Category: खबरें और राजनीति

  • हद है मूर्खता की! गए थे एटीएम चुराने, उठा लाये पासबुक प्रिंटिंग मशीन

    हद है मूर्खता की! गए थे एटीएम चुराने, उठा लाये पासबुक प्रिंटिंग मशीन

    आप क्या समझते हैं की बिना दिमाग लगाए भी आप चोरी करके पैसा कमा सकते हैं, भाई चोरी और धोखाधड़ी में भी दिमाग लगाना पड़ता है. अब इन्हीं लोगों को देख लो:

     

    गुवाहाटी की यह चोरी किसीको भी चौका देगी. यह चोर बेचारे एटीएम मशीन चुराने गए थे और उठा लाये पासबुक प्रिंटिंग मशीन और इतना ही नहीं इनकी किस्मत तो देखिये बेचारे पकड़े भी गए. और अब यह जेल में हैं.

     

    इनका कहना है की इनके एक साथी ने बताया की यह एटीएम मशीन है और यहाँ कोई सिक्योरिटी नहीं रहती जिसकी वजह इसे चुराना आसान रहेगा और फिर क्या था इन्होंने किसी तरीके से पूरी पासबुक प्रिंटिंग मशीन ही उखाड़ ली. लेकिन पैसे तो मिले नहीं और पुलिस ने धर लिया वो अलग से.

     

    इन चारों की पहचान साहब अली और सैफुल रहमान, मैनुल हक और सद्दाम हुसैन के रूप में हुई है।

     

    चोरों की यह हरकत अब सोशल मीडिया में वायरल हो रही है और ये सन्देश भी खूब दिया जा रहा है की “नक़ल के लिए भी अकल” की जरूरत होती है.

     

    Image Source: www.deshdunia.com

  • बेशकीमती बकरा, इसकी गर्दन पर लिखा है अल्लाह

    बेशकीमती बकरा, इसकी गर्दन पर लिखा है अल्लाह

    शायद आपको इस खबर को पढ़ के यकीन नहीं होगा पर यह कोई वहम या अफवाह नहीं है. इस बकरे के गर्दन के पास आप देखेगे तो उर्दू के शब्दो में मुहम्मद लिखा दिखाई पड़ेगा. इस करिश्माई बकरे का जन्म उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में बसे एक छोटे से गांव रखवारिया में हुआ है.

    इस बकरे को देखने के लिए आस पास व दूर दराज से लोग आ रहे हैं. इस बकरे को खरीदने के लिए भी बहुत सारे लोग यहां पहुँच रहे हैं और मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं.

    इस बकरे के मालिक का कहना है की हमारे घर में अल्लाह ने जन्म लिया है और वो इस बकरे को बेचना नहीं चाहते.

  • इस लडके के करतब देखोगे तो दंग रह जाओगे

    इस लडके के करतब देखोगे तो दंग रह जाओगे

    इस समय यूट्यूब पर इस वीडियो ने धूम मचा रखी है. जो भी इसे देखता है वो अपने दातो तले ऊँगली दबा लेता है.

     

    यकीन मानिये जब आप इसे देखेगे तो आप के भी रौंगटे खड़े हो जायेगे. James Kingston नाम का यह लड़का दुनिया की सबसे ऊचीं इमारतों से सेल्फ़ी लेता है और उसकी चोटी पर खड़ा होकर करतब करता है.

     

    देखिये इन विडियो में:

    https://www.youtube.com/watch?v=oE8uytQ0W10


    https://www.youtube.com/watch?v=UQ8jkZQxyjA

  • ये 20 अजूबे जानवर आपने कभी पहले नहीं देखे होंगे

    ये 20 अजूबे जानवर आपने कभी पहले नहीं देखे होंगे

    हम सब ने अपने जीवन में तरह – तरह के जानवर देखे होंगे, उनमे से कई सारे हमें अचंभित भी करते होंगे. लेकिन इस लेख को पढ़ने के बाद आपको लगेगा की इस दुनिया में बहुत कुछ ऐसा है जो आपने अभी तक देखा नहीं है. ये जानवर आपको चिड़ियाघर में देखने को नहीं मिलेंगे.

    Rare Animalsरेड कैप गोल्डफिश: रेड कैप ओरांडा गोल्डफिश के सर का ऊपरी हिस्सा लाल रंग का होता है. यह देखने में ऐसा लगता है जैसे मछली का दिमाग ही बाहर रख दिया गया हो. ये बहुत ही सुन्दर मछली लोगों के एक्वेरियम में  सजावटी मछली के रूप में दिखाई देती है. मूलतः यह मछली चीन की है लेकिन अब यह हर किसी की चाहत है.

    Rare Animals

    चलने वाली मेक्सिकन मछली: इसका ऑफिशियल नाम ऑक्सोटोल है और यह मेक्सिको में पाई जाती है. दरअसल यह मछली न होकर एक उभयचर प्राणी है जो पानी में रहता है और जमीन पर चलता है.

    Rare Animals

    फ्रिल्ड शार्क: फ्रिल्ड शार्क अटलांटिक और पैसिफिक महासागर के गहरे पानी में पायी जाती है. ये पानी की सतह पर बहुत ही काम दिखाई पड़ती हैं क्योंकि ये गहरे पानी में रहना पसंद करती हैं. एक मरती हुई फ्रिल्ड शार्क जापान में 2007 में दिखाई पड़ी थी. इस मछली को ‘लिविंग फॉसिल’ के नाम से भी जाना जाता है. दो से तीन मीटर लंबी इस मछली के मुंह में 300 धारदार दांत होते हैं.

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    क्रोकोडायल फिश: सफ़ेद खून वाली बर्फीली मछली, इसमें लाल रक्त कणिकाएं और हीमोग्लोबिन दोनों ही नहीं होते हैं. इनका शरीर अर्ध-पारदर्शी होता है. जिन्दा रहने के लिए इनका शरीर ऑक्सीजन को सीधे पानी से ही सोख लेता है

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    अम्बर फैंटम तितली: यह तितली ब्राज़ील, इक्वाडोर, पेरू और बोलिविया आदि जगहों में पाई जाती है.

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    पिस्टल झींगा: दुनिया का सबसे ज्यादा और तेज शोरगुल करने वाला प्राणी है यह पिस्टल झींगा. इसका झुण्ड समुद्र के अंदर इतना शोर करता है कि बाकी की सारी आवाजें दब जाती हैं, और यहां तक कि व्हेल कि आवाज तक इसके सामने धीमी पड जाती है. इसकी वजह से नेवी और मिलिट्री को भी समस्या आ जाती है क्योंकि इनकी आवाज की फ्रीक्वेंसी सोनार की फ्रीक्वेंसी के बराबर हो जाती है. इस वजह से दुश्मन पनडुब्बियां इनके झुण्ड के बीच छुप जाती हैं और सेना इन्हें नहीं देख पाती है.

     

    इनकी एक और खासियत है की ये अपने दुश्मन पर पानी के बलबूले से प्रहार करते है जिसकी गति एक कार की गति के बराबर होती है. जिसके टकराने पर एक बार में ही दुश्मन का काम तमाम हो जाता है और वो इनका भोजन बन जाता है. इसीलिए इसका नाम पिस्टल झींगा रखा गया है.

     

    देखें कैसे यह मछली अपने दुश्मन पर गोली की स्पीड से प्रहार करती है:  

    https://www.youtube.com/watch?v=eKPrGxB1Kzc

    Rare Animals

    लायंस मेन जैलीफिश: यह जेलीफिश दुनिया की सबसे बड़ी जेलीफिश है. ये आर्कटिक महासागर के पानी में डायनासोर से भी पहले से तैर रही हैं. ये दुनिया के सबसे पुराने जीवों में से एक हैं और करीब 65 करोड़ सालों से जिन्दा हैं. इनका सर करीब 8 फ़ीट व्यास के लगभग और सैकड़ों पूँछ होती हैं जो करीब 120 फ़ीट तक लंबी होती हैं. शायद आपको पता हो की जेलीफिश का 94% भाग पानी होता है.

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    नीले पैरों वाला बूबी: ये कैलिफोर्निया की खाड़ी और मध्य और दक्षिणी अमेरिका के समुद्र तट से पेरू तक पाए जाते हैं. इनके चमकीले नीले पैर मादा को आकर्षित करने का काम करते हैं. मादा को आकर्षित करने के लिए अपने पैरों को दिखाकर नाचते हैं.

    Rare Animals

    कार्डिनल गैंण्डरोमोर्फ: यह पक्षी अपने आप में अनोखा है, इसमें नर और मादा दोनों के ही गुण पाए जाते हैं. अलग – अलग लिंग की वजह से यह पक्षी दो रंगों का होता है.

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    अमेज़न का दूधिया मेंढक: 2.5 से 4 इंच लंबा यह मेंढक दक्षिणी अमेरिका के अमेज़न के बरसाती जंगलों में पाया जाता है. ये जंगल में पानी के पास नमी वाले स्थानों में पाए जाते हैं. ये क्रोधित होने पर दूधिया रंग का द्रव निकालते हैं इसीलिए इन्हें दूधिया मेंढक कहा जाता है.

    देखें विडियो: 

    Rare Animals

    कांच का मेंढक: मध्य और दक्षिणी अमेरिका में पाए जाने वाले इन मेंढकों पेट की खाल पूरी तरह पारदर्शी होती है जिससे इनके शरीर के अंदर के सारे अंग दिखाई देते हैं. इनके बाकी के शरीर का रंग हरापन लिए हुए होता है जिससे ये हरी पत्तियों के बीच में आसानी से छुप जाते हैं.

    देखें विडियो: 

    Rare Animals

    प्रोमकोटेथीज़ सल्कस: यह एक अजूबा प्राणी है, इसके दांत बिलकुल इंसानों के दाँतों की तरह होते हैं. यह जीव आज तक सिर्फ एक बार देखा और पकड़ा गया है. इसे दक्षिणी अटलांटिक महासागर में समुद्र तल से २००० मीटर की गहराई में सन २००७ में देखा गया था.

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    येती केकड़ा: है तो केकड़ा ही पर देखने में इसके येती जैसे बाल होते हैं. पहली बार यह 2005 में दक्षिणी प्रशांत महासागर में करीर 2200 मीटर की गहराई में खोजा गया था. ये करीब 15 सेंटीमीटर की लंबाई तक बढ़ते हैं.

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    अलार्म जैलीफिश: इसका नाम इसकी खूबियों को देखते हुए ही रखा गया है. वो खूबी है इनकी प्रतिरक्षा प्रणाली, जब कोई दुश्मन इन पर हमला करता है, तो यह चमकीली रौशनी छोड़ती हैं जिससे इनका दुश्मन भ्रमित हो जाता है और तब तक ये जेलीफिश रफूचक्कर हो जाती है.

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    नेम्ब्रोथा क्रिस्ताता घोंघा: यह करीब 5 सेंटीमीटर लंबा काले और हरे रंग का होता है. यह देखने में तो सुन्दर होता है लेकिन बड़ा ही दर्द भरा डंक मारता है. ये इसी डंस से अपने दुश्मन जेलीफिश का शिकार करता है.

    Rare Animals

    बिना कवच का समुद्री कछुआ: 900 किलो के वजन वाला यह कछुआ दुनिया का सबसे बड़ा कछुआ होता है. लेकिन इसकी पीठ पर कवच की जगह पर मोटी खाल होती है जिसके नीचे छोटी – छोटी हड्डिया होती हैं. इस खाल की वजह से इसकी पीठ लचकीली होती है और ये बहुत गहराई तक पानी में जा सकता है.

    Rare Animals

    गुलाबी डॉल्फिन पिंकी: इसका नाम पिंकी इसके गुलाबी रंग की वजह से ही पड़ा है. इसे 2007 में लुइसियाना में पहली बार देखा गया था.

    Rare Animals

    हर्मिट केकड़ा:  

    Rare Animals

    बैगनी मेंढक: ये मेंढक भारत में केरल के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं.

    Rare Animals

    पत्ते जैसी छिपकली: इसे अंग्रेजी में “सैटेनिक लीफ टेल्ड गेसीको” कहते हैं. ये बिलकुल सूखे पत्ते जैसे रंग की होती है जिसकी वजह से ये अपने दुश्मनों को चकमा देती है. इसकी पूँछ सहित लंबाई 2.5 से 6 इंच तक होती है. ये मेडागास्कर द्वीप पर पायी जाती हैं.

    फोटो साभार: http://www.talesmaze.com/32-stunning-photos-of-animal-you-probably-never-seen-before/

  • राधा कृष्ण की धरती के बारे में कुछ अनजानी बातें – गोवर्धन परिक्रमा

    राधा कृष्ण की धरती के बारे में कुछ अनजानी बातें – गोवर्धन परिक्रमा

    गोवर्धन पर्वत का हिन्दू धर्म में बहुत ही अधिक महत्त्व है. इसकी परिक्रमा करने से सभी मुरादें पूरी हो जाती हैं. 21 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा (Govardhan Parikrama) को लोग नंगे पाँव पूरा करते हैं तो कुछ लोग लोट – लोट कर इसकी परिक्रमा लगाते हैं. यहां परिक्रमा लगाने का कोई नियत समय नहीं है. लोग साल के 365 दिन यहां परिक्रमा लगाते हैं लेकिन हर महीने की पूर्णमासी को यहाँ बेशुमार भीड़ होती है.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    कहा जाता है की गोवर्धन पर्वत (Govardhan Parvat) तिल तिल करके घट रहा है. पांच हजार साल पहले यह पर्वत 30 हजार मीटर ऊंचा हुआ करता था लेकिन अब इसकी ऊँचाई केवल 30 मीटर ही रह गयी है.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    यहां आने वाले लोग गिरिराज जी (Giriraj Ji) के मंदिर में साक्षी गोपाल जी के दर्शन करके अपनी यात्रा शुरू करते हैं.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Jai Gurudev Temple Mathura

    श्रीराधा-गोविंद मंदिर (Shri Radha Govind Mandir): इस मंदिर का निर्माण श्रीकृष्ण जी के पोते ने करवाया था. यहीं पर गोविन्द कुंड भी है.

    चूतड़ टेका (Chutar Teka):

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    परिक्रमा मार्ग पर अनेकों कुंड हैं जहां पर श्री कृष्ण (Shri Krishna) ने लीलाएं की थी. राधा कुंड (Radha Kund), श्याम कुंड (Shyam Kund), मानसी गंगा (Mansi Ganga) और कुसुम सरोवर (Kusum Sarovar) आदि मुख्य कुंड हैं.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    राधा कुंड: इस कुंड को राधारानी ने अपने कंगन से खोदकर बनाया था. इस कुंड में स्नान करने से गौहत्या का पाप धुल जाता है.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    श्याम कुंड: कहा जाता है श्रीकृष्ण ने गौहत्या का पाप दोने के लिए अपनी छड़ी से यह कुंड बनाया था.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    श्रीकृष्ण पर गौहत्या का पाप: श्रीकृष्ण को मारने के लिए कंस ने अरिष्ठासुर नाम के एक असुर को भेजा था. उस समय बाल कृष्ण गाय चराने गए हुए थे तो उस असुर ने बैल का रूप धरके गायों के झुण्ड में शामिल हो गया. लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे पहचान लिया और उसका वध कर दिया. लेकिन वह असुर चूँकि बैल के रूप में था तो श्रीकृष्ण पर गौहत्या का पाप लगा. इसके बाद श्रीकृष्ण राधारानी से मिले और उनको छू लिया. तो राधारानी भी इस पाप की भागिदार हो गयीं.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    इस गौहत्या के पाप को दूर करने के लिए राधारानी ने अपने कड़े से राधा कुंड और श्रीकृष्ण ने अपनी छड़ी से श्याम कुंड का निर्माण किया. कहा जाता है इन दोनों कुंड में स्नान करने से सभी तीर्थों का पुण्य मिलता है, क्योंकि इन दोनों कुंड में सभी तीर्थ विराजमान हैं.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    मानसी गंगा: पहले इसका विस्तार 6 किलोमीटर में था पर अब यह सिमटकर थोड़ी सी रह गयी है. कहा जाता है गोवर्धन के अभिषेक के लिए इतने गंगाजल को लाने की समस्या के चलते श्रीकृष्ण ने गंगा को ही गोवर्धन पर्वत पर उतार लिया था. इसलिए इसका नाम मानसी गंगा पड़ा.

    Govardhan Mathura Parikrama
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    गोवर्धन पर्वत का निर्माण: क्या आपको पता है की गोवर्धन पर्वत का निर्माण कैसे हुआ? अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं.

    Govardhan Mathura Parikrama
    Govardhan Mathura Parikrama

    यह कहानी श्री राम (Shri Ram) के समय की है. जब श्री राम सीता माँ को खोजते हुए समुद्र के किनारे पहुंचे तो वहाँ पर पल बनाने के लिए पत्थरों की जरूरत पड़ी. अतः हनुमान जी द्रोणगिरि पर्वत के पास गए. लेकिन द्रोणगिरि ने अपने वृद्धावस्था के बारे में बताया और अपने पुत्र गिरिराजजी या गोवर्धन पर्वत और रत्नागिरी पर्वत को साथ ले जाने के लिए कहा. हनुमान जी गिरिराज पर्वत को समुद्र के किनारे ले जाने के लिए निकल पड़े लेकिन रास्ते में उन्हें सूचना मिली की निर्माण कार्य पूरा हो गया है और अब पत्थरों की आवश्यकता नहीं है तो श्री हनुमान जी ने गिरिराज जी को गोवर्धन में स्थापित कर दिया.

    Govardhan Mathura Parikrama
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    लेकिन तब गिरिराजजी ने हनुमान से अपनी भगवान् श्रीराम से मिलने की इच्छा के बारे में बताया तो हनुमान जी ने कहा की द्वापर युग में भगवान् श्रीकृष्ण के रूप में आकर उनसे मिलेंगे.

    Govardhan Mathura Parikrama
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    चूतड़ टेका (Chutad Teka): गिरिराजजी को गोवर्धन में स्थापित करने के बाद हनुमान जी ने यहीं पर आराम किया था तो इस स्थान का नाम चूतड़ टेका पड गया. लेकिन एक और कथा के अनुसार जब श्रीकृष्ण ने इंद्र के क्रोध को गोवर्धन पर्वत उठाकर शांत किया था तो इसके बाद वो चूतड़ टेका पर ही बैठे थे.

    Govardhan Mathura Parikrama
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    Govardhan Mathura Parikrama
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    Govardhan Mathura Parikrama

    गूगल मैप में देखें:

  • पदक के ख्वाब मत देखो, हमें पदक नहीं चाहिए – हमें रोजी-रोटी में उलझाये रखो

    पदक के ख्वाब मत देखो, हमें पदक नहीं चाहिए – हमें रोजी-रोटी में उलझाये रखो

    दो खुशखबरी:

    पहले साक्षी ने कांस्य जीत फिर सिंधु ने रजत, इसके बाद हुई इनामों की बौछार, कितना? ये सोच कर अचम्भा होता है, कोई 5 करोड़ दे रहा है तो कोई 2 करोड़, कोई BMW दे रहा है तो कोई 1000 गज का प्लाट, और साथ में सरकारी नौकरी.

    खैर ये अच्छी बात है जिसने देश का नाम रोशन किया हो उन्हें इनाम तो मिलना ही चाहिए.

    दो बुरी खबरें:

    ओपी जायशा – रियो ओलम्पिक में 42.195 किलोमीटर की मैराथन में कोई पानी देने वाला तक नहीं, 2 घंटे 47.19 सेकंड में रेस ख़त्म करने के बाद बेहोश होकर गिरी. 7 बोतल ग्लूकोज चढाने के बाद होश आया.

    क्या ऐसे ही पदक उम्मीद करेगा भारत?

    Olympic Medals in India

    फोटो साभार: http://www.dnaindia.com/

    पूजा कुमारी – पटियाला में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी पूजा कुमारी ने गरीबी से तंग आकर ख़ुदकुशी कर ली. और अब इस खबर पर लीपापोती होगी, कुछ पैसे दिए जाएंगे और मामला ख़तम. सब कुछ पुराने ढर्रे पर. लेकिन राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी को सरकारी मदद तो छोड़िये पढ़ने के लिए होस्टल तक नहीं मिला, प्राइवेट कमरा लेने में असमर्थ वो रोज किराया खर्च कर कॉलेज भी नहीं आ सकती थी. क्या सोचकर उसने फांसी लगाई होगी?

    अब जरा गौर फरमाइए यही रकम अगर खिलाड़ियों को तैयार करने में लगाईं जाती तो शायद नजारा कुछ और होता. खर्च मिल जाता तो पूजा शायद राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन जाती और शायद इस १३० करोड़ की आबादी वाले देश में हजारों ओलम्पिक खिलाड़ी ऐसे मिल जाते जो पक्का पदकों के अम्बार लगा देते.

    जरा नजर डालते हैं कौन सा देश अपने खिलाड़ियों पर कितना खर्च करते हैं:

    अमेरिका: खर्च (एक खिलाड़ी पर): 74 करोड़, पदक जीतने पर इनाम: 16 लाख

    ब्रिटेन: खर्च (एक खिलाड़ी पर): 48 करोड़, पदक जीतने पर इनाम: कुछ नहीं

    चीन: खर्च (एक खिलाड़ी पर): 47 करोड़, पदक जीतने पर इनाम: 24 लाख

    भारत: खर्च (सभी 118 खिलाड़ियों पर): 160 करोड़, पदक जीतने पर इनाम: 75 लाख – स्वर्ण पर, 50 लाख – रजत पर, 30 लाख – कांस्य पर

    इसके अलावा प्रदेश सरकारें, स्वयंसेवी संगठन और अमीर माननीय अपने स्टार से करोड़ों रुपये पदक जीतने के बाद देते हैं.

    सच्चाई: भारत में बहुत सारे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी गरीबी में जी रहे हैं.

    आशा रॉय – एक समय का खाना भी नसीब नहीं.

    सीता साहू – गोलगप्पे बेंच रही है.

    Olympic Medals in India

    फोटो साभार: http://indiatoday.intoday.in/

    शांति देवी – सब्जियां बेंच रही है.

    Olympic Medals in India

    फोटो साभार: http://indiatoday.intoday.in/

    शांति – मैडल जीतने के बाद लिंग परीक्षण में फेल – एक नौकरी तक नहीं.

    निशा रानी दत्त – घर चलाने के बोझ की वजह से तीरंदाजी छोड़ी.

    Olympic Medals in India

    फोटो साभार: http://indiatoday.intoday.in/

    नौरी मुंडू – कई राष्ट्रीय मैडल जीतने वाली आज घर चलाने के लिए बच्चों को पढ़ा रही है.

    Olympic Medals in India

    फोटो साभार: http://indiatoday.intoday.in/

    रश्मिता पात्रा – फुटबॉल अंडर-16 में मैडल जीतने वाली गरीबी की वजह से छोटी सी सुपारी की दूकान चला रही है.

    माखन सिंह – मिल्खा सिंह को हारने वाले माखन सिंह पैर टूटने के बाद गरीबी में मर गए.

    खासबा दादासाहेब जाधव – 1952 के ओलम्पिक में कोई खर्च नहीं मिला. अपना घर-बार बेंच कर ओलम्पिक में गए और कांस्य जीता.

    सरवन सिंह – 1954 के एसियान गेम्स में स्वर्ण जीतने वाले, टैक्सी चलाते रहे और अपना स्वर्ण पदक पैसों की कमी की वजह से बेंच.

    मुरलीकांत पेटकर – पैरालिम्पिक्स 1972 में स्वर्ण जीता. लेकिन भारत में 1984 के बाद से रिकार्ड करना शुरू किया गया था इसलिए पेटकर का पदक सरकार के रिकार्ड में नहीं है.

    देवेंद्र झाझरिया (विकलांग-एक हाथ नहीं) – पेटकर के बाद दूसरा भारतीय जिसने पैरालिम्पिक्स 2004 में स्वर्ण जीता, पद्म श्री से सम्मानित, लेकिन शायद ही कोई इन्हें जानता हो.

    Olympic Medals in India

    फोटो साभार: http://www.news18.com

    शंकर लक्ष्मण – 2 ओलम्पिक स्वर्ण विजेता भुखमरी में मर गए.

    बुधिया सिंह – उम्र 4 साल में 65 किलोमीटर की दूरी 7 घंटे में नापने वाले बुधिया सिंह दौड़ छोड़कर आज पढ़ाई कर रहे हैं.

    Olympic Medals in India

    फोटो साभार: http://www.newsnation.in

    ये लिस्ट बहुत लंबी है. लेकिन इसमें दोष किसका.

    इस देश में खिलाड़ी अपने दम पर तैयार होते है. फटे जूते, टूटा धनुष लेकर तैयारी करते खिलाड़ियों को भी रोना आता होगा.

    बस इस देश के लोगों को मैडल चाहिए, अगर न भी मिले तो कोई बात नहीं.
    सड़क के किनारे खेल दिखाने वाले, ट्रेन में जिम्नास्ट की कलाकारी करते छोटे छोटे बच्चे, सोचने पर मजबूर कर देते हैं, क्या 130 करोड़ के भारत में प्रतिभाओं की कमी है…

  • दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारत, इसे नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा: नासिर अल मुल्क मस्जिद

    दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारत, इसे नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा: नासिर अल मुल्क मस्जिद

    आपने आज तक बहुत सारी खूबसूरत इमारतें देखी होंगी, शिल्पकला से परिपूर्ण मंदिर, गुप्त काल की गुफाओं में की गयी नक्काशी या फिर सुन्दर चित्रकारी, लेकिन आपने शायद ही ऐसी कारीगरी देखी होगी. यहां की कारीगरी देखकर आप भी इसके मुरीद हो जाएंगे.

    Beautiful buildings

    दुनिया की बहुत सारी इमारतें बेहतरीन कारीगरी, चित्रकारी और वास्तुशिल्प के लिए के लिए मशहूर हैं. इनमे से ऐसी ही एक इमारत ‘नासिर अल-मुल्क’ मस्जिद है जो बाहर से एक साधारण मस्जिद की तरह ही दिखाई देती है, लेकिन जब उगते सूरज की किरणें इस मस्जिद पर पड़ती हैं तो इसकी खूबसूरती में चार चाँद लग जाते हैं . इसकी खूबसूरती को देखने के लिए दुनिया भर के पर्यटक खिंचे चले आते हैं.

    Beautiful buildings

    इसकी खूबसूरती के नज़ारे को शब्दों में बयां करना मुमकिन ही नहीं है, मस्जिद की भव्यता और खूबसूरती को केवल देख कर ही महसूस किया जा सकता है। यहां पर आकर आपको ऐसा लगेगा जैसे आप किसी और दुनिया (स्वर्ग) में  ही आ गए हों.

    Beautiful buildings

    इस मस्जिद के सामने वाले हिस्से में रंगीन काचों की जड़ाई का काम हुआ है, इसलिए जब उगते हुए सूर्य की किरणें इन काचो से छनकर अंदर मस्जिद के फर्श पर बिछे पर्शियन कालीन पर पड़ती है तो मस्जिद के अंदर रंगों का सागर उमड़ आता है. लेकिन यह नजारा केवल सुबह के समय ही रहता है जब रौशनी मस्जिद के सामने से आती है.

    Beautiful buildings

    इस मस्जिद को ‘गुलाबी मस्जिद’ भी कहा जाता है क्योंकि इस मस्जिद की दीवारों, गुम्बदों, और छतों पर रंगीन चित्रकारी में गुलाबी रंग का कुछ ज्यादा ही उपयोग किया गया है, और यही गुलाबी रंग इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देता है.

    Beautiful buildings

    नासिर अल मुल्क मस्जिद ईरान के शिराज प्रांत में है। इस मस्जिद का निर्माण ईरान के शासक ‘मिर्जा हसन अली नासिर अल मुल्क’ ने किया था। मिर्जा यहां के कजर वंश के राजा थे। यह मस्जिद सन् 1876 से 1888 के बीच में बनी थी। मस्जिद का डिज़ाइन मोहम्मद हसन-ए-मिमार और मोहम्मद रज़ा काशी ने बनाया था।

    Beautiful buildings

    गूगल मैप में देखें:

    फोटो साभार: http://www.amazingplaces.com/news/when-sunlight-hits-this-mosque-it-is-just-breathtaking.html, www.thegoldenscope.com

  • इस पेड़ के नीचे खड़े होने से आपकी मौत भी हो सकती है, जाने क्या है इस पेड़ की खासियत

    इस पेड़ के नीचे खड़े होने से आपकी मौत भी हो सकती है, जाने क्या है इस पेड़ की खासियत

    प्रकृति के खेल निराले हैं, हरे भरे पेड़ जितने सुन्दर दिखते हैं वहीँ मंचीनील (Hippomane mancinella) नाम का पेड़ इतना खतरनाक है की आप की जान भी जा सकती है. इस पेड़ के फल खाने से आप गम्भीर रूप से बीमार हो सकते हैं और इस पेड़ से निकले तरल रस जो तेज़ाब जितना खतरनाक है, आप गम्भीर रूप से घायल हो सकते हैं.

     

    यही नहीं अगर आप इस पेड़ के नीचे ज्यादा देर तक खड़े रहें तो आप की जान भी जा सकती है.

    पुराने जमाने में आदिवासी लोग इस पेड़ के जहर का उपयोग तीर/बाण में करते थे.

    ये पेड़ करीब 15 मीटर तक लम्बा होता है और पत्तियों से देखने में सेब के पेड़ की तरह लगता है. इससे निकलने वाला दूधिया रस इतना खतरनाक है की बारिस में इसके नीचे खड़े होने पर भी ये आपको नुकसान पहुंचा सकता है. ये इतना खतरनाक है की अगर इसके नीचे कोई कार भी खड़ी हो तो उसका पेंट भी धुल जाता है. इस पेड़ की लकड़ी जलना भी उतना ही खतरनाक है, क्यूंकि इस पेड़ को जलाने पर निकलने वाले धुएं में बहुत साड़ी जहरीली गैसें होती हैं.

    इस पेड़ पर लगने वाले फल वैसे तो देखने में बहुत ही सुन्दर लगते हैं पर होते उससे भी ज्यादा हानिकारक. इसके फल को खाने से आपको पेट की कई बीमारियां हो सकती हैं. फल खाने में तो मीठा होता है पर इससे पेट के अंदर खून भी आ सकता है.

     

    इतना खतरनाक होने के बावजूद इस पेड़ से कई उपयोगी चीजें बनती है. इसकी लकड़ी, गोंद और फलों से जहरीले तत्वों को निकालकर कई दवाएं भी बनाई जाती हैं.

  • मेरा नाम ही “माया” है, मेरे पास “माया” की कमी कैसे हो सकती है: माया बनाम मौर्या विवाद

    मेरा नाम ही “माया” है, मेरे पास “माया” की कमी कैसे हो सकती है: माया बनाम मौर्या विवाद

    “दलित नहीं दौलत की बेटी” पर मचे बवाल के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा का दामन छोड़ दिया है लईकिन इसके बाद भी अभी घमासान जारी है. आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो चूका है. मौर्या ने मायावती पर पैसे के बदले टिकट बेचने के आरोप लगाए है.

     

    वहीँ मायावती ने कहा है की मौर्या अपने बेटे बेटियों के लिए टिकट चाहते थे और बसपा में परिवारवाद की कोई जगह नहीं है. मौर्या पहले से दलबदलू रहे हैं और मुलायम सिंह के साथी हैं. अगर उन्हें अपने बेटे बेटियों के लिए टिकट चाहिए तो सपा से अच्छी कोई जगह नहीं हो सकती है क्यूंकि वहां सिर्फ परिवारवाद ही चलता है.

     

    दौलत की बेटी के जवाब में उन्होंने कहा की उनके पास माया की कोई कमी हो भी कैसे सकती है क्यूंकि उनके माँबाप ने उनका नाम ही “माया” रखा है. उन्होंने कहा की बसपा के कार्यकर्ताओं ने कभी भी धन की कमी नहीं होने दी है. हमारे समर्थित कार्यकर्ता अपनी हैसियत के हिसाब से पार्टी को चंदा देते हैं.

     

    देखते हैं मौर्या किस पार्टी में घर बनाते हैं, क्यूंकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पहले से ही एक मौर्या है, इसलिए ज्यादा सम्भावना सपा की तरफ मुड़ने की है.

  • एक दूकान जिस पर ग्राहकों की भीड़ लगी है फिर भी दूकान घाटे में, क्या ये संभव है?

    एक दूकान जिस पर ग्राहकों की भीड़ लगी है फिर भी दूकान घाटे में, क्या ये संभव है?

    सीधे शब्दों में , क्या वो दूकान घाटे में जा सकती है जिस पर ग्राहकों की भारी भीड़ लगी है. लोग सामान ख़रीदने के लिए लाइन में लगे  हैं. जिन्हें सामान नहीं मिल रहा है वो अगले दिन आ रहे हैं लेकिन सामान उपलब्ध नहीं है.

     

    लोग दीवाली का सामान लेने के होली से लाइन में लगे हैं. मुझे लगता है कि दुकानदार तो भारी मुनाफे में होना चाहिए, जिसकी दूकान इतनी चल रही है वो घाटे में हो भी कैसे हो सकता है. मेरा दैनिक अनुभव तो यही कहता है.

     

    उस पर अगर सामान वापस करना है 70% कटौती के बाद अगर 30% ग्राहक को वापस मिले तो फिर तो दुकानदार कि तो बल्ले बल्ले ही हो जायेगी. सामान भी नहीं बिका और 70% कीमत का फायदा. फिर वही सामान दूसरे ग्राहक को तो बेचना ही है क्यूंकि इतनी लम्बी लाइन जो लगी है.

    A Shop with Huge Customers but in Loss, Like Indian Railway

    ऐसा अगर वास्तव में देखना हो तो रेलवे से अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता है. सभी गाड़ियों में वेटिंग कि लम्बी कतार, अगर टिकट कन्फर्म हो गया है और इसके बाद अगर वापस किया तो 70% कटौती के बाद 30% वापसी, तत्काल में भी वेटिंग, और तत्काल रिजर्वेशन में तो टिकट कैंसिल कराने पर कोई वापसी भी नहीं है.

     

    रेलवे कि वेबसाइट से अगर टिकट करा रहे हैं तो सर्विस चार्ज, + बैंक का भी सर्विस चार्ज, दोनों की बल्ले बल्ले. रेलवे की वेबसाइट पर दुनिया भर का विज्ञापन, हवाई जहाज से लेकर होटल तक की बुकिंग उपलब्ध है. फिर भी रेलवे घाटे में.

     

    जनरल डिब्बों की बात करें तो उनमे सीटों की संख्या से 10 गुने लोग भूसे की तरह भरकर यात्रा करते हैं. फिर भी रेलवे घाटे में.

     

    समझ नहीं आता पैसा जा कहाँ रहा है.

     

    रेलवे रेल नीर बेचती है, लेकिन स्टेशनों पे विदेशी कंपनियों का ही पानी बिकता दिखेगा. एक लीटर पानी 20 रुपये में, चाहे वो रेल नीर हो, किनले, बिसलरी या फिर एक्वाफिना. रेल नीर भी उतना ही मार्जिन कमाता है जितना दूसरी विदेशी कम्पनियाँ. पूरे स्टेशन पर पानी ठंडा करने वाली एकाध मशीन होती है वो भी ठंडी पड़ी होती है. मजबूरन यात्रियों को पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है. हो सकता है बड़ी रिश्वत का खेल हो. एक ठीक ठाक स्टेशन पर एक दिन में हजार दो हजार पानी की बोतलें बिकना तो आम बात है. रिश्वत खिलाओ, ठंडा पानी होगा नहीं तो बोतलें ही बिकेगी.

     

    अब रेलवे के बारे में इतना लिखा है तो बुलेट ट्रेन की बात ना करूँ ये कैसे हो सकता है.

     

    बुलेट ट्रेन जब भी चलेगी तो वो हमारे देश की शान होगी. सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि सारा देश चाहता है की भारत हर क्षेत्र में आगे बढे और विकसित देशों को टक्कर दे. लेकिन उससे पहले हमें सिर्फ अमीरों और बिजनेसमैनों के बारे में सोचना बंद करके हर आम आदमी, किसान छोटी नौकरी करने वाले और दलितों, मजदूरों के बारे में भी सोचना शुरू करना पड़ेगा.

     

    अब मुद्दा ये है की जब बुलेट ट्रेन चलेगी तो किसे फायदा होगा? जाहिर सी बात है, बिजनेसमैन, नेताओं और, और किसी को नहीं.और सब तो 2-4 घंटे से लेकर 10-12 घंटे देरी से चलने वाली ट्रेनों में ही यात्रा करेंगे.

     

    अरे भाई, पहले इन ट्रेनों की दशा सुधार दो फिर बुलेट ट्रेन चला लेना. हम तो AC का भी ख्वाब नहीं देखते, शताब्दी, राजधानी तो दूर की बात है. उस पर बुलेट ट्रेन, बस जले पे नमक छिड़क लो. इस देश की 90% से ज्यादा आबादी जनरल डिब्बों और पैसेंजर ट्रेन में यात्रा करती है उनके लिए कोई सुविधाओं में सुधार नहीं, बस देश की 1-2% आबादी के सुविधाएं ही सुविधाएं.

     

    चलिए वो सब छोडिए, ये सोचिये की गड़बड़ कहाँ है…
    Image Source: www.thehindu.com, https://vak1969.com