो सकती हैं परंतु अभी किराया फाइनल नहीं हो पाया है.

  • मैट्रिक्स लवर्स के लिए खुशखबरी: द मैट्रिक्स की अगली फिल्म पर काम शुरू

    मैट्रिक्स लवर्स के लिए खुशखबरी: द मैट्रिक्स की अगली फिल्म पर काम शुरू

    अगर आप हॉलीवुड फिल्मो के शौक़ीन हैं तो ये खबर आपको खुश करने वाली है. द मैट्रिक्स की अगली फिल्म पर काम शुरू हो गया है. वार्नर ब्रदर्स ने “द मैट्रिक्स” रिबूट पर काम शुरू कर दिया है. “द हॉलीवुड रिपोर्टरके अनुसार स्टूडियो ने फिल्म के मेकिंग के लिए काम शुरू कर दिया है.

    Warner Bros. Started Work on The Matrix Reboot

    मैट्रिक्स सीरीज की अभी तक तीन फिल्मे आई हैं, पहली “द मैट्रिक्स” 1999 में, दूसरी “द मैट्रिक्स रिलोडेड” व तीसरी “द मैट्रिक्स रेवोलुशन्स” 2003 में. इस सीरीज की तीनो फिल्मो ने फरबरी 2016 तक 3 बिलियन डॉलर की कमाई करके बॉक्स ऑफिस की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली लिस्ट में अपना नाम दर्ज करा लिया है.

    Warner Bros. Started Work on The Matrix Reboot

    मैट्रिक्स सीरीज कीनू रीव्स के लिए हॉलीवुड में एक्शन हीरो के तौर पर मील का पत्थर साबित हुई. लेकिन आने वाली फिल्म में बतौर हीरो “क्रीड” फिल्म के Michael B. Jordan का नाम चर्चा में है.

    Warner Bros. Started Work on The Matrix Reboot

    क्या ये सही (या गलत) समय है नयी मैट्रिक्स फिल्म के लिए: यहाँ पढ़िए

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    https://youtu.be/KNrSNcaYiZg

    Read More: http://www.hollywoodreporter.com/heat-vision/matrix-reboot-works-at-warner-bros-986292
    Source: http://www.businessinsider.in/a-reboot-of-the-matrix-is-in-the-works/articleshow/57653308.cms