Author: Surendra Rajput

  • आँखों को स्वस्थ रखना है तो क्या खाएं

    आँखों को स्वस्थ रखना है तो क्या खाएं

    आज हमने श्रेया आई सेंटर (Shreya Eye Centre) के डायरेक्टर और सीनियर आई सर्जन (Eye Surgeon) डॉ. राकेश गुप्ता (Dr. Rakesh Gupta) से आखों को स्वस्थ रखने के सम्बन्ध में बात की. उनके बताये हुए टिप्स (Eye Care Tips) से आपकी आंखें स्वस्थ रहेंगी. बस आदतें और अपने खान-पान में थोड़ा सा बदलाव लाने की जरूरत है.

    Smoking

    अपनी आदतों में थोड़ा सुधार लाएं:

    • धूम्रपान बंद करें (Quit Smoking): धूम्रपान सिर्फ आपके आँखों के लिए ही नहीं बल्कि शरीर के लिए भी घातक है, इसलिए धूम्रपान को तुरंत ना कहें.
    • सनग्लासेस: सनग्लासेस आजकल फैशन ट्रेंड्स में शामिल हैं. अतः धूप में निकलते समय अच्छे UV – प्रोटेक्शन वाले चश्मे पहनकर निकलें जो अल्ट्रावॉयलेट किरणों से आपकी आँखों को सुरक्षा प्रदान करेंगे.
    • 20:20 नियम को नियमित करें (20:20 Rule): अगर आप अपना बहुत समय कम्प्यूटर या मोबाइल के सामने व्यतीत करते हैं तो आपको आँखों में दर्द और भारीपन की समस्या आ सकती है. इसलिए जब आप कम्प्यूटर पर काम कर रहे हों तो हर 20 मिनट के बाद 20 सेकेण्ड के लिए कम्प्यूटर स्क्रीन छोड़कर दूर किसी चीज पर अपनी आँखों को फोकस करें. इससे आपकी आँखों को थोड़ा आराम मिलेगा.
    • वजन कंट्रोल में रखें (Weight Control): आपके गलत लाइफस्टाइल की वजह से आपका वजन बढ़ सकता है जो आपको मधुमेह (डाइबिटीज) का रोगी बना सकता है. और मधुमेह की वजह से आपकी आँखों पर गहरा प्रभाव पड़ता है जिससे आपकी आँखों की रौशनी कम हो सकती है.

    Fish for Healthy Eyes

    खान – पान में थोड़ा सुधार लाएं:

    आपका खान-पान सिर्फ आपके शरीर को ही नहीं बल्कि आँखों के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है. इसलिए विटामिन A , C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाना खाएं जो आपकी आँखों की रौशनी को सही रखता है. आइये देखते हैं की आपको किस तरह का और क्या क्या खाना चाहिए-

    • मछली (Fish): ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acids) का अच्छा सोर्स है जो आपकी आँखों की रौशनी बढ़ने के लिए बहुत ही जरूरी है. सालमोन, टूना, ट्राउट और सार्डिनेस मछलियों में ओमेगा-३ अच्छी मात्रा में पाया जाता है. वैज्ञानिकों ने साबित किया है की मछली का तेल मोतियाबिंद और मैकुलर डिजनरेशन को ठीक कर सकता है. लेकिन अगर आप शाकाहारी हैं तो आपको ओमेगा-3 के सप्लीमेंट्स लेना चाहिए.
    • हरी पत्तेदार सब्जियां (Green Vegetables): ये नुट्रिएंट्स का अच्छा सोर्स हैं जो आँखों के लिए काफी लाभप्रद है.पत्ता-गोभी, पालक के आलावा अवोकाडो, मटर, ब्रोकोली भी एंटी-ऑक्सीडेंट्स प्रदान करते हैं.

    Food for Healthy Eyes

    • आंवला: इसमें मौजूद तत्व आंखों की रोशनी को बरकरार रखने में मददगार होते हैं. कच्चे आंवले को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है या फिर सुबह खाली पेट आंवले का रस पीना या फिर आंवले का मुरब्बा खाना भी फायदेमंद हो सकता है.
    • जामुन: जामुन भी विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत माना जाता है. इसमें पाया जाने वाला विटामिन सी आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है.
    • इलायची: इसके नियमित सेवन से आंखों को ठंडक मिलती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है. इलायची और सौंफ का पाउडर ठंडे दूध में मिलाकर पीने से आंखों की रोशनी बढ़ सकती है.
    • डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध और दही जैसे डेयरी उत्पादों में विटामिन ए और जिंक पाया जाता है, जो आपको कमजोर नजर और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों से बचाने में मदद करता है इसलिए इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
    • बादाम: आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। रात को पानी में बादाम भिगोकर सुबह खाएं। इससे आंखों की रोशनी अच्छी हो जाती है और याददाश्त भी बढ़ती है। बादाम में सौंफ और मिश्री को पीसकर भी खा सकते हैं।

    Nuts for Healthy Eyes

    • शकरकंद और खट्टे फल: विटामिन C और E आपकी आँखों के लिए बहुत ही जरूरी हैं.अतः अपने खाने में शकरकंद, संतरे, मौसमी इत्यादि को जरूर खाएं.
    • अंडा: अंडे ज़िंक, विटामिन C और E का अच्छा सोर्स हैं और आँखों के लिए बहुत ही हेल्दी होते हैं.
    • गाजर: गाजर में विटामिन A भरपूर मात्रा में पाया जाता है. गाजर को कच्चा या सलाद के साथ खा सकते हैं.
    • शिमला मिर्च: विटामिन C से भरपूर आपकी आँखों में रक्त संचार को सही रखता है.
    • बीज और ड्राई फ्रूट्स: विटामिन E से भरपूर बीज और सूखे मेवे मैकुलर-डिजनरेशन (Macular Degeneration) और कैटरैक्ट (Cataract) को रोकने में मदद करते हैं.
    • साबुत अनाज: ब्राउन राइस और साबुत गेंहूं ज़िंक और विटामिन E से भरपूर होते हैं जो आँखों के लिए बेहद लाभप्रद हैं.

    अपने खाने में थोड़ा सा सुधार करके आप अपनी आखों को अच्छी रोशनी प्रदान कर सकते हैं. साथ ही आपको समय-समय पर अपनी आँखों का चेक-अप (Eye Checkup) कराते रहना चाहिए ताकि उम्र बढ़ने पर आखों की रौशनी सही सलामत रहे.

    अगर आपको आँखों से सम्बंधित कोई समस्या (Eye Problems) है तो इस लिंक पर क्लिक करके आप अपने फ़ोन नंबर के साथ समस्या बताएं. श्रेया आई सेंटर के स्पेसलिस्ट (Eye Specialists) आपकी समस्यांओ का अवश्य निदान करेंगे.

  • किसानों को झटका – फसल, ट्रैक्टर ऋण पर अनुग्रह राहत भुगतान योजना का लाभ नहीं मिलेगा

    किसानों को झटका – फसल, ट्रैक्टर ऋण पर अनुग्रह राहत भुगतान योजना का लाभ नहीं मिलेगा

    नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कृषि और संबद्ध गतिविधियों से संबंधित ऋण के लिए चक्रवृद्धि ब्याज यानी ब्याज-पर-ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

    वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को ‘चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के बीच के अंतर के भुगतान से संबंधित ‘अनुग्रह राहत भुगतान योजना’ पर अतिरिक्त एफएक्यू (बार-बार पूछे जाने वाले सवाल) जारी किया है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि कर्जदारों को 29 फरवरी तक क्रेडिट कार्ड पर बकाये के लिए भी इस योजना का लाभ मिलेगा।

    एफएक्यू में कहा गया है कि इस राहत के लिए बेंचमार्क दर अनुबंध की दर होगी, जिसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता द्वारा ईएमआई ऋणों कें लिए किया जाता है।

    वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत कुल आठ क्षेत्र आते हैं। फसल और ट्रैक्टर ऋण कृषि और संबद्ध गतिविधियों के तहत आता है जो इस योजना में शामिल नहीं है।

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी कर्जदाता संस्थानों से मंगलवार को कहा था कि वे दो करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिये हाल ही में घोषित ब्याज पर ब्याज की माफी योजना को लागू करें।

    इस योजना के तहत दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज के ऊपर लगने वाला ब्याज एक मार्च, 2020 से छह महीने के लिये माफ किया जायेगा।

    सरकार ने पिछले शुक्रवार को पात्र ऋण खातों के लिये चक्रवृद्धि ब्याज और साधारण ब्याज के बीच के अंतर के भुगतान को लेकर छह माह के लिए अनुग्रह या अनुदान की घोषणा की थी। सरकार ने सभी बैंकों को पांच नवंबर तक चक्रवृद्धि ब्याज व साधारण ब्याज के अंतर को कर्जदारों के खाते में जमा करने के लिये कहा था।

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा – पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • कर्जदारों को तोहफा: किस्त भुगतान से राहत नहीं चुनने वालों को भी दो करोड़ तक के कर्ज पर ब्याज लाभ

    कर्जदारों को तोहफा: किस्त भुगतान से राहत नहीं चुनने वालों को भी दो करोड़ तक के कर्ज पर ब्याज लाभ

    नयी दिल्ली, 24 अक्टूबर (भाषा) केंद्र सरकार ने कर्जदारों को बड़ी राहत दी है। उन्हें एक तरह से दिवाली का उपहार तोहफा देते हुए उनके दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज-राहत देने की शुक्रवार को देर रात घोषणा की। यह राहत इस सीमा के तहत आने वाले सभी कर्जदारों को मिलेगा, चाहे उन्होंने किस्त भुगतान से छह महीने की मोहलत (मोरेटोरियम) का विकल्प चुना हो या नहीं।

    उच्चतम न्यायालय द्वारा ब्याज राहत लागू करने का निर्देश दिये जाने के बाद वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने इस योजना को लागू करने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए।

    इस निर्णय से सरकारी खजाने पर 6,500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ने का अनुमान है।

    शीर्ष अदालत ने 14 अक्टूबर को केंद्र को निर्देश दिया था कि वह कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के मद्देनजर रिजर्व बैंक की किस्तों के भुगतान से छूट की योजना के तहत दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ब्याज माफ करने के बारे में यथाशीघ्र निर्णय ले।

    न्यायालय ने कहा था कि आम लोगों की दिवाली अब सरकार के हाथों में है।

    मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार विनिर्दिष्ट ऋण खातों पर एक मार्च से 31 अगस्त 2020 की अवधि के लिये ब्याज राहत का लाभ दिया जाएगा। इसमें कहा गया, ‘‘जिन कर्जदारों के ऋण खाते की मंजूर सीमा या कुल बकाया राशि 29 फरवरी तक दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं थी, वे इस योजना के लाभ के पात्र होंगे।’’

    दिशानिर्देश की शर्तों के अनुसार, 29 फरवरी तक इन खातों का मानक होना अनिवार्य है। मानक खाता उन खाताओं को कहा जाता है, जिन्हें गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) नहीं घोषित किया गया हो।

    इस योजना के तहत आवास ऋण, शिक्षा ऋण, क्रेडिट कार्ड का बकाया, वाहन ऋण, एमएसएमई ऋण, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद ऋण और उपभोग ऋण लेने वाले कर्जदारों को लाभ मिलेगा।

    योजना के तहत, कर्ज देने वाले संस्थानों को योजना की अवधि के लिये पात्र कर्जदारों के संबंधित खातों में संचयी ब्याज व साधारण ब्याज के अंतर की राशि जमा करनी होगी। योजना में कहा गया है कि कर्जदार ने रिजर्व बैंक के द्वारा 27 मार्च 2020 को घोषित किस्त भुगतान से छूट योजना का पूर्णत: या अंशत: लाभ ल्रने का विकल्प चुना हो यह नहीं, उसे ब्याज राहत का पात्र माना जायेगा।

    कर्ज राहत योजना का लाभ उन कर्जधारकों को भी मिलेगा, जो नियमित किस्तों का भुगतान करते रहे।

    कर्ज देने वाले संस्थान इस योजना में दी गयी छूट के तहत संबंधित कर्जधारक के खाते में अपनी ओर से धन जमा करने के बाद केंद्र सरकार से उसके बराबर की राशि पाने के लिये दावा करेंगे।

    उच्चतम न्यायालय ने 14 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, वह इस बारे में चिंतित है कि कर्जदारों को ब्याज राहत का लाभ किस तरह से दिया जाये। उच्चतम न्यायालय ने तब कहा था कि केंद्र सरकार ने आम लोगों की बदहाल स्थिति का संज्ञान लेते हुए अच्छा निर्णय लिया है। हालांकि शीर्ष न्यायालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि अब तक इस संबंध में कोई आदेश नहीं जारी किया गया है।

    न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अगुवाई वाली पीठ ने कहा था, ‘‘कुछ ठोस किये जाने की जरूरत है। जितना जल्दी संभव हो सके, दो करोड़ रुपये तक के कर्जदारों को ब्याज से राहत देने की योजना का क्रियान्वयन किया जाना चाहिये।’’

    उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख दो नवंबर तय करते हुए बैंकों तथा केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे वकीलों से कहा था, ‘लोगों की दिवाली अब आपके हाथों में है।’

    डिसक्लेमर: यह आर्टिकल भाषा – पीटीआई न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान का लोकार्पण: लखनऊ

    सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान का लोकार्पण: लखनऊ

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राज्य की राजधानी लखनऊ में एक सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान और दो पुलों का लोकार्पण किया।

    राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि डिजिटल माध्यम से हुए इस लोकार्पण कार्यक्रम में लखनऊ से सांसद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दिल्ली से और मुख्यमंत्री योगी लखनऊ से जुड़े।

    मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि कोविड—19 महामारी काल का सबसे बड़ा सबक यह है कि हमें अपने यहां स्वास्थ्य सुविधाओं में बहुत सुधार लाना होगा।

    उन्होंने कहा कि टाटा ट्रस्ट की मदद से लखनऊ में स्थापित इस कैंसर संस्थान से राज्य में कैंसर के मरीजों को सर्वश्रेष्ठ सुविधा मिलेगी। शुरुआत में इसमें 54 बिस्तर होंगे, जिन्हें बढ़ाकर पहले 750 और फिर 1,250 किया जाएगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य के सर्वांगीण विकास के लिये मुख्यमंत्री योगी द्वारा उठाये जा रहे कदमों की सराहना की।

    केन्द्र की तरफ से हर सम्भव मदद का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ को एक महानगर बनाने के लिये मूलभूत ढांचा विकसित करने की सख्त जरूरत है।

    इस मौके पर हुसैनगंज—डीएवी कॉलेज—राजेन्द्र नगर मार्ग और हैदरगंज—मीना बेकरी राजाजीपुरम में दो पुलों का भी लोकार्पण किया गया।

    कैंसर संस्थान का निर्माण 77 एकड़ क्षेत्र में किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 810 करोड़ रुपये है। इस संस्थान की नींव पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखी थी।

    Source: PTI – Bhasha

  • देश में साइकिलों की रिकार्ड बिक्री, पसंदीदा साइकिल के लिए करना पड़ रहा है इंतजार

    देश में साइकिलों की रिकार्ड बिक्री, पसंदीदा साइकिल के लिए करना पड़ रहा है इंतजार

    दुनिया में साइकिल के प्रमुख बाजार भारत में पिछले पांच महीने में साइकिलों की बिक्री लगभग दोगुना हो गयी है और कई शहरों में लोगों को अपनी पसंद की साइकिल खरीदने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

    जानकारों के अनुसार देश में पहली बार लोगों का साइकिल को लेकर ऐसा रुझान देखने को मिला है और इसकी एक बड़ी वजह कोरोना महामारी के बाद लोगों का अपनी सेहत को लेकर सजग होना भी है।

    एक अनुमान के अनुसार भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल विनिर्माता देश है।

    साइकिल विनिर्माताओं के राष्ट्रीय संगठन एआईसीएमए के अनुसार मई से सितंबर 2020 तक पांच महीनों में देश में कुल 41,80,945 साइकिल बिक चुकी हैं।

    आल इंडिया साइकिल मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन (एआईसीएमए) के महासचिव केबी ठाकुर कहते हैं कि साइकिलों की मांग में बढोतरी अभूतपूर्व है। शायद इतिहास में पहली बार साइकिलों को लेकर ऐसा रुझान देखने को मिला है। उन्होंने बताया, ‘‘इन पांच महीनों में साइकिलों की बिक्री 100 प्रतिशत तक बढ़ी है। कई जगह लोगों को अपनी पंसद की साइकिल के लिए इंतजार करना पड़ रहा हैं, बुकिंग करवानी पड़ रही है।’’

    संगठन ने बताया कि आंकड़ों के अनुसार कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद लॉकडाउन के कारण अप्रैल महीने में देश में एक भी साइकिल नहीं बिकी। मई महीने में यह आंकड़ा 4,56,818 रहा। जून में यह संख्या लगभग दोगुनी 8,51,060 हो गयी जबकि सितंबर में देश में एक महीने में 11,21,544 साइकिल बिकीं। बीते पांच महीने में कुल मिलाकर 41,80,945 साइकिल बिक चुकी हैं।

    ठाकुर कहते हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी ने लोगों को अपनी सेहत व इम्युनिटी को लेकर तो सजग बनाया ही वह सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर सचेत हुए हैं। ऐसे में साइकिल उनके लिए ‘एक पंथ कई काज’ साधने वाले विकल्प के रूप में सामने आई है।

    उन्होंने बताया कि अनलॉक के दौरान सड़कों पर वाहनों की संख्या व प्रदूषण में कमी के कारण भी लोग साइक्लिंग को लेकर प्रोत्साहित हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ज्यादा लोग पहली बार साइकिल खरीद रहे हैं।

    जयपुर में आनंद साइकिल स्टोर के गोकुल खत्री कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद साइकिलों की बिक्री 15 से लेकर 50 प्रतिशत बढ़ी है। वे कहते हैं कि लोग जरूरी काम निपटाने के साथ साथ वर्जिश के लिहाज से भी साइकिल खरीद रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह सेहत ठीक रखने का यह सबसे सस्ता, सुंदर व टिकाउ जरिया है।

    मानसरोवर के एक अन्य दुकानदार के अनुसार इस समय सबसे अधिक बिक्री 10,000 रुपये या इससे आपपास मूल्य की ऐसी साइकिलों की है जिन्हें ‘रफ टफ’ इस्तेमाल किया जा सके।

    कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू किए गए लॉकडाउन के चलते विनिर्माण को लेकर चुनौतियां भी आईं।

    एक प्रमुख साइकिल कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘अनलॉक शुरू होते ही जहां साइकिलों की मांग में उछाल आया, वहीं मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन करना मुश्किल हो रहा था। हालांकि बीते पांच महीने में हमने हालात काबू में कर लिए हैं और अब उत्पादन सामान्य स्तर की ओर जा रहा है।’’ उन्होंने बताया कि कई जगह पर कुछ विशेष मॉडल की साइकिल अभी भी स्टॉक में नहीं हैं, खासतौर से गियर वाली साइकिलें। उन्होंने कहा कि यह कमी जल्द दूर हो जाएगी।

    डिस्क्लेमर– यह आर्टिकल PTI न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • कोरोना वायरस से उपचार के बाद ‘सुपरमैन’ की तरह महसूस कर रहा हूं: ट्रम्प

    कोरोना वायरस से उपचार के बाद ‘सुपरमैन’ की तरह महसूस कर रहा हूं: ट्रम्प

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह कोविड-19 से संक्रमित होने के उपरांत प्रयोगात्मक उपचार के बाद ‘‘सुपरमैन’’ (बहुत ताकतवर) की तरह महसूस कर रहे हैं और इस उपचार ने बीमारी के खिलाफ उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर दी है।

    अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 2,16,000 अमेरिकियों की मौत हो चुकी है।

    सुपरमैन एक काल्पनिक महानायक है।

    ट्रम्प एक अक्टूबर को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे और उन्हें तीन रात एवं चार दिन के लिए एक सैन्य अस्पताल में भर्ती किया गया था। ट्रम्प ने एक प्रयोगात्मक एंटीबॉडी दवा के मिश्रण से उपचार के बाद स्वयं को स्वस्थ घोषित किया था।

    व्हाइट हाउस के चिकित्सकों ने उन्हें चुनावी रैली में भाग लेने की अनुमति दे दी है।

    ट्रम्प ने पेन्सिलवेनिया में चुनावी रैली में मंगलवार को कहा, ‘‘मुझे यह पता है कि मैंने कुछ (दवा) ली, जिसके बाद मैं बहुत जल्द ठीक हो गया। मुझे नहीं पता कि यह क्या था। यह एंटीबॉडी दवा थी। मुझे नहीं पता। मैंने इन्हें लिया और मुझे सुपरमैन की तरह महसूस हो रहा है।’’

    राष्ट्रपति ने उनका उपचार करने वाले चिकित्सकों को धन्यवाद दिया।

    ट्रम्प ने अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में कहा, ‘‘अब मुझमें रोग प्रतिरोधक क्षमता है। मैं नीचे आकर किसी को भी चूम सकता हूं।’’

    साभार: भाषा

  • Ram Vilas Paswan: ‘सदाबहार’ रामविलास पासवान की कुछ बातें, जिन्होंने 6 प्रधानमंत्रियों के साथ किया काम

    Ram Vilas Paswan: ‘सदाबहार’ रामविलास पासवान की कुछ बातें, जिन्होंने 6 प्रधानमंत्रियों के साथ किया काम

    रामविलास पासवान का निधन

    रामविलास पासवान के निधन ने बिहार की राजनीति में एक अध्याय का अंत कर दिया है। रामविलास वो नेता थे जिन्होंने गरीबी से अपना सफर तय किया और आखिर में ऐसे-ऐसे रिकॉर्ड बनाकर गए हैं जो शायद कोई और नेता न बना पाए। देखिए उनके सफर पर हमारी ये खास रिपोर्ट

    चिराग पासवान ने ट्वीट कर दी जानकारी

    केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) का गुरुवार को निधन हो गया। वह पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 74 वर्षीय रामविलास पासवान की कुछ दिनों पहले ही दिल की सर्जरी भी हुई थी। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन की सूचना उनके बेटे और लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘पापा….अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं।’ चिराग पासवान ने ट्वीट कर पिता रामविलास पासवान के साथ बचपन की एक तस्वीर भी शेयर की। बता दें कि पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती रामविलास पासवान का फोन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हालचाल लिया था।

    गरीबी से मंत्री बनने का सफर

    रामविलास पासवान देश के ऐसे राजनेता रहे जिन्हें जानने समझने की जरूरत है। क्योंकि वह एक ऐसे परिवार से निकले जहां काफी आर्थिक तंगी थी। दलित समाज के इस बड़े नेता के राजनीति में आने का भी दिलचस्प किस्सा है। बिहार में आज तक सरकारी नौकरी का काफी क्रेज है। खासकर शासन और प्रशासन की नौकरी के लिए युवा काफी प्रयासरत रहते हैं।

    सरकारी नौकरी में जाना चाहते थे

    युवा अवस्था में रामविलास पासवान भी शासन प्रशासन में जाना चाहते थे। उसी उम्र में वे सोचते थे कि अगर उन्हें अपने समाज का उत्थान करना है तो सत्ता का पावर हासिल करना जरूरी है। उनके गांव और परिवार के लोग बताते हैं कि 1969 के मध्यावधि चुनाव की हलचल थी। खगड़िया जिले के अलौली विधानसभा सीट से प्रत्याशी की तलाश हो रही थी। उस दौर में खगड़िया के इलाके में समाजवादियों की संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी प्रसिद्धि पा रही थी।

    यूपीएससी क्रैक कर बन रहे थे डीएसपी

    उसी दौरान यहीं के रहने वाले दलित युवक रामविलास पासवान डीएसपी की लिखित और फिजिकल परीक्षा पास होकर ट्रेनिंग में जाने की तैयारी कर रहे थे। उस दौर में रामविलास पासवान काफी दुबले थे। सरकारी नौकरी हो गई थी इसलिए परिवार के लोग काफी खुश थे। पिता ने नौकरी ज्वाइन करने से पहले शरीर की हालत थोड़ी ठीक करने की सलाह दी। इसके लिए पिता ने रामविलास पासवान को कुछ पैसे भी दिए।

    लेकिन नौकरी ज्वाइन नहीं की

    नौकरी ज्वाइन करने के बाद ना जाने कब छुट्टी मिलेगी इस बात को सोचते हुए रामविलास पासवान वे अपने रिश्तेदारों से मिलने बेगुसराय चले गए। यहीं पर उनकी मुलाकात कुछ समाजवादियों से हुई। उन दिनों समाजवादियों को अलौली विधानसभा सीट पर शिक्षित युवा की तलाश थी। युवा रामविलास की प्रतिभा देखकर उन्होंने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया।

    समाज की भलाई के लिए राजनीति में रखा कदम

    बड़ी मशक्कत के बाद रामविलास पासवान को नौकरी मिली थी, इस वजह से उनका मन डगमगा रहा था। वह राजनीति में नहीं जाना चाहते थे। लेकिन समाजवादी नेताओं ने उन्हें समझाया कि राजनीति में जाओगे तो केवल अपना ही नहीं पूरे समाज का भला कर पाओगे। यह बात रामविलास पासवान को अंदर तक झकझोर गई। उन्होंने डीएसपी की नौकरी ज्वाइन नहीं की और अलौली विधानसभा सीट से चुनाव में उतर गए।

    पहली बार में ही कांग्रेस के नेता को पटखनी दी

    संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी एसएसपी ने रामविलास पासवान को चुनाव के मैदान में उतारा। सामने कांग्रेस के नेता मिश्री सदा थे। प्रचार के मामले में रामविलास पासवान मिश्री से काफी पीछे थे क्योंकि इनके पास पैसों की किल्लत थी। जैसे तैसे साइकिल से पूरा चुनाव प्रचार किया गया। हालांकि चुनाव परिणाम आने पर उनका फैसला सही साबित हुआ और वह विधायक बन गए। पासवान को 20330 वोट आये, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के मिश्री सदा को 19424 वोट मिले थे। इस तरह रामविलास पासवान की राजनीति में लॉन्चिंग हो गई।

    11 चुनाव लड़े हैं पासवान

    केंद्रीय मंत्री रहे रामविलास पासवान अपने सियासी करियर में 11 चुनाव लड़ चुके हैं। 11 में से अभी तक वह 9 चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। बिहार में पासवान जाति में उनकी अच्छी पकड़ है। रामविलास से सियासी अदावत की वजह से नीतीश कुमार ने पासवान जाति को महादलित में नहीं शामिल किया था।

    लालू, रामविलास और नीतीश… एक ही पेड़ के पत्ते कहे जा सकते हैं। तीनों में एक बात समान है कि सबने गरीबी से संघर्ष शुरू किया और आखिर में उस मुकाम को हासिल किया जिसका सपना हर नेता देखता है। रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 को खगड़िया के सुदूर देहात शहरबन्नी में हुआ था। पिता जामुन पासवान की तीन संतानों में रामविलास सबसे बड़े थे, उसके बाद पशुपति पारस और रामचंद्र पासवान। पिता ने तीनों भाइयों को काफी गरीबी में पाला था, लेकिन रामविलास शुरू से ही जुझारु थे, उन्होंने शहरबन्नी से स्कूली पढ़ाई करने के बाद एमए और एलएलबी कर लिया।

    जब रामविलास बन रहे थे DSP

    इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की न सिर्फ तैयारी की बल्कि उसे क्रैक भी किया। रामविलास का चयन डीएसपी के पोस्ट के लिए हुआ था। लेकिन शायद उन्हें कहीं और जाना था। जब उनका चयन यूपीएससी में हुआ तभी वह समाजवादी नेता राम सजीवन के संपर्क में आए और राजनीति का रुख कर लिया। 1969 में वह अलौली विधानसभा से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और विधानसभा पहुंचे। इसके बाद पासवान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद 1974 में वो राज नारायण और जेपी के प्रबल अनुयायी के रूप में लोकदल के महासचिव बने। वे व्यक्तिगत रूप से राज नारायण, कर्पूरी ठाकुर और सत्येंद्र नारायण सिन्हा जैसे आपातकाल के प्रमुख नेताओं के करीबी भी रहे।

    दो बार की है शादी

    उनकी शादी 1960 में राजकुमारी देवी के साथ हुई थी। बाद में 1981 में राजकुमारी देवी को तलाक देकर उन्होंने दूसरी शादी 1983 में रीना शर्मा से की। उनकी दोनों पत्नियों से तीन पुत्रियां और एक पुत्र है। उन्होंने कोसी कॉलेज, खगड़िया और पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने एमए और लॉ ग्रेजुएट की डिग्री ली।

    5 दशक तक देश की राजनीति, दो बार रिकॉर्डतोड़ जीत और 6 बार केंद्र में मंत्री

    रामविलास पूरे पांच दशक तक बिहार और देश की राजनीति में छाये रहे। इस दौरान दो बार उन्होंने लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक मतों से जीतने का विश्व रिकॉर्ड भी बना डाला। उनके नाम एक और रिकॉर्ड भी है जो शायद कोई और नेता न बना पाए और वो ये कि रामविलास देश के 6 प्रधानमंत्रियों की कैबिनेट में मंत्री रहे। सियासत में आगे क्या होनेवाला है, इसे रामविलास समय से पहले ही भांप जाते थे। इसी लिए RJD सुप्रीमो लालू यादव ने उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक तक करार दे दिया था। बानगी के तौर पर वो केंद्र में 6 बार मंत्री बने।

    6 प्रधानमंत्रियों के साथ किया काम

    रामविलास पासवान ने सियासी करियर में 6 प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है। पहली बार वह 1989 में वीपी सिंह की सरकार में मंत्री बने थे। दूसरी बार 1996 में देवगौड़ा और गुजराल सरकार में वह रेल मंत्री बने थे। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रामविलास पासवान संचार मंत्री थे। 2004 में वह यूपीए से जुड़े और मनमोहन सरकार में रसायन मंत्री बने थे। 2014 में एनडीए में शामिल हुए और नरेंद्र मोदी की सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री बने।

    • 1989 में पहली बार केन्द्रीय श्रम मंत्री
    • 1996 में रेल मंत्री
    • 1999 में संचार मंत्री
    • 2002 में कोयला मंत्री
    • 2014 में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री
    • 2019 में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री

    2002 में सबको चौंकाया

    दरअसल, रामविलास पासवान एनडीए सरकार में मंत्री थे। 2002 के गुजरात दंगों को लेकर रामविलास पासवान ने सरकार से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद लोग हैरान रह गए थे। 12 साल बाद 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार में वह केंद्रीय मंत्री बनें।

    2005 में सत्ता की चाभी

    रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी को पहली बार 2005 में सम्मानजनक सीटें मिली थीं। किसी भी दल की सरकार रामविलास पासवान के मदद के बिना नहीं बन सकती थी। लेकिन रामविलास पासवान मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग को लेकर अड़े हुए थे। उनकी मांग पर जेडीयू और आरजेडी तैयार नहीं थी। उसके बाद 2005 अक्टूबर में फिर से विधानसभा चुनाव हुआ है। रामविलास पासवान को मुंह की खानी पड़ी।

    जेल भी गए पासवान

    रामविलास पासवान जेपी को अपना आदर्श मानते रहे हैं। छात्र जीवन से वह समाजवादी आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते रहे हैं। 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। साल भर से ज्यादा वक्त उन्होंने जेल में गुजारी थी। 1977 में रामविलास पासवान को जेल से रिहा किया गया था।

    गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में नाम

    रामविलास पासवान का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में भी दर्ज है। वह 1977 में जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर रेकॉर्ड मतों से हाजीपुर लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी।

    2000 में किया एलजेपी का गठन

    रामविलास पासवान ने विभिन्न दलों में रह कर अपने सियासी करियर पंख दिया है। इस दौरान वह लोक दल, जनता पार्टी-एस, समता दल, समता पार्टी और फिर जदयू में रहे हैं। उसके बाद 28 नवंबर 2000 को उन्होंने दिल्ली में अपनी अलग पार्टी बना ली थी। नाम लोक जन शक्ति पार्टी रखा था। यह पार्टी बिहार से ज्यादा केंद्र में ही सत्ता में रही है।

    सोशल मीडिया पर रहते थे एक्टिव

    मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद रामविलास पासवान सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते थे। वह अपने विभागीय कार्यों से लोगों को अवगत कराते रहते थे। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर उन्हें लाखों लोग फॉलो करते हैं।

    बेटे को सौंप दी जिम्मेदारी

    रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार चल रहे थे। अस्वस्थ रहने की वजह से वह राजनीति में सक्रिय नहीं रहते थे। इसलिए उन्होंने पार्टी की जिम्मेदारी बेटे चिराग पासवान को सौंप दी थी। अब चिराग ही पार्टी को संभाल रहे थे। बिहार चुनाव में चिराग पासवान ने एनडीए से अलग होकर लड़ने का फैसला किया है।

    LJP से पहले पासवान ने बनाई थी दलित सेना

    1975 में जब देश में इमरजेंसी का ऐलान किया गया तो रामविलास भी गिरफ्तार कर लिए गए। 1977 में जेल से छूटने के बाद उन्होंने जनता पार्टी की सदस्यता ले ली और पहली बार हाजीपुर से संसद पहुंचे। इस दौरान रामविलास ने सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड ही बना दिया। LJP तो काफी बाद में बनी लेकिन 1983 में ही रामविलास दलित सेना की स्थापना कर दी। राजनीति में रहते हुए उनके दो ऐसे फैसले थे जो आगे चलकर मील का पत्थर साबित हुए। इसमें पहला फैसला हाजीपुर में रेलवे का जोनल कार्यालय खुलवाना था जबकि दूसरा फैसला केन्द्र में अंबेडकर जयंती पर छुट्टी घोषित कराने का था।

    Source: Navbharat Times

  • आज देश भर में कोरोना के खिलाफ एक अनोखा ‘जन आंदोलन’ शुरू करेंगे पीएम मोदी

    आज देश भर में कोरोना के खिलाफ एक अनोखा ‘जन आंदोलन’ शुरू करेंगे पीएम मोदी

    कोरोना के खिलाफ एक अनोखा ‘जन आंदोलन’

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी त्योहारों, ठंड के मौसम और अर्थव्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए और कोरोना के खिलाफ बचाव के सारे उपायों का पालन करते हुए देश को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस बारे में गुरुवार से एक जन आंदोलन की शुरुआत करेंगे। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की आरे से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी एक ट्वीट के जरिए इस अभियान की शुरुआत करेंगे।

    सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता बढ़ाने का अभियान

    केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना से बचाव का एकमात्र हथियार मास्क पहनना, सामाजिक दूरी का पालन करना और हाथ धोना है। उन्होंने कहा कि इसी सिद्धांत का पालन करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर इन उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के अभियान को शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, कोरोना काल में डरने की नहीं, सावधानी की आवश्यकता है। यह संदेश जन जन तक पहुंचाने के लिए जनचेतना की मुहिम चलाई जाएगी। दवा और वैक्सीन के बिना मास्क, दो गज की सुरक्षित दूरी, हाथ धोना ही सुरक्षा कवच हैं।

    ठंड के दिनों में क्या सावधानी बरतें इसकी देंगे जानकारी

    उन्होंने कहा कि जनचेतना की मुहिम के लिए लोगों के संपर्क के सभी ठिकानों पर बैनर पोस्टर लगेंगे। जावड़ेकर ने कहा कि ठंड के दिन आ रहे हैं और ठंड के दिनों में लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए और कल से इसके बारे में एक जन आंदोलन शुरू होगा।

    सर्दियों में कोरोना से कैसे बचें

    उन्होंने कहा, लोगों के संपर्क के सभी ठिकानों पर बैनर, पोस्टर और स्टीकर लगेंगे। चाहे हो हवाई अड्डा हो या बस अड्डा। ऑटो रिक्शा हो या मेट्रो या फिर पेट्रोल पंप। स्कूल-कॉलेज, आंगनबाड़ी हो बाजार या फिर पुलिस स्टेशन। जहां भी लोग काम के लिए जाते हैं, ऐसे सभी जगह स्थानों पर एक जन चेतना की मुहिम चलेगी।

    देश में कोरोना के 67 लाख से अधिक मामले

    बता दें कि भारत में कोविड-19 के मरीजों की संख्या बुधवार को 72,049 नये मामलों के साथ 67.57 लाख हो गई जबकि अभी तक 57 लाख 44 हजार 693 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। इससे ठीक होने की राष्ट्रीय औसत दर 85.02 फीसदी हो गई है।

    Source: Navbharat Times

  • योनो को अलग इकाई बनाने पर विचार कर रहा स्टेट बैंक: एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार

    योनो को अलग इकाई बनाने पर विचार कर रहा स्टेट बैंक: एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार

    मुंबई, छह अक्ट्रबर (भाषा) देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई – SBI) अपने डिजिटल प्लेटफार्म (Digital Platform) योनो को अलग इकाई बनाने के बारे में सक्रियता के साथ विचार कर रहा है। बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने यह कहा है।

    योनो (YONO) यानी ‘यू आनली नीड वन ऐप’ स्टेट बैंक की एकीकृत बैंकिंग पलेटफार्म है।

    कुमार ने सोमवार शाम एक सालाना बैंकिंग और वित्त सम्मेलन — सिबोस 2020 में कहा, ‘‘हम अपने सभी भागीदारों के साथ इस बारे में (योनो को अलग अनुषंगी बनाने) विचार विमर्श कर रहे हैं।’’ सम्मेलन का आयोजन सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंसियल टेलीकम्युनिकेशंस (स्विफ्ट) ने किया।

    कुमार ने कहा कि योनो के अलग इकाई बन जाने के बाद स्टेट बैंक उसका इस्तेमाल करने वालों में एक होगा। उन्होंने कहा, हालांकि बातचीत अभी शुरुआती दौर में है, मूल्यांकन का काम अभी लंबित है।

    रजनीश कुमार ने हाल में कहा था कि योनो का मूल्यांकन 40 अरब डालर के आसपास हो सकता है।

    कुमार ने स्पष्ट किया, ‘‘मैंने जो बयान दिया (योनो के मूल्यांकन पर) वह इस पर आधारित है कि जब मैं सभी स्टार्टअप (Startup) के मूल्य पर गौर करता हूं और उसकी तुलना करता हूं तो ऐसे में निश्चित रूप से योनो का मूल्यांकन 40 अरब डालर से कम नहीं होना चाहिये। फिलहाल इस समय हमने इसके मूल्यांकन की कोई पहल नहीं की है, मेरा मानना है कि यह संभावना है।’’

    योनो को तीन साल पहले शुरू किया गया था। इसके 2.60 करोड़ पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। इसमें रोजना 55 लाख लॉगइन होते हैं और 4,000 से अधिक व्यक्तिगत रिण आवंटन और 16 हजार के करीब योनो कृषि एग्री गोल्ड लोन दिये जाते हैं।

    कुमार ने यह भी कहा कि स्टेट बैंक खुदरा भुगतान के लिये एक नई समग्र इकाई व्यवस्था के तहत अलग डिजिटल भुगतान कंपनी स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है।

    रिजर्व बैंक ने इस साल अगस्त में एक अखिल भारतीय खुदरा भुगतान इकाई की अनुमति के लिये नियम कायदे जारी की थी। इसके लिये रिजर्व बैंक के पास आवेदन जमा कराने की अंतिम तिथि 26 फरवरी 2021 है।

    वर्तमान में देश में नेशनल पेमेंट्स कापोर्रेशन आफ इंडिया (एनपीसीआई – NPCI) एकमात्र खुदरा भुगतान इकाई है।

    साभार: भाषा

  • हाथरस गैंगरेप मामला: वो छह बड़े सवाल जिनके जवाब मिलने पर ही सुलझ सकती है पहेली

    हाथरस गैंगरेप मामला: वो छह बड़े सवाल जिनके जवाब मिलने पर ही सुलझ सकती है पहेली

    उत्तर प्रदेश के हाथरस में 14 सितंबर को हुए अनुसूचित जाति की युवती के कथित गैंगरेप और हत्या की गुत्थी और उलझती जा रही है. एक ओर जहां अब पीड़ित परिवार पर ही सवाल खड़े किए जा रहे हैं, वहीं इस घटना पर राजनीति भी तेज़ हो गई है.

    घटना के समय मृत युवती का छोटा भाई कहां था?

    इस कहानी में पीड़िता के भाई का हमनाम एक दूसरा शख़्स है जिसे पुलिस पीड़ित परिवार की शिकायत पर गिरफ़्तार कर चुकी है.

    गांव के कई लोग मीडिया में बयान देते हुए ये बात कहते हैं कि पीड़िता वीडियो में जिसका नाम ले रही है वह छोटा भाई ही है. हालांकि कोई भी ये नहीं बता पाता कि उन्होंने उसे उस दिन गांव में देखा था या नहीं.

    सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में मृत युवती का एक वीडियो वायरल हो रहा है. ये तब रिकॉर्ड किया गया था जब पीड़िता के परिजन उसे घटना के बाद थाने लेकर पहुंचे थे.

    इस वीडियो में पीड़िता कह रही है कि उसने मेरा गला दबा दिया. हाथों से गला दबाया. गला छोड़ा ना बा ने.

    जब पीड़िता से पूछा जाता है कि गला क्यों दबाया तो वो जवाब देती है, ‘जबरदस्ती ना करने दी मैंने.’

    अब इस वीडियो के आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि जिस व्यक्ति का नाम पीड़िता ले रही है वो उसका छोटा भाई है. हालांकि भाई का बीबीसी से कहना था कि घटना के समय वह नोएडा में था और दो सप्ताह तक अस्पताल में बहन के साथ ही रहा. पीड़िता के शव के साथ ही वो गांव लौटा था.

    पहली एफ़आईआर में रेप की धारा क्यों नहीं है?

    मृत युवती के बड़े भाई की ओर से थाने में दी गई पहली तहरीर में रेप का ज़िक्र नहीं है. बल्कि मुख्य अभियुक्त संदीप के उसका गला दबाकर मारने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है और इसी आधार पर एफ़आईआर भी दर्ज की गई है.

    अब ये सवाल उठ रहा है कि परिवार ने पहली एफ़आईआर में रेप की बात क्यों नहीं कही थी.

    बीबीसी ने यही सवाल जब मृत युवती की मां से किया तो उनका कहना था कि ‘बेटी उस समय सुध में नहीं थी, पूरी बात नहीं बताई. जब बाद में उसे सुध आई तो पूरी बात बताई.’

    हालांकि जब हमने उनसे अनौपचारिक बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें लोक-लाज का डर था. मृत युवती की मां ने अपने बयान में कहा है कि जब वो बाजरे के खेत में उन्हें मिली तो अर्धनग्नन और बेहोश थी.

    पुलिस ने तुरंत रेप टेस्ट क्यों नहीं कराया?

    यौन हमले की जांच के लिए पीड़िता के नमूने पहली बार 22 सितंबर को तब लिए गए जब उसने पुलिस पूछताछ में अपने साथ हुई घटना को विस्तार से बताया और चार अभियुक्तों के इसमें शामिल होने के आरोप लगाए. आगरा की फोरेंसिक लैब को ये नमूने 25 सितंबर को प्राप्त हुए.

    जब पीड़िता पहली बार थाने पहुंची थी तब पुलिस ने यौन हमले की दृष्टि से जांच क्यों नहीं की? इस सवाल पर तत्कालीन एसपी और अब निलंबित विक्रांत वीर ने बीबीसी से कहा था, ‘पीड़िता के परिवार ने जो शिकायत दी थी उसी के आधार पर एफ़आईआर दर्ज की गई. बाद में जब उसे होश आया और उसने गैंगरेप की बात कही तो 22 सितंबर को गैंगरेप की धाराएं जोड़ दी गईं और अभियुक्तों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया.’

    हालांकि जब बीबीसी ने उनसे पूछा कि पहली शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की तो उनका कहना था कि पुलिस ने सही काम किया है और सबूत जुटाने की हर संभव कोशिश की है.’

    पीड़िता जब थाने पहुंची थी तो उसकी हालत ख़राब थी, उसने अपने बयान में जबरदस्ती की कोशिश का ज़िक्र भी किया था लेकिन फिर भी पुलिस ने शुरुआत में यौन हमले की दृष्टि से मामले को क्यों नहीं देखा, इसका जवाब यूपी पुलिस को देना है.

    पुलिस ने परिवार को मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट क्यों नहीं दी?

    पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट या पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट उन्हें नहीं सौंपी. बीबीसी ने जब इस बारे में तत्कालीन एसपी विक्रांत वीर से सवाल किया था तो उनका कहना था कि रिपोर्ट अभी गोपनीय है और इसे जांच में शामिल कर लिया गया है.

    पीड़ित परिवार का ये अधिकार है कि उसे सभी मेडिकल दस्तावेज़ और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिले. पुलिस ने परिवार को रिपोर्ट क्यों नहीं दी इसका जवाब पुलिस ने नहीं दिया है.

    इसी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि फोरेंसिक सबूतों के आधार पर रेप की पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि रिपोर्ट में ज़बरदस्ती पेनिट्रेशन की कोशिश का ज़िक्र है. पुलिस ने रिपोर्ट के इस बिंदू को अपने बयान में शामिल नहीं किया था.

    जब बीबीसी ने एसपी से इस बारे में सवाल किया तो उनका कहना था, ‘जांच के इस स्तर पर ये नहीं कहा जा सकता कि पूरा घटनाक्रम क्या है, अभी जांच चल ही रही है.’

    पीड़िता के शव को रात में क्यों जलाया गया?

    पुलिस और प्रशासन का तर्क है कि शव खराब हो रहा था और मामला संवेदनशील होने की वजह से माहौल ख़राब होने का डर था.

    हालांकि परिजनों का आरोप है कि पुलिस मामले की लीपापोती करने की कोशिश कर रही थी और जल्दबाज़ी में ‘शव को नष्ट’ करना इसी कोशिश का हिस्सा हो सकता है.

    पीड़िता की भाभी ने बीबीसी से बात करते हुए पुलिस पर ‘लाश जलाकर सबूत मिटाने के आरोप लगाए थे.’

    पीड़िता के अंतिम संस्कार के बाद अब दोबारा किसी भी मेडिकल जांच की संभावना समाप्त हो गई है.

    रामू उस दिन कहां था?

    अभियुक्त रामू के परिजन और उनके समर्थन में पंचायत करने वाले ठाकुर और सवर्ण समाज के लोग ये तर्क देते हैं कि घटना के समय रामू डेयरी पर ड्यूटी कर रहा था. वो कहते हैं कि इसके सीसीटीवी सबूत उपलब्ध होंगे. लेकिन वो किसी तरह का सीसीटीवी फुटेज मुहैया नहीं करवा पाते.

    पुलिस से जब गिरफ़्तारी को लेकर सवाल किया गया तो एसपी का कहना था कि अभी पीड़िता के बयान के आधार पर गिरफ़्तारी की गई है. तकनीकी और फोरेंसिक सबूत जुटाए जा रहे हैं. किसी भी बेगुनाह को सज़ा नहीं मिलेगी.

    वहीं पीड़िता का परिवार ज़ोर देकर ये बात कहता है कि पीड़िता ने रामू का नाम लिया है, वो उसके लिए फांसी से कम कुछ भी नहीं चाहते हैं. जिस डेयरी पर रामू काम करता था उसके मालिक ने भी उसे निर्दोष बताया है लेकिन सीसीटीवी फुटेज अभी तक जारी नहीं की है.

    साभार: बीबीसी