पार्ट 1 — “गायब होने वाला टिफ़िन”
हर सुबह राजू ऑफिस पहुँचते ही सबसे पहले एक ही काम करता था — अपनी सीट पर बैठकर टिफ़िन को सावधानी से रखता, और सबको बोलता,
“देख लेना भाई, आज कोई मेरा टिफ़िन नहीं चुराएगा!”
पूरा ऑफिस जानता था कि राजू का टिफ़िन मिस्टीरियस तरीक़े से रोज़ गायब हो जाता है।
कोई कैमरा लगवाओ, कोई गार्ड रखो — कुछ भी काम नहीं आया।
इसलिए एक दिन राजू ने सस्पेंस फ़िल्म वाला प्लान बनाया।
उसने टिफ़िन में आलू गोभी की सब्ज़ी में हरी मिर्च के बजाय हरी मिर्च का अचार भर दिया, और ऊपर से थोड़ी सी क्रीम डाल दी — ताकि दिखे स्वादिष्ट।
दोपहर 1 बजे, जैसे ही राजू कैन्टीन पहुँचा — टिफ़िन गायब!
राजू मुस्कुराया, बोला, “अब पकड़ में आएगा चोर!”
थोड़ी देर बाद एक ज़ोरदार “आआआआहहह!!!” की आवाज़ आई।
सभी भागे — और देखा कि बॉस पानी पीते-पीते चेहरा लाल किए खड़ा है।
राजू बोला, “सर! आपको क्या हुआ?”
बॉस बोला, “राजू… तेरी बीवी का बनाया खाना बहुत स्पाइसी है…”
राजू हसते हुए बोला, “सर अभी तो मेरी शादी भी नहीं हुई है”
सारा ऑफिस हँसी से लोटपोट हो गया।
राजू के चेहरे पर डर और खुशी का मिक्स एक्सप्रेशन था।
बॉस ने कहा, “आज प्रमोशन नहीं मिलेगा… लेकिन खाना अच्छा था।”
सीख: कभी-कभी सस्पेंस प्लान बनाओ तो ध्यान रखना…
चोर अगर बॉस निकला तो केस पलट भी सकता है!
पार्ट 2 — “राजू का प्रमोशन और बदला”
पिछली घटना के बाद ऑफिस में सब राजू को “मिर्ची मैन” कहने लगे थे।
और बॉस हर दिन उससे बोलते —
“राजू, आज क्या स्पेशल है? बस थोड़ा कम झुलसाने वाला बनाना!” ️
कुछ हफ्तों बाद खबर आई कि ऑफिस में प्रमोशन आने वाले हैं।
राजू बोला — “इस बार तो मैं ही नंबर वन रहूँगा। बॉस को खुश कर दूँगा।”
तो राजू ने बॉस के लिए खास टिफ़िन बनाया —
राजमा चावल, रायता, और मीठे में गुलाब जामुन।
लेकिन इस बार टिफ़िन पर उसने बड़ी चतुराई से लिखा —
“बॉस के लिए नहीं है!”
अब यहाँ से सस्पेंस शुरू हुआ…
दोपहर को जब सब लंच कर रहे थे, राजू टिफ़िन खोलने पहुँचा —
और देखा, टिफ़िन फिर से गायब!
राजू चिल्लाया — “अबे यार! फिर कौन ले गया? इस बार तो लिखा था कि बॉस के लिए नहीं है!”
उसी वक्त बॉस कमरे से निकले, चेहरा लाल, माथे पर पसीना, और बोले —
“राजू… तूने कहा नहीं था कि रायते में नमक डालना ज़रूरी होता है?”
राजू बोला — “सर! आप फिर मेरा टिफ़िन खा गए?”
बॉस बोले — “नहीं नहीं… मैं तो बस टेस्ट कर रहा था कि ये मेरे लिए नहीं है या है!”
पूरा ऑफिस ठहाकों से गूंज उठा।
लेकिन असली ट्विस्ट अगले दिन आया —
राजू को प्रमोशन मिल गया!
क्योंकि बॉस ने फाइल पर लिखा —
“राजू honest है, मेहनती है, और सबसे बड़ी बात —
उसके खाने से कोई झूठ नहीं बोल सकता!”
सीख:
अगर ज़िंदगी में प्रमोशन चाहिए,
तो मेहनत करो…
या फिर अपने बॉस को राजू वाला रायता खिला दो!

पार्ट 3 — “राजू और ऑफिस की भूतनी”
राजू अब प्रमोशन पाकर “सीनियर असिस्टेंट मैनेजर” बन चुका था।
अब उसके पास खुद का केबिन था, घूमने के लिए कुर्सी थी,
और ऊपर से नई टाइटल —
“मिर्ची मैन टू मैनजिंग मैन!”
सब कुछ बढ़िया चल रहा था,
पर एक दिन ऑफिस में अफ़वाह फैल गई —
“रात में अकाउंट्स वाले केबिन में कोई हँसता है!”
राजू बोला — “ये सब बकवास है, रात में प्रिंटर फँसता है तो आवाज़ आती है।”
पर एक दिन रात में, बोनस रिपोर्ट पूरी करने के लिए राजू खुद ऑफिस में रुक गया।
घड़ी में रात के 12:05 बजे थे…
लाइट थोड़ी झपकी…
और तभी पीछे से आवाज़ आई —
“राजूउउउ… मेरा टिफ़िन कहाँ है…”
राजू ने धीरे से मुड़कर देखा —
एक सफेद साड़ी में औरत, हवा में झूलती हुई, हाथ में पुराना टिफ़िन बॉक्स लिए!
राजू काँप गया — “कौन… कौन हो तुम?”
भूतनी बोली — “मैं वही हूँ, जो तुम्हारे बॉस के पहले इस ऑफिस में लंच लाया करती थी… और मेरा टिफ़िन कभी वापस नहीं आया!”
राजू चिल्लाया — “मैंने नहीं लिया! मैं तो सबका टिफ़िन लौटाता हूँ!”
भूतनी बोली — “तो फिर आज से मेरा टिफ़िन तू भरेगा…”
और ज़ोर से हँसी —
“हा हा हा हा हा…”
राजू भागने लगा, तभी पीछे से आवाज़ आई —
“अरे ठहरो राजू!”
लाइट ऑन हुई — और देखा कि वो ऑफिस की पियून, कमलेश दीदी थीं!
उन्होंने चेहरे पर आटे का फेस पैक लगाया हुआ था और टिफ़िन में खाना रख रही थीं।
राजू बोला — “दीदी! आप भूत क्यों बन गईं?”
वो बोलीं — “क्या करें राजू, CCTV काम नहीं कर रहा, तो कोई डर के मारे रात में खाना नहीं चुराता।”
अगले दिन ऑफिस में सबको पता चला,
और अब नया बोर्ड लगाया गया —
“टिफ़िन चोरों से सावधान रहें — यहाँ भूतनी ड्यूटी पर है!”
सीख:
ऑफिस में भूत नहीं होते,
बस वो लोग होते हैं जिन्हें लंच ब्रेक से पहले भूख लग जाती है!

पार्ट 4 — “राजू इन लव: टिफ़िन वाली भूतनी का बदला”
पिछले हादसे के बाद से राजू अब ऑफिस का “भूत कंट्रोल एक्सपर्ट” बन गया था।
जो भी फाइल गायब होती, लोग कहते —
“राजू भाई, ज़रा देख लो… कहीं फिर से आत्मा एक्टिव तो नहीं हो गई?”
पर इस बार मामला कुछ और था।
हर रात राजू को ईमेल आती —
“राजू, आज टिफ़िन में क्या है?”
ईमेल का नाम था — Miss Ghost@office.com
राजू को लगा कोई मज़ाक कर रहा है, पर जब उसने रिप्लाई किया —
“आज छोले भटूरे हैं।”
तो तुरंत जवाब आया —
“थोड़ा रायता भी रख लेना, आज मिलने आऊँगी…”
राजू डर गया, पर थोड़ा excited भी था।
रात को ऑफिस में रुका, टिफ़िन खोला, और देखा —
सामने वही भूतनी खड़ी थी! सफ़ेद साड़ी, लेकिन इस बार बालों में गजरा, और हाथ में स्टील का चमच।
राजू ने काँपते हुए कहा — “तुम… तुम मुझसे क्या चाहती हो?”
भूतनी बोली — “बस थोड़ा राजमा चावल और प्यार।”
राजू का दिल धक से रुक गया!
भूतनी बोली — “मैं ज़िंदा थी जब भी खाना चोरी होता था, तूने ही पकड़ना शुरू किया, अब मैं चैन से खा सकती हूँ…”
राजू बोला — “तो अब तुम मुझे डराओगी नहीं?”
वो बोली — “नहीं, अब मैं तुम्हारा टिफ़िन पार्टनर बनना चाहती हूँ।”
राजू ने कहा — “पर लोग क्या कहेंगे? एक इंसान और एक भूतनी!”
वो मुस्कुराई — “ऑफिस में कौन असली है, कौन नकली, ये तो सबको पता है…”
उसी वक्त लाइट ऑन हुई —
और बॉस अंदर आए —
“राजू! फिर से टिफ़िन पार्टी रात में?”
राजू बोला — “सर… वो, मैं अकेला नहीं था…”
बॉस बोले — “हाँ हाँ, हमें दिख रहा है — टिफ़िन में दो गुलाब जामुन रखे हैं!”
भूतनी गायब हो गई, और टिफ़िन में नोट मिला —
“राजू, फिर मिलेंगे — अगले बोनस वाले शुक्रवार को ❤️”
सीख:
कभी-कभी प्यार वहीं मिल जाता है जहाँ तुम सिर्फ़ लंच चोरी ढूँढने गए थे!

पार्ट 5 — “राजू वेड्स टिफ़िन भूतनी”
कहते हैं, प्यार अंधा होता है…
पर राजू का प्यार तो अदृश्य भी था! ❤️
भूतनी (जिसका नाम अब राजू ने प्यार से रखा था — “गुलाब जामुन देवी”)
हर शुक्रवार को उसके टिफ़िन में दिखाई देती थी।
कभी रायता हिलाती, कभी चावल में दिल बनाती।
एक दिन राजू ने ठान लिया —
“अब तो शादी कर के ही रहूँगा, चाहे बारात में इंसान आएं या आत्माएँ!”
बॉस ने कहा — “राजू, तू पागल हो गया है!
ऑफिस की भूतनी से शादी? अगला क्या करेगा, प्रिंटर से रिश्ता?”
पर राजू डटा रहा।
शादी का कार्ड छपवाया —
“राजू ❤️ मिस टिफ़िन देवी — एक दिलचस्प जोड़ी, खाना गरम और प्यार ठंडा नहीं होगा!”
♀️ शादी का दिन…
स्थान: ऑफिस की कैंटीन
बारात: आधे इंसान, आधे अदृश्य मेहमान
DJ: “तेरी मिर्ची, मेरा रायता”
राजू सूट में, और गुलाब जामुन देवी धुएँ की ड्रेस में।
पंडित जी बोले — “मांग में सिंदूर लगाइए…”
राजू ने जेब में हाथ डाला…
और सिंदूर की जगह लाल मिर्च पाउडर निकल गया! ️
गुलाब जामुन देवी चिल्लाई — “आँखों में जलन!”
पूरी बारात खाँसने लगी, और बॉस बोले —
“राजू, शादी नहीं, बारबेक्यू कर दिया तूने!”
फिर अचानक हवा चली, सब शांत हुआ…
और टिफ़िन में से आवाज़ आई —
“राजू, अब से तेरा लंच, डिनर और डर — सब मेरा!”
राजू मुस्कुराया —
“बस यही तो चाहिए था!”
एपिलॉग (अंत)
अब ऑफिस में हर दिन राजू के टिफ़िन से खुशबू आती है,
कभी भूतनी का पसंदीदा पुलाव, कभी रोमांटिक रायता।
बॉस जब भी पूछते —
“राजू, आज खाना कहाँ से आया?”
वो मुस्कुराकर कहता —
“सर, ऊपरवाली भेजती हैं…”
और पूरे ऑफिस में फिर वही नारा गूंजता —
“जय टिफ़िन देवी की!”
सीख:
कभी किसी के टिफ़िन का मज़ाक मत उड़ाओ —
क्या पता, अगला प्रमोशन या शादी वहीं से निकल आए!

पार्ट 6 — “राजू और टिफ़िन देवी: हनीमून इन हॉंटेड हिल्स”
शादी के बाद राजू और टिफ़िन देवी (उर्फ़ गुलाब जामुन देवी ) ने फैसला किया —
“अब तो थोड़ा घूमना बनता है — सबके डर से दूर, पहाड़ों में प्यार का स्वाद लेने।”
राजू ने पैकेज बुक किया — “मसूरी का हनीमून पैकेज — कैंडल लाइट डिनर विद व्यू।”
पर एजेंसी ने गलती से भेज दिया —
“मसूरी हॉंटेड हिल्स रेज़ॉर्ट — घोस्ट लाइट डिनर विद स्पूक्स!”
पहुँचते ही अजीब बातें शुरू…
रिसेप्शन पर बेल बजी, पर कोई नज़र नहीं आया।
राजू ने कहा — “कोई है?”
आवाज़ आई — “हूँ… मैं तो हूँ…”
और रजिस्टर अपने आप खुल गया।
टिफ़िन देवी बोली — “वाह! यहाँ तो मेरे पुराने दोस्त काम करते हैं।”
राजू ने डरते हुए पूछा — “मतलब… भूत?”
वो बोली — “अरे नहीं, बस थोड़े टाइमलेस वर्कर्स हैं।”
रात को कैंडल लाइट डिनर सेट हुआ —
दो प्लेटें, दो चम्मच, और तीसरी प्लेट अपने आप घूमने लगी!
राजू बोला — “ये तीसरी प्लेट क्यों?”
टिफ़िन देवी बोली — “अरे वो होटल का शेफ है, थोड़ा इनविज़िबल रहता है।”
राजू बोला — “यहाँ तो हर चीज़ अपने आप हिल रही है!”
वो मुस्कुराई — “प्यार में भी तो सब अपने आप हिलता है…” ❤️
⚡ फिर आया असली सस्पेंस
अचानक बिजली चली गई, और होटल की दीवार पर लिखा दिखा —
“राजू, ये हनीमून नहीं, टेस्ट है!”
राजू बोला — “कौन बोल रहा है?”
आवाज़ आई — “मैं होटल मैनेजर आत्मा, जो जाँचता है कि कौन सच्चा जोड़ा है!”
टिफ़िन देवी बोली — “राजू, अगर तू मुझसे सच्चा प्यार करता है, तो ये खा…”
और उसने टिफ़िन में से कुछ दिया — भूतिया मिर्च पुलाव! ️
राजू ने काँपते हुए खाया…
और आँखों से धुआँ निकलने लगा!
लेकिन उसने कहा — “प्यार में तीखापन चलेगा, झूठ नहीं!”
तुरंत बिजली वापस आई, और दीवार चमकी —
“टेस्ट पास्ड!” ✨
अगली सुबह…
होटल का बिल आया —
“कमरा: ₹0, डर: फ्री, प्यार: अनलिमिटेड।”
राजू और टिफ़िन देवी पहाड़ों से नीचे उतरे,
राजू बोला — “अब अगला ट्रिप कहाँ?”
वो बोली — “अगली बार ऑफिस की स्पूकी पार्टी में चलेंगे — सब पुराने भूतों से मिलवाना है।”
सीख:
अगर प्यार सच्चा हो,
तो हनीमून इन हॉंटेड हिल्स भी स्वर्ग बन जाता है! ️

पार्ट 7 — “राजू और टिफ़िन देवी: ऑफिस में वापसी (भूतिया बेबी ऑन बोर्ड!)”
छुट्टियों के बाद राजू और टिफ़िन देवी वापस ऑफिस लौटे।
ऑफिस वालों ने पूछा —
“कैसा रहा हनीमून?”
राजू बोला — “मज़ेदार, बस वेटर बार-बार हवा में उड़ जाता था।”
बॉस मुस्कुराए — “राजू, अब तू तो रिटर्न हुआ, पर ये साथ में कौन-सा नया इनविज़िबल प्रोजेक्ट लाया है?”
राजू ने शर्माते हुए कहा —
“सर… हम एक्सपेक्टिंग हैं…”
सब बोले — “मतलब?!”
राजू बोला — “भूतिया बेबी ऑन बोर्ड!”
ऑफिस में नए सीन शुरू…
अब ऑफिस की लाइट अपने आप जलती-बुझती,
कंप्यूटर अपने आप “Google: baby lullabies for ghosts” खोल देता,
और प्रिंटर हर सुबह निकालता —
“बॉस इज़ द बेस्ट!”
राजू बोला — “देवी! बच्चे को ऑफिस का माहौल मिल गया है!”
फिर आया ट्विस्ट
एक दिन बॉस ने कहा —
“राजू, हमें कंपनी के भविष्य का चेहरा चाहिए… कोई ऐसा जो सबको डराए और खुश भी करे।”
राजू बोला — “सर, मेरे पास परफेक्ट कैंडिडेट है।”
और अगले ही पल बेबी की किलकारी गूँज उठी —
“गू गा… भूंऊऊऊं!”
पूरा ऑफिस काँप गया।
फिर बेबी ने टिफ़िन खोलकर बोला —
“पापा, रायता कहाँ है?”
बॉस बोले — “राजू, तुम्हारा बच्चा तेरे जैसा ही निकला — डरावना और भूखा।”
राजू बोला — “सर, कंपनी के लिए नेक्स्ट जनरेशन टैलेंट!”
“बेबी डे” इन ऑफिस
अब हर शुक्रवार “बेबी डे” होता है —
लाइट्स अपने आप जलती हैं, फाइलें अपने आप उड़ती हैं,
और सब स्टाफ डरते नहीं, बल्कि कहते —
“राजू के बच्चे ने फिर माउस क्लिक कर दिया!”
राजू गर्व से कहता —
“हमारा फैमिली बिज़नेस यही है — डिजिटल वर्क्स और स्पिरिचुअल फीलिंग्स!”
एपिलॉग (अंत)
राजू, टिफ़िन देवी और छोटा “घोस्टू” अब खुशहाल परिवार हैं।
उनका नया टिफ़िन ब्रांड लॉन्च हुआ है —
“भूत–फ्रेश फूड्स: खाने में स्वाद, डर में प्यार!”
बॉस उनके ब्रांड एम्बेसडर बन गए,
और ऑफिस की दीवार पर लिखा है —
“जय टिफ़िन देवी परिवार की!” ❤️
सीख:
अगर प्यार सच्चा हो,
तो ऑफिस की फाइलें भी उड़ने लगती हैं… और प्रमोशन अपने आप मिल जाता है!
