Category: खबरें और राजनीति

  • रेप के दोषी राम रहीम – अंधभक्तों का धार्मिक उन्माद, हिंसा और मौतें, सरकारी सम्पत्तियों का नुकसान

    रेप के दोषी राम रहीम – अंधभक्तों का धार्मिक उन्माद, हिंसा और मौतें, सरकारी सम्पत्तियों का नुकसान

    पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के डेरा चीफ राम रहीम को रेप का दोषी करार देने के बाद उनके समर्थक हिंसा पर उतर आए हैं। पंचकूला हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है और 250 लोग घायल हुए हैं। पंचकूला में हुई हिंसा में 100 से ज्यादा गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया है। अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद समर्थकों ने मीडियाकर्मियों पर भी हमले किए हैं। इस बीच राम रहीम के फैसले के बाद दिल्ली और उत्तर प्रदेश सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया गया है।

    खबरों के मुताबिक, कोर्ट परिसर के बाद डेरा अनुयायियों ने टाइम्स नाउ समेत 3 न्यूज चैनलों की ओबी वैन तोड़ दी है। कुछ ओबी वैन में आग लगा दी गई है। फायर ब्रिगेड और पुलिस की गाड़ियों में आगजनी की गई है। पंजाब के दो रेलवे स्टेशनों में आग लगाने की खबरें आ रही हैं। इसके अलावा, शिमला हाइवे पर भी कारों को रोककर तोड़फोड़ की गई है। पंजाब और हरियाणा में कई जगहों से हिंसा की खबरें आ रही हैं। सरकारी भवनों में हिंसक प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी है।

    Rape Case on Ram Rahim, Violence, Injured and Deaths

    Read: http://navbharattimes.indiatimes.com/state/punjab-and-haryana/chandigarh/ram-rahim-verdict-many-people-killed-injured-shifted-to-a-hospital-in-sector-6-of-haryana/articleshow/60222258.cms

    पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को रेप का दोषी करार दिए जाने के बाद हुई हिंसा में सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हिंसा में हुई नुकसान की भरपाई डेरा की संपत्तियों को जब्त कर किया जाए।

    साध्वी से रेप के मामले में गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद उनके समर्थक जगह-जगह हिंसा और आगजनी कर रहे हैं। पंचकूला की सीबीआई अदालक के फैसले के बाद से ही हरियाणा समेत पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और यूपी में उग्र डेरा समर्थक जगह-जगह हिंसा कर रहे हैं। तनाव के मद्देनजर दिल्ली के 11 जिलों में 8 सितंबर तक धारा 144 लगा दी गई है। गाजियाबाद में डीएम ने शनिवार को सभी स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। इसके अलावा मेरठ, हापुड़ और बागपत में सीबीएसई के सभी स्कूल शनिवार को बंद रहेंगे। नोएडा में भी सभी प्राइवेट स्कूल शनिवार को बंद रहेंगे।

    पंचकूला में उग्र डेरा समर्थकों ने कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। तनाव के मद्देनजर हरियाणा के पंचकूला, सिरसा और कैथल में कर्फ्यू लगा दिया गया है। पंजाब में भी कुछ जगहों पर कर्फ्यू लगाया गया है। नोएडा (गौतमबुद्ध नगर), गाजियाबाद समेत पश्चिमी यूपी के 5 जिलों में एहतियातन धारा 144 लगाई गई है।

    Read: http://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/crime/section-144-imposed-in-11-disticts-of-delhi-all-schools-of-ghaziabad-to-remain-closed-on-saturday/articleshow/60224911.cms

    रेप के दोषी राम रहीम का बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने किया बचाव

    रेप के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद जहां उनके समर्थक उपद्रव कर रहे हैं, वहीं बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने गुरमीत का बचाव किया है। उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने पूरे प्रकरण को भारतीय संस्कृति को बदनाम करने की साजिश बताया है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने भी इशारो-इशारों में राम रहीम का बचाव किया है।

    रेप के दोषी गुरमीत के बचाव में साक्षी ने कहा कि कोर्ट करोड़ों भक्तों की बात नहीं सुन रहा है, सिर्फ एक शिकायतकर्ता की बात सुन रहा है। बीजेपी सांसद ने सीधे-सीधे कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक शिकायतकर्ता सही है या करोड़ों भक्त। साक्षी महाराज ने यह भी कहा कि कोर्ट ने सीधे-सादे राम रहीम को बुला लिया, नुकसान के लिए कोर्ट भी जिम्मेदार है।

    BJP MP Sakshi Maharaj Supports Ram Rahim

    बीजेपी के एक और नेता राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने भी बिना नाम लिए राम रहीम का बचाव किया है। स्वामी ने ट्वीट किया, ‘साधुओं के लिए नया खतरा: राजनेता और आश्रमों में रहने वाले स्वामीजी को जेल भेजकर आश्रम की संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं। साधुओं को अपने उत्तराधिकारियों को आगे बढ़ाना चाहिए।’

    बता दें कि साध्वी से रेप के मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराया। सजा का ऐलान 28 अगस्त को होगा। गुरमीत को दोषी ठहराए जाने के बाद डेरा समर्थकों ने पंचकूला में हिंसा शुरू कर दी। हिंसा में 30 लोगों के मारे जाने और 250 से ज्यादा के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। पंचकूला से करीब 1,000 डेरा समर्थकों को हिरासत में लिया गया है। पंजाब के संगरूर, बठिंडा और मोगा शहर में जबकि हरियाणा के सिरसा, पंचकूला और कैथल में कर्फ्यू लगा दिया गया है। दिल्ली के सभी जिलों और पश्चिमी यूपी के 5 जिलों में धारा 144 लगा दिया गया है।

    डेरा समर्थकों ने अलग-अलग जगहों पर करीब 100 गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया है। हिंसा पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए डेरा सच्चा सौदा की संपत्ति को जब्त करने और उससे नुकसान की भरपाई का आदेश दिया है।

    Read: http://navbharattimes.indiatimes.com/india/bjp-mp-sakshi-maharaj-defends-rape-convict-gurmeet-ram-rahim/articleshow/60224286.cms

    राम रहीम: डेढ़ दशक में इस तरह अंजाम तक पहुंचा केस

    साध्वी से रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को आखिरकार शुक्रवार को अदालत ने दोषी ठहरा दिया। 28 अगस्त को राम रहीम को सजा भी सुना दी जाएगी। नीचे देखिए साल 2002 से 2017 तक इस केस ने लिए कैसे-कैसे मोड़…

    Rape Case on Ram Rahim, Violence, Injured and Deaths

    1. अप्रैल 2002: तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सहित पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को डेरा सच्चा सौदा की महिला अनुयायी के यौन शोषण की शिकायत वाली गुमनाम चिट्ठी मिली।
    2. मई 2002: हाई कोर्ट ने सिरसा डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज को चिट्ठी में लगाए गए आरोपों की जांच का निर्देश दिया।
    3. सितंबर 2002: जिला अदालत द्वारा यौन शोषण की आशंका जताए जाने के बाद हाईकोर्ट ने केस CBI को सौंप दिया।
    4. दिसंबर 2002: CBI ने गुरमीत राम रहीम के खिलाफ रेप और पीड़ित को धमकाने का केस दर्ज किया।
    5. जुलाई 2006: साध्वी ने बयान दर्ज कराया।
    6. जुलाई 2007: CBI ने अंबाला कोर्ट में चार्जशीट दायर की जिसमें राम रहीम पर 1999 से 2001 के बीच 2 साध्वियों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया।
    7. सितंबर 2008: CBI की विशेष अदालत ने राम रहीम के खिलाफ धारा 376 (रेप) और 506 (पीड़ित को धमकी) के तहत आरोप तय किए।
    8. सितंबर 2008: CBI कोर्ट ने राम रहीम पर आरोप तय किए।
    9. फरवरी 2009: एक साध्वी ने कोर्ट में बयान दर्ज कराया।
    10. सितंबर 2010: दूसरी साध्वी ने भी कोर्ट में बयान दर्ज कराया।

    Read: http://navbharattimes.indiatimes.com/chronology-of-rape-case-against-gurmeet-ram-rahim/listshow/60223922.cms

  • पेड़ों से ढकी यह इमारत बनने से पहले ही आकर्षण का केंद्र बनी हुई है

    पेड़ों से ढकी यह इमारत बनने से पहले ही आकर्षण का केंद्र बनी हुई है

    ज्यादातर बनी हुई इमारतें ही लोगो के आकर्षण का केंद्र होती हैं, लेकिन यह अनोखी इमारत बनते हुए भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. यह इमारत चीन के शंघाई शहर में बन रही है और इसकी अनोखी वास्तुकला की वजह से हजारों लोग इसको देखने आ रहे हैं.

    1000 Trees Covered Most Attractive Building

    इस इमारत का नाम ही रखा गया है: 1000 Trees, और इस इमारत की छतों और खम्भों पर पूरे पेड़ उगाये गए हैं जिसकी वजह से यह पूरी इमारत हरी-भरी दिखाई देती है.

    यह बिल्डिंग शंघाई के प्रसिद्ध M50 आर्ट एन्क्लेव के पास बन रही है और इसका काम अपने अंतिम चरण में है. यह बिल्डिंग 15 एकड़ में बनाई जा रही है. इसमें खम्भों को छुपाने के बजाये इन्हें छत पर निकाल कर उसके ऊपर पेड़ लगाए गए हैं.

    1000 Trees Covered Most Attractive Building

    इस इमारत को घर, ऑफिस, होटल और स्कूल के रूप में यूज किया जाएगा.
    16 मंजिला यह इमारत 50 मीटर ऊंची है और इसे अगले वर्ष तक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा.

    1000 Trees Covered Most Attractive Building

    Source & Image Credits:

    https://www.lonelyplanet.com/news/2017/08/18/china-shanghai-1000-trees-complex-m50-art-enclave/

  • जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे – एक प्रेरणादायक कहानी

    जैसा बोओगे वैसा ही काटोगे – एक प्रेरणादायक कहानी

    बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय.

    आप लोगों में से कई ने “नमक का दरोगा” नाम की कहानी तो पढ़ी होगी. जिसमे ईमानदारी और किसी भी तरह की रिश्वत स्वीकार न करने के बावजूद नौकरी से हाथ धोना पड़ता है. लेकिन ईमानदारी का फल अंत में मीठा ही मिला.

    इसी तरह की एक कहानी है, आइये इस कहानी से कुछ सीख लें.

    एक बार जब एक सफल बिजनेसमैन बूढा हो गया तो उसने अपने बिज़नेस को योग्य हांथों में सौपने की सोची, जो उसके बिज़नेस को पूरी ईमानदारी से आगे बढाए.

    इस काम के लिए उसने अपने बच्चों या फिर कंपनी के डाइरेक्टरों को चुनने के बजाय कुछ अलग करने की सोची. उसने अपनी कंपनी के सभी नौजवान कर्मचारियों को अपने पास बुलाया.

    उसने कहा: अब मेरे रिटायरमेंट और नए मालिक को चुनने का वक्त आ गया है, और मै चाहता हूँ की वो आप में से कोई हो.

    इस बात को सुनकर सभी कर्मचारी आश्चर्यचकित रह गए. बूढ़े मालिक ने आगे कहा: मैं आप सबको एक-एक बीज दे रहा हूँ, यह बहुत ही स्पेशल बीज है. मैं चाहता हूँ की आप सब इस बीज को बोयें और देखभाल करें. आज से ठीक एक साल बाद आपने इस बीज से क्या उगाया है वो दिखाएं. तब मैं आपके पौधे देखूंगा और अगले CEO का निर्णय करूँगा.

    उनमे एक कर्मचारी जिसका नाम जिम था, उसे भी सबकी तरह एक बीज मिला. जब शाम को वह घर पहुंचा तो उसने पूरी कहानी अपनी पत्नी को सुनाई. यह सुनकर पत्नी भी बहुत खुश हुई और एक गमला लाई, उसमे मिटटी और खाद आदि डालकर उसमे बीज बो दिया. रोज वो दोनों उस गमले में पानी डालते और पौधे के उगने की प्रतीक्षा करते. लगभग तीन हफ्ते के बाद उसके ऑफिस के कुछ कर्मचारी अपने पौधे के उगने और उनके बढ़ने की बाते करने लगे.

    जिम रोज की तरह गमले को देखता लेकिन उसमे किसी पौधे का कोई नामो-निशान तक नहीं था.
    धीरे-धीरे महीने गुजरने लगे. सभी अपने-अपने पौधों के बढ़ने की बाते करते थे. लेकिन उसके पास बताने के लिए कुछ भी नहीं था. जिम अपने साथियों से इस बारे में कोई बात नहीं करता था.

    लेकिन वह अपने गमले खाद पानी डालना कभी नहीं भूलता था, पता नहीं कब एक छोटा सा पौधा निकल आये.
    आखिकार एक साल पूरा हुआ, सभी कर्मचारी पाने -अपने पौधे लेकर आये.

    वहीँ जिम ने अपनी पत्नी से कहा की वह खाली गमला ले जाकर क्या करेगा? लेकिन उसकी पत्नी ने कहा की ईमानदार रहो और जो कुछ भी हुआ वह बताना. जिम घबरा रहा था क्यूंकि यह उसके जीवन का सबसे शर्मिंदगी वाला दिन था, लेकिन उसकी पत्नी की बात भी सही थी. जब वह अपना खाली गमला लेकर ऑफिस पहुंचा तो देखा की उसके सभी साथी तरह तरह के पौधे के साथ वहाँ पर थे. सभी के पौधे सुन्दर थे, और सब उसके खाली गमले की वजह से उस पर हंस रहे थे.

    तभी मालिक वहां पहुंचा और सबका स्वागत किया और बोलै की आप सबने बहुत ही अच्छे तरह से पौधे उगाये, आज आपमें से कोई एक इस कंपनी का CEO बनेगा. यह सुनकर जिम ने अपना खाली गमला अपने पीछे छुपा लिया.

    तभी अचानक मालिक की नजर सबसे पीछे खड़े जिम को अपने खाली गमले को छुपाते हुए पर पड़ी तो उसने उसे आगे बुलाया. जिम डर गया और सोचा की आज पौधा न उगने की वजह से उसकी नौकरी तो गयी.
    जब जिम आगे आया तो मालिक ने उससे पूंछा, क्या हुआ तो उसने पूरी कहानी बता दी.

    मालिक ने जिम के सिवा सबको बैठने को कहा और घोषणा की, अपने नए CEO का स्वागत करें, उसका नाम है “जिम”.

    जिम को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ. क्यूंकि वह तो एक बीज भी नहीं उगा सका था.
    सब के सब आश्चर्य में थे की ऐसा कैसे हो सकता है.

    तब मालिक ने कहा, एक साल पहले यहां पर सभी को मैंने एक-एक बीज दिया था और कहा था की इस बीज को बोना और खाद पानी देना और आज मुझे वापस लाकर दिखाना. लेकिन मैंने सबको उबले हुए बीज दिए थे. वो सब मरे हुए बीज थे और उनसे पौधे उगना असंभव था.

    जिम के सिवा आप सब पौधे लेकर आये. जब आपने देखा की पौधे नहीं उग रहे हैं तो आपने बीज बदल दिए. केवल जिम ने ईमानदारी से साहस दिखाया और खाली गमला जिसमे मेरा बीज था, लेकर आया. इसलिए जिम है आपका नया CEO.

    अगर आप ईमानदार है, तो विश्वास जीतेंगे.
    अगर आपमें अच्छाई है, तो आप दोस्ती जीतेंगे.
    अगर आपमें मानवता है, तो आप महानता जीतेंगे.
    अगर आप धैर्यवान हैं, तो आप संतोषी होंगे.
    अगर आप कठिन परिश्रम करते हैं, तो जरूर सफल होंगे.
    अगर आप दयावान होंगे, तो सबसे सामंजस्य बिठा पाएंगे.
    अगर आपका ईश्वर पर विश्वास हैं, तो आप फसल काट पाएंगे.

    इसलिए आप पर निर्भर करता है की आप आज जो बोयेंगे वही बाद में काटेंगे.

  • वरुण प्रुथी का रक्षा बंधन पर दिल को छू लेने वाला विडियो

    वरुण प्रुथी का रक्षा बंधन पर दिल को छू लेने वाला विडियो

    रक्षा बंधन भाई और बहन के प्यार और निष्ठा का त्यौहार होता है इस दिन हर भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देते है।पर असल में वचन का पता तब चलता है जब वही भाई किसी और की बहन को छेड़ते है। असल में भाई वही होते है जो अपनी बहन के साथ साथ दुसरो की भी बहनो की रक्षा करते है।

    वरुण प्रुथी के द्वारा फिल्माया गया ये विडियो एक सत्य घटना पर आधारित है जो एक ऐसे ही भाई की कहानी दिखता है। जिसने दूसरे की बहन को बचाने के लिए अपनी जान दे दी।

    मैं यह यकीन के साथ कह सकता हू की इस विडियो को देखने के बाद आप शर्म से डूब जायेगे।

  • क्या आप प्लास्टिक के नकली चावल खा रहे हैं? इन पांच तरीकों से पता लगाएं

    क्या आप प्लास्टिक के नकली चावल खा रहे हैं? इन पांच तरीकों से पता लगाएं

    हम सब ने फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर चीन के नकली प्लास्टिक के चावल बनते हुए देखे होंगे. यह चावल दुनिया भर के बाजारों में एक वायरस की तरह फैल चुका है. अब आप सब ही सोचिये कि यह प्लास्टिक का चावल खाने वालों का क्या हाल होगा. देखने में यह चावल बिलकुल असली चावल की तरह होता है और पकाने के बाद असली चावल की तरह ही मुलायम हो जाता है. यह हाल तब है जब चीन विश्व में सबसे ज्यादा चावल का उत्पादन करता है.

    कैसे बनता है यह नकली चावल:

    एक कोरियन न्यूज़ के अनुसार बहुत सी चीनी कम्पनियाँ नकली चावल बनाने और बेचने के धंधे में लिप्त हैं. यह चावल प्लाटिक और आलू के स्टार्च को मिलकर बनाया जाता है. इसमें उबले हुए चावल का फ्लेवर मिलकर उसे असली चावल कि तरह महक प्रदान की जाती है. इन नकली चावलों को असली चावलों के साथ मिलाकर, असली चावल की कीमत पर बेंचा जाता है.

    देखें प्लास्टिक से चावल कैसे बनते हैं:

    https://www.youtube.com/watch?v=eRlTAbVrXqI

    किसान और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वालों को इस तरह की समस्या न के बराबर है क्यूंकि वह अपने खेतों का उत्पादित असली चावल ही खाते हैं. लेकिन शहरों में रहने वालों को इस समस्या से कभी भी दो-चार होना पड़ सकता है.

    अब सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इन नकली प्लास्टिक के चावल को कैसे पहचाना जाए.

    आइये ये सरल से टिप्स आजमाइए और असली और नकली चावल में अंतर कीजिये.

    #1. पानी से पता लगाएं:

    एक गिलास में पानी लीजिये और थोड़े से चावल उसमे डालिये. असली चावल गिलास की तली में बैठ जाएंगे और प्लास्टिक के चावल पानी में तैरते रह जाएंगे.

    #2. आग से पहचान:

    थोड़े से चावलों को माचिस या लाइटर से जलाएं. अगर चावल नकली होंगे तो प्लास्टिक जैसी जलने की बदबू आएगी.

    #3. फफूंदी से पहचान:

    थोड़े से चावल पकाओ और उन्हें एक बोतल में बंद करके दो तीन दिन के लिए रख दो. अगर चावल असली होंगे तो उनमे फफूंदी लग जायेगी और सड़ने की बदबू आएगी, और अगर न तो फफूंदी लगे और न ही चावल सड़ें तो समझ जाइये कि जो चावल आप खरीद कर लाये हैं वो प्लास्टिक के नकली चावल हैं.

    #4. उबालकर पता लगाओ:

    नकली चावल का पता उन्हें उबालकर भी लगाया जा सकता है. अगर चावल प्लास्टिक के हैं तो उबालते समय बर्तन में एक मोटी परत सी बनाएंगे.

    #5. गरम तेल में पकाने से:

    गरम खौलते हुए तेल में प्लास्टिक के चावल डालने से वो पिघल जाएंगे और बर्तन कि तली में एक मोटी परत के रूप में जम जाएंगे.

    देखें प्लास्टिक के चावल की पहचान कैसे करे:

  • अंग्रेजों से आज़ाद भारत तक निर्माण कार्य

    अंग्रेजों से आज़ाद भारत तक निर्माण कार्य

    हर दूसरे दिन तरह-तरह की ख़बरों के बीच कुछ ख़बरें पुल गिरने और इमारतें गिरने की होती हैं जिनमे कई लोग हताहत हो जाते हैं.

    मुझे समझ नहीं आता है कि पुल गिरते क्यों हैं. कमी कहाँ है और किसमे है? दोष किसे दूँ और शर्म किस पर करूँ

    जहां तक मैं अपने (बात आपकी भी है) बारे में बात करू तो मैंने बहुत सारे पुल बनते हुए देखे हैं और उनमे से कई सारे गिरते हुए भी. कहीं न कहीं, कोई न कोई कमी तो है.

    लेकिन एक बात सोचने वाली है (इस बात पर आप लोग शायद मुझे अंग्रेजों का गुलाम या फिर देशद्रोही कहने लगे पर मुझे कोई हर्ज नहीं है, जो सच है वो सच है. झूठी शान में क्या रखा है.) जो इमारतें या पुल मैंने बनते हुए नहीं देखे हैं (अंग्रेजों के जमाने के ) वो अपनी उम्र गुजरने के सालो बाद भी सीना ताने खड़े हैं और हमारी नयी तकनीकों और उच्च निर्माण सामग्री को मुंह चिढ़ा रहे हैं.

    सोचिये वजह क्या है?

    एक छोटा सा पॉइंट – शायद अंग्रेजों ने सोचा हो कि हमें यहां हमेशा रहना है. उन्होंने सड़कें, पुल, रेलवे और इमारतें बनवाई. उनकी बनवाई इमारतों में आज भी रेलवे स्टेशन, फैक्ट्रियां और सरकारी ऑफिस जैसे दिल्ली की संसद, कनाट प्लेस और बहुत सारे राज्यों की विधान सभाएं चल रही हैं. लेकिन आज़ादी के बाद बनी सैकड़ों इमारतें ध्वस्त हो चुकी हैं, पुल गिरते हैं और बनते हैं.

    पहले सड़क बनती है फिर सीवर और पानी की लाइन डालने के लिए नयी बनी सड़क खोद दी जाती है. क्या भारत के प्लानर और इंजीनियर इतने मुर्ख हैं जो एक काम को सही से प्लान नहीं कर सकते. कर सकते हैं, लेकिन उनका प्लान सड़क बनाने से पहले पैसे बनाने का होता है. पहले घटिया सामग्री की सड़क बनाओ, फिर सीवर लाइन डालने के लिए खोद डालो. लो जी बन गए पैसे.

    आज के राजनेताओं के बैंक खातों में दिन दूनी रात चौगुनी गति से धन बढ़ता है, आय से अधिक , वो भी भारत के नहीं, स्विस बैंक के खातों में. ये किसका पैसा है? हमारा और आपका. जिसे सरकार रोजाना टैक्स बढाकर अपनी कमाई बढाती है और उसे राजनेता और सरकारी अफसर मिल बैठ कर हजम कर जाते है.

    वैसे लोकतंत्र के चार स्तम्भ बताये गए है लेकिन कोई भी अपना काम ईमानदारी से नहीं करता है. नेताओं को आप जानते है, पुलिस की कार्यशैली से आप परिचित होंगे, मीडिया काम खबर की जगह बिकाऊ ख़बरों ने लिया है. न्याय विभाग के हालात ये हैं की गरीब आदमी न्याय की आस लगाए मर जाता है और पैसे वाले बड़े बड़े लोग तारीख दर तारीख केस आगे बढ़ाते हैं या फिर फाइलों को ऊपर से नीचे या नीचे से ऊपर घुमाते हैं. इतने केस न्याय का इन्तजार कर रहे हैं की उनके फाइलों से कमरे भरे पड़े हैं. एक बार कोई फाइल ढेर में नीचे पहुँच गयी तो इन्तजार कीजिये दसियों साल का. या फिर इंतजाम कीजिये पैसों का.

    जिस राष्ट्र का लोकतंत्र ही भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त हो, जनता को कोई मतलब ही न हो, उस राष्ट्र का भगवान् ही मालिक है.

    शायद किसी ने ठीक ही कहा है-

    दस हजार, दस लाख मरे,
    पर झंडा ऊंचा रहे हमारा.
    ..
    गांधीजी का नाम बेचकर,
    बतलाओ कब तक खाओगे.

    यम को भी दुर्गन्ध लगेगी,
    नरक भला कैसे जाओगे..

    Image Source: NDTV

  • श्री कृष्ण और कर्ण संवाद – जीवन का सार

    श्री कृष्ण और कर्ण संवाद – जीवन का सार

    महाभारत के बारे में कौन नहीं जानता, यह युद्ध धर्म की रक्षा हेतु पांडवों और कौरवों के बीच लड़ा गया. कुरुक्षेत्र में लड़ा गया यह धर्म युद्ध असीम जन-धन हानि के लिए विख्यात है साथ ही इस युद्ध से गीता जैसा  महाग्रन्थ मिला जो जीवन के गूढ़ रहस्यों से हमें अवगत कराता है. कहा गया है की गीता में जीवन के हर सवाल का जवाब है.

    महाभारत की बात करें तो इसका हर चरित्र और उनका जीवन हमें कुछ न कुछ सीख देते हैं. इस युद्ध को   मुख्यतः पांडव और कौरवों के नजरिये से देखा गया है, लेकिन इस पूरी महाभारत में का एक किरदार की हमेशा अनदेखी हुई है, वो है कर्ण.

    कर्ण को हमेशा ही दुर्योधन के समर्थक के रूप में देखा गया, लेकिन अगर इसे मित्रता के रूप में देखें तो हमेशा ही कर्ण सबसे आगे दिखाई देता है. कर्ण को जब सबने दुत्कार दिया, चाहे वो कर्ण की माँ कुंती हो या गुरु द्रोणाचार्य हों, तब दुर्योधन ने मित्रता निभाई. उस मित्रता का बदला कर्ण ने महाभारत  में दुर्योधन के पक्ष में युद्ध लड़कर और अपनी जान देकर निभाया.

    कर्ण का चरित्र अपने आप में वीरता की मिसाल है और हमें कई सीख देता है.

    महाभारत युद्ध में श्री कृष्ण और कर्ण के बीच हुए संवाद की बात करें तो यह भी जीवन का गूढ़ ज्ञान है और जीवन के कई सवालों का हल मिलता है.

    आइये देखें श्री कृष्ण और कर्ण के बीच हुए संवाद के मुख्य अंश:

    कर्ण:

    हे कृष्ण, जन्म लेते ही मेरी माँ ने मुझे छोड़ दिया, गरीब घर में होते हुए भी मैं शूरवीर पैदा हुआ तो इसमें मेरा क्या दोष है? गुरु द्रोणाचार्य ने पांडवों और कौरवों को शिक्षा दी लेकिन मुझे शिक्षा नहीं दी क्यूंकि मैं क्षत्रिय नहीं था.

    मैंने परशुराम से शिक्षा ली, लेकिन यह जानने के पश्चात् की मैं क्षत्रिय नहीं हूँ, मुझे सब शिक्षा भूल जाने का श्राप दिया.

    द्रौपदी के स्वयंवर में मेरा सिर्फ इसलिए अपमान हुआ क्यूंकि मैं क्षत्रिय नहीं था. मेरी माता ने भी सिर्फ अपने पांच पुत्रों की रक्षा करने के लिए यह सत्य बताया की मैं उनका पुत्र हूँ.

    जो कुछ आज मैं हूँ वो सब दुर्योधन की देन है. तो फिर मैं उसके पक्ष में युद्ध करके भी क्यों गलत हूँ.

    श्री कृष्ण का उत्तर:

    हे कुंती पुत्र कर्ण, हाँ तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ. लेकिन मेरी कहानी तुमसे कुछ ज्यादा अलग नहीं है. मेरा जन्म कारागार में हुआ और जन्म के तुरंत बाद ही माँ बाप से बिछड़ गया. मेरी मृत्यु जन्म से पहले ही तय कर दी गयी.

    तुम कम से कम धनुष वाण और घोड़े और रथ के साथ खेलते हुए बड़े हुए, लेकिन मैं गाय, बछड़े, गोबर और झोपडी में बड़ा हुआ. चलना सीखने से पहले ही मुझ पर कई प्राणघातक हमले हुए. कभी पूतना तो कभी बकासुर…

    मैं सोलहवें साल में गुरु संदीपनी के पास शिक्षा लेने जा पाया. लेकिन हमेशा ही लोगों को यह लगता था की मैं उनके कष्ट हरने के लिए पैदा हुआ हूँ.  तुमने कम से कम अपने प्रेम को पा लिया और उस कन्या से विवाह किया जिसे तुम प्रेम करते थे. लेकिन मैं अपने प्रेम को विवाह में नहीं बदल पाया. और तो और  मुझे उन सब गोपियों से विवाह करना पड़ा जो मुझसे प्रेम करती थी या जिन्हें मैंने राक्षसों से मुक्त कराया.

    इतना सब कुछ होने के बावजूद तुम शूरवीर कहलाये जबकि मुझे भगोड़ा कहा गया.

    इस महाभारत के युद्ध में अगर दुर्योधन जीता तो तुम्हें इसका बड़ा श्रेय मिलेगा लेकिन अगर पांडव युद्ध जीते भी तो मुझे क्या मिलेगा. सिर्फ यही की इतने विनाश का कारण मैं हूँ.

    इसलिए हे कर्ण! हर किसी का जीवन हमेशा चुनौतियों भरा होता है. हर किसी के जीवन में कहीं न कहीं अन्याय होता है. न सिर्फ दुर्योधन बल्कि युधिष्ठिर के साथ भी अन्याय हुआ है. किन्तु सही क्या है ये तुम्हारे अंतर्मन को हमेशा पता होता है. इसलिए हे कर्ण अपने जीवन में हुए अन्याय की शिकायत करना बंद करो और खुद का विवेचन करो. तुम अगर सिर्फ जीवन में अपने साथ हुए अन्याय की वजह से अधर्म के रास्ते पर चलोगे तो यह सिर्फ तुम्हें विनाश की तरफ ले जाएगा.

    अधर्म का मार्ग केवल और केवल विनाश की तरफ जाता है.

  • क्या जानते हैं आप कानपुर का धार्मिक इतिहास

    क्या जानते हैं आप कानपुर का धार्मिक इतिहास

    वैदिक, पौराणिक और धार्मिक आस्था तथा ऐतिहासिकता को समेटे कानपूर आर्य सभ्यता का प्राचीन केंद्र रहा है. कानपूर जनपद का भू-भाग पुण्यतोया गंगा – यमुना के दोआब भाग में स्थित है. कानपूर के इस भू-भाग में पौराणिक काल के बहुत से ऋषि मुनियों का प्रवास और जन्म स्थान की मान्यता भी है. जनपद में गंगा का प्रवेश आकिन ग्राम से होता है. आकिन ग्राम में सप्त ऋषि प्रधान अंगिरा का आश्रम होने की मान्यता है. ब्रह्मा के मानस पुत्र अंगिरा तपस्या से अग्नि के सामान तेजवान थे. श्री कृष्ण ने पाशुपत योग की प्राप्ति महृषि अंगिरा से ही किया था. अंगिरा को चौथे द्वापर का व्यास भी कहा गया है. इसी तरह गंगा किनारे सैबसू ग्राम में कश्यप पुत्र विभाण्डक के पुत्र श्रृंगी का आश्रम है. श्रृंगी एक कर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे. अंगदेश में अकाल होने पर राजा रोमपाद को सुझाव दिया गया की ब्रह्मचारी श्रृंगी के अंगदेश आने पर अकाल समाप्त हो सकता है. रोमपाद ने प्रयास कर उन्हें बुलाया जिससे वर्षा हुई. राजा ने अपनी पालित पुत्री का विवाह श्रृंगी से कर दिया तथा श्रृंगी ने राजा दशरथ के पुत्र्येष्टि यज्ञ को पूरा कराया. गंगा के सुरम्य तट पर बिठूर में बाल्मीकि का आश्रम है. भगवान् राम की पत्नी सीता ने यहीं प्रवास किया था, लव कुश का जन्म भी यहीं हुआ था तथा रामायण महाकाव्य की रचना भी यहीं हुई थी.

    दैत्य राज बलि की राजधानी ‘मूसानगर’ में शुक्राचार्य का स्थान माना जाता है. भगवान वामन के तीन पग भूमि दान में बाधा बनने पर उनकी आँख जाती रही. यहां पर शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी के नाम पर सरोवर भी विद्धमान है. देवयानी का विवाह ययाति के साथ हुआ, जिनकी राजधानी जाजमऊ में थी.

    सेंगुर नदी के तट पर निगोही ग्राम में तपस्वी और क्रोधमूर्ति दुर्वासा ऋषि का आश्रम है. उन्होंने भक्त अंबरीश को शाप तथा दुष्यन्तपत्नी शकुंतला को शाप दिया था. इसी तरह ग्राम “परसौरा” भगवान परशुराम और “चिंता निवादा” उनके पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम माना जाता है. भृगु पुत्र ऋचीक और गाधिपुत्री सत्यवती से जमदग्नि ऋषि का जन्म हुआ. भगवान् परशुराम को विष्णु का अवतार माना जाता है. “नार” ग्राम नारदाश्रम के नाम से प्रसिद्ध है. नारद पूर्व में दासी पुत्र थे.

    महाभारत कालीन द्रोणपुत्र चिरंजीवी अश्वत्थामा का जन्मस्थान शिवराजपुर के पास ककयपुर में खेरेश्वर में है. मान्यता है की सप्त चिरंजीवियों में से अश्वत्थामा आज भी खेरेश्वर महादेव का प्रातः अभिषेक करते हैं. भक्तराज ध्रुव की राजधानी बहिर्ष्मतीपूरी बिठूर में मानी जाती है. बालिपुत्र बाणासुर की राजधानी “बनीपारा” में है. वहां पर बना ऊषाबुर्ज आज भी उनकी पुत्री का स्मरण दिलाता है. ययाति से जाजमऊ और माता-पिता के भक्त श्रवण कुमार के नाम से “सरवन खेड़ा” प्रसिद्ध है. आज भी यह पौराणिक धार्मिक तीर्थ आध्यात्मिक पर्यटन की ओर लोगों को आकर्षित करते हैं. इनसभी तीर्थ स्थलों के विकास पर शासन को अवश्य ध्यान देना चाहिए.
    साभार: सचिन तिवारी

  • हिंदी कविता – भविष्य की कल्पना

    हिंदी कविता – भविष्य की कल्पना

    दाने गिनकर दाल मिलेगी,

    गेंहूं की बस छाल मिलेगी.

     

    पानी के इंजेक्शन होंगे,

    घोषित रोज इलेक्शन होंगे.

     

    हलवाई हैरान मिलेंगे,

    बिन चीनी मिष्ठान मिलेंगे.

     

    जलने वाला खेत मिलेगा,

    बस मिट्टी का तेल मिलेगा.

     

    शीशी में पेट्रोल मिलेगा,

    आने वाली पीढ़ी को.

     

    राजनीति में तंत्र मिलेगा,

    गहरा एक षड़यंत्र मिलेगा.

     

    न सुभाष, न गाँधी होंगे,

    खादी के अपराधी होंगे.

     

    जनता गूंगी बहरी होगी,

    बेबस कोर्ट कचहरी होगी.

     

    मानवता की खाल मिलेगी,

    आने वाली पीढ़ी को.

     

    प्यासों की भी रैली होगी,

    गंगा बिलकुल मैली होगी.

     

    घरों घरों में फैक्स मिलेगा,

    साँसों पर भी टैक्स लगेगा.

     

    आने वाली पीढ़ी पर.

     

    साभार: रावेन्द्र कुमार

    Image Source: https://www.youtube.com/watch?v=jpgyD1Hs_sY

  • हिंदी कविता – जलते दिए – शहीदों के लिए

    हिंदी कविता – जलते दिए – शहीदों के लिए

    हम शहीदों की राहों के जलते दिए,

    हमको आंधी भला क्या बुझा पाएगी.

    मौत को हम सुला दें वतन के लिए,

    मौत हमको भला क्या सुला पाएगी.

    हम भी इस बाग़ के खिल रहे फूल हैं,

    जो शहीदों की राहों पर चढ़ते रहे.

    बिजलियों को कदम से कुचलते रहे,

    सर कटाने का हमने लिया है सबब.

    सर झुकाना तो हमने है सीखा नहीं,

    वाह रे हिन्द तेरी दुआ चाहिए.

    है भला कौन हस्ती, मिटा पाएगी जो,

    हम शहीदों की राहों के जलते दिए.

    साभार: ऋषि नारायण

    Image Source: http://indianexpress.com