Category: खबरें और राजनीति

  • पकड़ी गई इंसानी चेहरे वाली म्यूटेंट शार्क, दहशत में आए लोग

    पकड़ी गई इंसानी चेहरे वाली म्यूटेंट शार्क, दहशत में आए लोग

    जकार्ता
    इंडोनेशिया के एक मछुआरे ने इंसानी चेहरे वाले एक म्यूटेंट शार्क (Mutant Shark)को पकड़ा है। जिसे देखने के बाद लोग दहशत में आ गए। इंसानों जैसे चेहरे (Looks like Human Face) वाली इस शार्क को एक बड़ी शार्क के पेट से निकाला गया है। इस शार्क को मछुआरे ने बेचने से इनकार करते हुए घर में ही पालना शुरू किया है। जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग इसे देखने आ रहे हैं।

    शार्क के पेट से मिला इंसानों जैसे दिखने वाला बच्चा

    इस म्यूटेंट बेबी शार्क को 48 साल के मछुआरे अब्दुल्ला नूरन ने ईस्ट नुसा तेंगारा प्रांत में रोटे नादो के पास से पकड़ा था। इस मछुआरे ने गलती से अपनी जाल में एक गर्भवती शार्क को पकड़ लिया था। जिसके बाद उसने जब शार्क को काटा तो उसके पेट से 3 छोटे-छोटे बच्चे निकले। इनमें से एक का चेहरा इंसानों की तरह मिलता था।

    मछुआरे ने शार्क को बेचने से किया इनकार

    अब्दुल्ला नूरन ने ने कहा कि मैंने शुरू में एक बड़ी शार्क को अपने ट्रालर के नीचे जाल में फंसा हुआ देखा। अगले दिन जब मैंने शार्क को काटा तो उसके अंदर तीन बच्चे निकले। उनमें से दो बच्चे तो अपनी मां की तरह दिखते थे, लेकिन एक का चेहरा एकदम इंसानों जैसा था। जिसके बाद मैं इस बेबी शार्क को घर ले आया और उसे पाल रहा हूं।

    Mutant Shark Looks Like Human Face

    शार्क के बच्चे को पाल रहा है मछुआरा

    उन्होंने बताया कि उनके पड़ोसी सहित बहुत से लोग ऐसे हैं जो जो इस शार्क के बच्चे को खरीदना चाहते हैं। लेकिन, मैंने सभी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। मेरे घर पर उन लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है जो इस शार्क को देखना चाहते हैं। बहुत से लोग इसे खरीदना चाहते हैं, लेकिन मैं इसके बजाय इसे संरक्षित करूंगा। मुझे लगता है कि इससे मेरी किस्मत बदल जाएगी।

    Source: Navbharat Times

  • कौन है दिशा रवि (Disha Ravi) और क्या होता है टूलकिट (Toolkit)

    कौन है दिशा रवि (Disha Ravi) और क्या होता है टूलकिट (Toolkit)

    तीन कृषि कानूनों (Agricultural law) के खिलाफ चल रहे किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में रविवार को पहली गिरफ्तारी हुई। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने शनिवार को इसमें संलिप्तता के आरोप में कर्नाटक के बंगलूरू से 21 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि (Disha Ravi) को गिरफ्तार किया है। उसे रविवार को अदालत में पेश करने के बाद 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। उन पर पर्यावरण परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) द्वारा साझा की गई टूलकिट (Toolkit) को एडिट करने और बाद में आगे बढ़ाने का आरोप है। अब दिशा की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से लेकर तमाम विपक्षी नेता दिशा की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं। जानिए कौन हैं दिशा रवि (Disha Ravi) और सोशल मीडिया (Social media) पर उनकी गिरफ्तारी का विरोध क्यों हो रहा है…

    कौन है दिशा रवि (Disha Ravi)

    नार्थ बंगलुरु के सोलादेवना हल्ली इलाके की रहने वाली व जलवायु कार्यकर्ता (Climate Activist) दिशा ने माउंट कैमेल कॉलेज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन स्नातक की डिग्री हासिल की है। इस समय वह गुड माइल्क कंपनी के साथ जुड़ी हुई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी के समय वह अपने घर में की काम कर रही थी। दिशा रवि के पिता मैसूर में एक एथलेटिक कोच है। मां एक गृहिणी हैं। दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि की गिरफ्तारी को लेकर बंगलुरु पुलिस को जानकारी दी थी।

    Who is Disha Ravi

    टूलकिट में क्या था

    टूलकिट (Tootlkit) में बताया गया था किसान आंदोलन में सोशल मीडिया पर समर्थन कैसे जुटाए जाएं। हैशटैग का इस्तेमाल किस तरह से किया जाए और प्रदर्शन के दौरान क्या किया जाए और क्या नहीं, सब जानकारी इसमें मौजूद थी। तीन फरवरी को एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने किसानों का समर्थन करते हुए इस टूल किट को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। बाद में इस टूलकिट को सोशल मीडिया ने प्रतिबंधित कर उसे डिलीट कर दिया था।

    Source: Amar Ujala Hindi Dainik

    टूलकिट (Toolkit) में होते हैं विस्तृत सुझाव

    टूलकिट एक तरह का डॉक्यूमेंट होता है जिसमें किसी मुद्दे की जानकारी देने के लिए और उससे जुड़े कदम उठाने के लिए इसमें विस्तृत सुझाव होते हैं। आमतौर पर किसी बड़े अभियान या आंदोलन के दौरान उसमें हिस्सा लेने वाले वॉलंटिअर्स को इसमें दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। इसका उद्देश्य खास वर्ग या टार्गेट ऑडियंस को जमीन पर काम करने के लिए गाइडेंस देना होता है।

    Toolkit
    Image By: Plan International

    सोशल जस्टिस या ह्यूमन राइट्स कैंपेनर करते हैं प्रयोग

    आमतौर पर टूलकिट (Toolkit) का प्रयोग सोशल जस्टिस और ह्यूमन राइट्स कैम्पेनर करते हैं। इसके जरिये वो प्रदर्शन का स्थल, प्रदर्शन को लेकर जागरुकता फैलाने और प्रदर्शनकारियों को एकत्रित करने और स्ट्रैटेजी बनाने के लिए करते हैं। जो लोग किसी मुद्दे के बारे में जानना चाहते हैं या उसका हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें टूलकिट से मदद दी जाती है।

    ये लोग भी करते हैं प्रयोग

    टूलकिट का प्रयोग जर्नलिस्ट, टीचर्स, एकेडमिक्स और बिजनेस हेड्स भी अपने टीम मेंबर्स के लिए करते हैं। इसके जरिये वे लोग टीम के सदस्यों को एकत्रित करने, प्लान बनाने और प्रोजेक्ट के तेजी से एक्जिक्यूशन के लिए करते हैं।

    Greta Thunberg
    Greta Thunberg, Image by: AP News

    बड़े प्रोटेस्ट को लेकर चर्चा में रह चुका है टूलकिट (Toolkit)

    टूलकिट साल 2011 में ऑक्यूपाइ वॉल स्ट्रीट, ब्लैक लाइव्ज मैटर 2020, हॉन्गकॉन्ग प्रोटेस्ट 2019 में काफी चर्चा में रहा था। इसके साथ ही देश में पिछले साल सीएए के खिलाफ प्रोटेस्ट में भी टूलकिट काफी चर्चा में रहा था।

    एंटी CAA प्रदर्शन में वाट्सऐप पर शेयर किया था टूलकिट (Toolkit)

    एंटी CAA के दौरान वाट्सऐप पर टूलकिट (Toolkit) को शेयर किया गया था। इसमें डिजिटल कैंपेन के लिए ट्विटर हैशटैग सुझाने के साथ ही धरनास्थल और प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने पर क्या करें, क्या ना करें आदि के बारे में जानकारी दी गई थी। टूलकिट में प्रदर्शनकारियों के लिए खाना, पानी और दवाई उपलब्ध कराने वाले इच्छुक लोगों के लिए भी गाइडेंस दी गई थी।

    Rihanna
    Rihanna, Image by: Billboard

    हॉन्गकॉन्ग प्रोटेस्ट में दी गई थी मास्क, हेलमेट पहने की सलाह

    हॉन्गकॉन्ग में साल 2019 में हुए प्रोटेस्ट के दौरान टूलकिट के जरिये ही प्रदर्शनकारियों को मास्क और हेलमेट पहनने की सलाह दी गई थी। इसका उद्देश्य था कि लोग अपनी पहचान छुपा सकें और हेलमेट की मदद से घायल होने से बच सकें। पिछले साल अमेरिका में ब्लैक लाइव्ज मैटर प्रदर्शन के दौरान एक एनजीओ ने आंदोलनकारियों के खिलाफ गलत जानकारी रोकने के लिए टूलकिट का प्रयोग किया था।

    Source: Navbharat Times

    राजनीतिक पार्टियां भी करती हैं टूलकिट (Toolkit) का इस्तेमाल

    राजनीतिक पार्टियां भी टूलकिट का प्रयोग करती हैं। जब भी किसी पार्टी को किसी मुद्दे पर या फिर चुनाव में जनता से समर्थन की जरूरत पड़ती है तो हैशटैग को प्रमोट किया जाता है. ताकि ट्रेंडिंग हैशटैग की ओर जनता का ध्यान जा सके।
    इसके लिए पार्टियां टूलकिट में पूरा प्रोसेस देती हैं की कब और क्या पोस्ट करना है और कैसे उसे ट्रेंड करना है। इस टूलकिट को पार्टियां स्टेप्स में अपने प्रतिनिधि, सांसद, विधायकों तक भेजती हैं और वहाँ से बूथ लेवल कार्यकर्ताओं तक सारे नियम और प्लान पहुंचा दिए जाते हैं।
    फिर प्लान के अनुसार ट्वीट/हैशटैग/फेक न्यूज़/ की सोशल पोस्ट की बाढ़ आती है और हैशटैग ट्रेंड होने लगते हैं।
    अभी एक – दो वर्ष पहले गलती से एक बड़ी पार्टी के नेता ने भी सोशल प्लान (टूलकिट) ट्विटर पर शेयर कर दी थी और बाद में उसे डिलीट किया गया था।

  • दिशा रवि की गिरफ्तारी कानून के अनुरूप की गई: दिल्ली पुलिस प्रमुख

    दिशा रवि की गिरफ्तारी कानून के अनुरूप की गई: दिल्ली पुलिस प्रमुख

    पीटीआई-भाषा संवाददाता
    नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) दिल्ली के पुलिस आयुक्त एस. एन. श्रीवास्तव ने मंगलवार को कहा कि जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी कानून के अनुरूप की गई है, जो ‘‘ 22 से 50 वर्ष की आयु के लोगों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता।’’

    श्रीवास्तव ने पत्रकारों से कहा कि यह गलत है जब लोग कहते हैं कि 22 वर्षीय कार्यकर्ता की गिरफ्तारी में चूक हुई।

    दिशा रवि को तीन कृषि कानूनों से संबंधित, किसानों के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में गत शनिवार को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया था।

    पुलिस ने दावा किया है कि उन्होंने ‘टेलीग्राम ऐप’ के जरिए जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग को यह ‘टूलकिट’ भेजी थी और इस पर कार्रवाई के लिए ‘‘उन्हे मनाया था।’’

    दिल्ली पुलिस के प्रमुख ने कहा, ‘‘ दिशा रवि की गिरफ्तारी कानून के अनुरूप की गई है, जो 22 से 50 वर्षीय की आयु के लोगों के बीच कोई भेदभाव नहीं करता।’’

    उन्होंने कहा कि दिशा रवि को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है और मामले की जांच जारी है।

    दिल्ली पुलिस ने सोमवार को आरोप लगाया था कि रवि और मुम्बई की वकील निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु ने ‘टूलकिट’ तैयार की और दूसरों के साथ इसे साझा करके भारत की छवि धूमिल करने की कोशिश की।

    पुलिस ने दावा किया है कि रवि के ‘टेलीग्राम’ अकाउंट से डेटा भी हटाया गया है।

    जैकब और शांतनु के खिलाफ भी गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है।

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • प्रधानमंत्री ने ‘भारत माता का एक टुकड़ा’ चीन को दिया: राहुल

    प्रधानमंत्री ने ‘भारत माता का एक टुकड़ा’ चीन को दिया: राहुल

    नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने चीन के साथ सीमा पर गतिरोध को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath singh) की ओर से संसद के दोनों सदनों में दिए गए वक्तव्य की पृष्ठभूमि में शुक्रवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘भारत माता का एक टुकड़ा’ चीन को दे दिया।

    उन्होंने यह आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री (Prime Minister) चीन के सामने झुक गए और उन्होंने सैनिकों की शहादत के साथ विश्वासघात किया है।

    कांग्रेस नेता ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘कल रक्षा मंत्री ने दोनों सदनों में बयान दिया। कई ऐसी चीजें हैं जिन्हें स्पष्ट करने की जरूरत है। पहली बात यह है कि इस गतिरोध के शुरुआत से ही भारत का यह रुख रहा है कि अप्रैल, 2020 से पहले की यथास्थिति बहाल होनी चाहिए, लेकिन रक्षा मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि हम फिंगर 4 से फिंगर 3 तक आ गए।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने भारतीय सीमा चीन को क्यों दी? इसका जवाब प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को देना है। देपसांग इलाके में चीन हमारी सीमा के अंदर आया है। इस बारे में रक्षा मंत्री ने एक शब्द नहीं बोला।’’

    राहुल गांधी ने दावा किया, ‘‘ सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पवित्र जमीन चीन को दे दी है….उन्होंने भारत माता एक टुकड़ा चीन को दे दिया है।’’

    गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को संसद के दोनों सदनों को बताया कि चीन के साथ पैंगोंग झील के उत्तर एवं दक्षिण किनारों पर सेनाओं के पीछे हटने का समझौता हो गया है और भारत ने इस बातचीत में कुछ भी खोया नहीं है।

    सिंह ने कहा कि पैंगोंग झील क्षेत्र में चीन के साथ सेनाओं के पीछे हटने का जो समझौता हुआ है, उसके अनुसार दोनों पक्ष अग्रिम तैनाती चरणबद्ध, समन्वय और सत्यापन के तरीके से हटाएंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि अब भी पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनाती तथा गश्ती के बारे में ‘‘कुछ लंबित मुद्दे’’ बचे हुए हैं जिन्हें आगे की बातचीत में रखा जाएगा।

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • म्यांमा में तख्तापलट करने वाले नेता ने लोगों से कहा : लोकतंत्र के लिए सेना से हाथ मिलाएं

    म्यांमा में तख्तापलट करने वाले नेता ने लोगों से कहा : लोकतंत्र के लिए सेना से हाथ मिलाएं

    यंगून, 12 फरवरी (एपी) म्यांमा (Myanmar) में तख्तापलट में शामिल एक नेता ने देश में ‘एकता दिवस’ के मौके पर शुक्रवार को लोगों से कहा कि अगर वे लोकतंत्र चाहते हैं तो उन्हें सेना के साथ मिलकर काम करना होगा। वहीं, देश के निर्वाचित नेताओं की रिहाई के लिए लोगों का प्रदर्शन भी जारी है।

    सीनियर जनरल मिन आंग लाइंग ने कहा, ‘‘मैं समूचे राष्ट्र से पूरी गंभीरता से अपील करता हूं कि लोकतंत्र को वास्तव में बहाल करने के लिए लोगों को सेना के साथ हाथ मिलाना चाहिए।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘अतीत की घटनाओं ने हमें सिखाया है कि सिर्फ राष्ट्रीय एकता ही देश को विघटन से रोकने और अखंडता एवं संप्रभुता बनाए रखने में कारगर है।’’

    सेना के कमांडर का यह संदेश शुक्रवार को ‘ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमा’ अखबार में प्रकाशित हुआ है। नए सैन्य शासन ने यह भी घोषणा की कि वह ‘एकता दिवस’ के मौके पर हजारों कैदियों को रिहा करेगी और अन्य कैदियों की सजा कम करेगी।

    मिन आंग लाइंग म्यांमा में एक फरवरी को हुए तख्तापलट में शामिल थे। सेना ने कहा कि उसे यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि सू ची की सरकार नवंबर में हुए चुनाव में धोखाधड़ी के आरोपों की उचित तरीके से जांच करने में नाकाम रही। हालांकि चुनाव आयोग ने कहा कि इन दावों की पुष्टि के लिए कोई सबूत नहीं हैं।

    एपी सुरभि शाहिद शाहिद 1202 1312 यंगून

    Image Credits: News Nation

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • ट्रम्प ने बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह के लिए आपातकालीन घोषणा जारी की

    ट्रम्प ने बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह के लिए आपातकालीन घोषणा जारी की

    वाशिंगटन, 12 जनवरी (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के 20 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह से पहले और उस दौरान हिंसा की आशंका को लेकर स्थानीय एवं संघीय अधिकारियों की बढ़ती चिंताओं के बीच देश की राजधानी के लिए एक आपातकालीन घोषणा जारी की।

    इस घोषणा के बाद गृह मंत्रालय और संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी को स्थानीय अधिकारियों के साथ आवश्यकतानुसार समन्वय करने की अनुमति मिल गई है।

    ट्रम्प ने यह घोषणा ऐसे समय में जारी की है, जब पांच दिन पहले ट्रम्प समर्थक भीड़ ने कैपिटल (अमेरिकी संसद भवन) पर हमला कर दिया था। यह हमला उस समय किया गया था, जब संसद ने ट्रम्प की हार को प्रमाणित करने के लिए औपचारिक रूप से इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों की गिनती शुरू की थी। उस हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी।

    इससे पहले कोलंबिया जिले के मेयर म्यूरियल बॉजर, वर्जीनिया के गवर्नर राल्फ नॉर्थम और मैरीलैंड के गवर्नर लैरी होगन ने लोगों से पिछले हफ्ते हुई हिंसा और कोविड​​-19 महामारी के कारण शपथ ग्रहण कार्यक्रम से दूर रहने का आग्रह किया।

    ट्रम्प की आपातकालीन घोषणा सोमवार से प्रभावी हो गई, जो 24 जनवरी तक लागू रहेगी।

    एपी कृष्ण सिम्मी सिम्मी 1201 1040 वाशिंगटन

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • कृषि कानूनों पर गतिरोध दूर करने के लिए किसान संगठनों के साथ केंद्र की वार्ता

    कृषि कानूनों पर गतिरोध दूर करने के लिए किसान संगठनों के साथ केंद्र की वार्ता

    कृषि कानूनों पर एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए प्रदर्शनकारी किसानों के संगठनों और तीन केंद्रीय मंत्रियों के बीच छठे दौर की वार्ता बुधवार दोपहर शुरू हुई।

    केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलवे, वाणिज्य और खाद्य मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश यहां विज्ञान भवन में 41 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर रहे हैं।

    कुछ दिनों के अंतराल के बाद दोनों पक्षों के बीच छठे दौर की वार्ता आरंभ हुई है। पिछली बैठक पांच दिसंबर को हुई थी।

    आंदोलन कर रहे किसान अपनी मांगों पर डटे हुए हैं कि केवल तीनों नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की प्रक्रिया और एमएसपी पर कानूनी गारंटी प्रदान करने समेत अन्य मुद्दों पर ही चर्चा होगी।

    केंद्र ने सितंबर में लागू तीनों नए कृषि कानूनों पर गतिरोध दूर करने के लिए ‘‘खुले मन’’ से ‘‘तार्किक समाधान’’ तक पहुंचने के लिए यूनियनों को 30 दिसंबर को वार्ता के लिए आमंत्रित किया था।

    ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने मंगलवार को अपने पत्र में कहा था कि एजेंडा में तीनों विवादित कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी देने के विषय को शामिल करना चाहिए।

    छठे दौर की वार्ता नौ दिसंबर को ही होने वाली थी लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और यूनियन के कुछ नेताओं के बीच बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकलने पर बैठक रद्द कर दी गयी थी।

    शाह से मुलाकात के बाद सरकार ने किसान संगठनों को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें नए कानून में सात-आठ संशोधन करने और एमएसपी पर लिखित आश्वासन देने की बात कही थी। सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने से इनकार कर दिया था।

    कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी की अलग-अलग सीमा पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन में ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के किसान हैं।

    सरकार ने कहा है कि इन कानूनों से कृषि क्षेत्र में सुधार होगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी लेकिन प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को आशंका है कि नए कानूनों से एमएसपी और मंडी की व्यवस्था ‘कमजोर’ होगी और किसान बड़े कारोबारी घरानों पर आश्रित हो जाएंगे।

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • दिल्ली सरकार मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal) के तहत अपने छात्रों को छह महीने तक सूखा राशन देगी : केजरीवाल

    दिल्ली सरकार मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal) के तहत अपने छात्रों को छह महीने तक सूखा राशन देगी : केजरीवाल

    दिल्ली के मुख्यमंत्री ( Delhi CM ) अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली सरकार मध्याह्न भोजन योजना (Mid Day Meal) के तहत अपने छात्रों को छह महीने तक सूखा राशन देगी।

    Covid-19 वैश्विक महामारी के कारण स्कूलों के मार्च से बंद होने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।

    मंडावली (Mandawali) इलाके के एक सरकारी स्कूल (Government School) में सूखा राशन बांटने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में केजरीवाल ने कहा, ‘‘ जब स्कूल बंद थे, तो हमने मध्याह्न भोजन योजना के लिए अभिभावकों को पैसे भेजने का फैसला किया था, लेकिन अब हमने छात्रों को छह महीने तक सूखा राशन देने का निर्णय किया है।’’

    देश में कोविड-19 के मद्देनजर मार्च से स्कूल बंद है। 15 अक्टूबर को कुछ राज्यों में आंशिक रूप से स्कूल खोले गए थे।

    दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने हालांकि कहा है कि कोरोना वायरस का टीका आने तक राष्ट्रीय राजधानी में स्कूल नहीं खुलेंगे।

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • Moon Village: कैसा होगा चांद पर बना इंसानी घरौंदा? तस्वीरों में दिखा आने वाला कल

    Moon Village: कैसा होगा चांद पर बना इंसानी घरौंदा? तस्वीरों में दिखा आने वाला कल

    Moon Village: चांद पर गांव बसाने के लिए यूरोपियन एजेंसी ने तैयारी शुरू कर दी है। ये घर कैसे होंगे, इसकी झलक ताजा तस्वीरों में दिखाई देती है।

    Moon Village

    किसी जमाने में चांद पर दुनिया बसाने के वादे किए जाते थे और आने वाले सालों में यह हकीकत हो सकती है। कम से कम यूरोपियन स्पेस एजेंसी के एक एक्सपर्ट का तो यही दावा है। हाल ही में Moon Village यानी चांद के गांव की तस्वीरें सामने आई हैं और माना जा रहा है कि आने वाले 10 साल में इसका काम शुरू हो सकता है। ESA अडवाइजर एडेन काउली का कहना है कि वहां बसे ढांचों के लिए चांद की मिट्टी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है जो उन्हें -190 डिग्री सेल्सियस के तापमान और रेडिएशन से बचाने के काम आ सकती है।

    कैसे दिखेंगे ये ‘घर’?

    Moon Village

    चार तले की सिलिंडर के आकार की इमारतों की तस्वीरों में निचले क्षेत्र को स्टडी एरिया और मंगल पर मिशन भेजने के लिए लॉन्चपैड के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। ESA के डायरेक्टर जनरल जैन वॉर्नर का कहना है कि उनका मकसद चांद पर स्थायी बेस बनाने का है जिसका इस्तेमाल दुनिया के दूसरे देश भी कर सकेंगे। काउली का कहना है कि अब सवाल यह नहीं है कि ‘क्या’ ऐसा हो पाएगा, बल्कि यह है कि ऐसा कब होगा।

    कैसे बनेंगे ये घर?

    Moon Village

    काउली ने कहा है, ‘ऐसा करना होगा क्योंकि अगर हम चांद, मंगल या उससे आगे किसी जगह को एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो हमें इस टेक्नॉलजी को मास्टर करना होगा।’ वह चांद की मिट्टी का इस्तेमाल एक मीटर चौड़ी दीवार बनाने के लिए करना चाहते हैं जिसके अंदर ऐस्ट्रोनॉट रहेंगे। चांद की यह मिट्टी रोबॉट इकट्ठा करेंगे और इसमें कांच जैसे पार्टिकल होते हैं। 3D प्रिंटर से इन्हें ईंटों में बदला जाएगा जिन्हें सूरज में सूखने के लिए रखा जाएगा।

    Moon Village

    NASA की टीम में शामिल राजाचारी

    वहीं, अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA साल 2024 तक एक महिला और एक पुरुष ऐस्ट्रोनॉट को चांद पर भेजने की तैयारी में है। इस Artemis मिशन के साथ चांद पर जाने वाले दूसरे मिशन्स के लिए एजेंसी ने 18 ऐस्ट्रोनॉट्स के नाम का ऐलान किया है। इनमें से एक भारतीय मूल के राजाचारी भी हैं जिनके पिता हैदराबाद से निकलकर अमेरिका में जाकर बस गए। इस टीम में दूसरे देशों के ऐस्ट्रोनॉट भी शामिल किए जाएंगे।

    Raja Chari

    साभार: नवभारत

  • संसद पर हुए कायराना हमले को हम कभी नहीं भूलेंगे : प्रधानमंत्री मोदी

    संसद पर हुए कायराना हमले को हम कभी नहीं भूलेंगे : प्रधानमंत्री मोदी

    नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों को रविवार को श्रद्धांजलि दी और कहा कि भारत अपनी संसद पर हुए कायराना हमले को कभी नहीं भूलेगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘हम हमारी संसद पर आज ही की तारीख में 2001 में हुए कायराना हमले को कभी नहीं भुलाएंगे। हम हमारी संसद की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाने वालों के बलिदान एवं बहादुरी को याद करते हैं। हम हमेशा उनके शुक्रगुजार रहेंगे।’’

    पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों के आतंकियों के हमले में आठ सुरक्षाकर्मियों समेत नौ लोगों ने जान गंवाई थी। सुरक्षा बलों ने सभी पांच आतंकवादियों को मार गिराया था। इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया था।

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.