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  • हिंदी कविता – अंतर्मन

    हिंदी कविता – अंतर्मन

    इस बदलती दुनिया में,
    पल पल होते हैं परिवर्तन.
    देखने में अच्छे लगते,
    पर सच जानता है अंतर्मन.

    परिवर्तनों के साथ जो चलता,
    गिरगिट की तरह रंग बदलता,
    वो ही जीवन में आगे बढ़ पायेगा.
    वरना भीड़ में अकेला रह जाएगा.

    अच्छा जीवन जीने को,
    क्या क्या कर रहा इंसान,
    दो वक्त की रोटी से
    संतुष्ट नहीं वो मेहनती किसान.

    आज के हालात कुछ हैं ऐसे,
    रिश्ते उन्हीं से जिनके पास हैं पैसे
    उन्हीं की होती जग में पूँछ.

    अपने बारे में जब सोचूं,
    खुद को पाती हूँ बहुत पीछे.

    इस रंग बदलती दुनिया में,
    क्या खुद को बदल पाऊँगी,
    गिरगिट बन आगे बढ़ूंगी
    या पीछे रह जाउंगी.

    इसी उलझन में वक्त गंवाकर
    असफल ही न रह जाऊं मैं.

    मेरे अवसर कोई और न चुरा ले,
    हाथ मलती न रह जाऊं मैं.

    ऊपर से दिखने वाले
    अंदर से कुछ और हैं.

    इनके सुन्दर मुखौटे के पीछे
    चेहरा बहुत कठोर है.

    पर मेरा मन एक पंछी बन
    आकाश में उड़ना चाहता है.

    दुनिया की सच्चाई जानकार
    मेरा मन घबराता है.

    लेकिन है अगर आगे बढ़ना,
    होगा मुझे इन सबसे लड़ना.

    अपना आत्म-विश्वास बढाकर
    लक्ष्य को पाने पाना है
    मुझे सफल हो जाना है.

    साभार: सुप्रिया

    रूपायन, अमर उजाला