Author: Surendra Rajput

  • अमेरिका में राष्ट्रपतियों के स्वास्थ्य को लेकर जनता को अंधेरे में रखने का लंबा इतिहास

    अमेरिका में राष्ट्रपतियों के स्वास्थ्य को लेकर जनता को अंधेरे में रखने का लंबा इतिहास

    ट्रम्प के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, दी जा रही है रेमडेसिविर थेरेपी

    कोविड-19 से संक्रमित पाए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक सैन्य अस्पताल में भर्ती किया गया है, उन्हें रेमडेसिविर थेरेपी दी जा रही है और उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। व्हाइट हाउस के चिकित्सक ने यह जानकारी दी।

    डोनाल्ड ट्रम्प और मेलनिया ट्रम्प दोनों को हुआ है कोरोना

    गौरतलब है कि ट्रम्प और प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प (50) को शुक्रवार को कोविड-19 जांच में संक्रमित पाया गया। राष्ट्रपति को सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जबकि उनकी पत्नी व्हाइट हाउस में ही इलाज करा रही हैं।

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और चुनावों से पहले उनकी सेहत को लेकर कई तरह की चिंताएं प्रकट की जा रही हैं। उनसे पहले भी हालांकि कई राष्ट्रपति अपने कार्यकाल के दौरान बीमार पड़े हैं लेकिन यहां गौर करने वाली कटु सच्चाई यह है कि कई राष्ट्रपतियों ने अपने स्वास्थ्य को लेकर देश की जनता को अंधेरे में रखा।

    जहां कई राष्ट्रपतियों की बीमारियां मामूली थी तो कई की बेहद गंभीर और कभी-कभी तो ऐसा हुआ कि जनता को इस सच्चाई का पता लगने में दशकों बीत गए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, पहले तो व्हाइट हाउस ने बताया कि उनमें संक्रमण के ‘आंशिक लक्षण’ हैं लेकिन शुक्रवार शाम तक वह वाल्टर रीड नेशनल मिलिटरी मेडिकल सेंटर में भर्ती हुए। ट्रंप के चिकित्सकों की एक टीम के संवाददाता सम्मेलन के बाद व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मीडोज ने शनिवार को कहा कि ट्रंप शुक्रवार को ‘बेहद चिंताजनक’ स्थिति से गुजरे हैं और अगला 48 घंटा उनके स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने जा रहा है।

    कई राष्ट्रपतियों ने अपने स्वास्थ्य को लेकर देश की जनता को अंधेरे में रखा

    बात करें महामारी की तो ट्रंप और वुडरो विल्सन दोनों का कार्यकाल इससे ग्रस्त रहा है। दोनों ने ही वायरस को कमतर करके देखा और इससे हजारों अमेरिकी लोगों की मौत हुई। दोनों ही राष्ट्रपति बीमार पड़े और दोनों को ही इस पर विचार करना पड़ा कि इसकी जानकारी जनता को कैसे दी जाए। विल्सन की बीमारी को व्हाइट हाउस ने गुप्त रखने की भी कोशिश की थी।

    विल्सन प्रथम विश्वयुद्ध को समाप्त करने पर चर्चा करने के लिए पेरिस में थे, वह अप्रैल 1919 को बीमार पड़ गए। उनमें इतने गंभीर लक्षण अचानक से दिखने शुरू हो गए कि उनके निजी चिकित्सक कैरी ग्रैसन को लगा कि उन्हें जहर दिया गया है। रात भर विल्सन की देखरेख के बाद ग्रैसन ने एक पत्र वाशिंगटन भेजा जिसमें उन्होंने व्हाइट हाउस को बताया कि राष्ट्रपति बेहद बीमार हैं।

    अब 100 साल आगे आते हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को रात 12 बजकर 54 मिनट पर ट्वीट कर दुनिया को बताया कि वह और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप कोविड-19 की चपेट में आ गए हैं।

    अमेरिका में कोरोना वायरस महामारी से 2,08,000 लोगों की मौत हो चुकी है और राष्ट्रपति ट्रंप यह कह चुके हैं कि उन्होंने वायरस को कमतर करके बताया कि क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि लोगों में अफरातफरी मचे। लेकिन ऐसा करने के पीछे राजनीतिक वजह थी। तीन नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और वह नहीं चाहते थे कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था चुनाव से पहले चरमरा जाए।

    तुलेन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन बेरी की कहना है, ‘ विल्सन प्रशासन ने भी अन्य वजह से महामारी को कमतर करके देखा था।’ बेरी की किताब ‘ग्रेट इंफ्लुएंजा’ में बताया गया है कि 1918-19 के बीच इस महामारी से विल्सन बीमार पड़े थे और अमेरिका के 6,75,000 लोगों की मौत हुई थी।

    शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विलियम होवेल का कहना है कि वह यह देख रहे हैं कि ट्रंप के मामले में व्हाइट हाउस कितना पारदर्शी रहता है। अमेरिका का इतिहास ऐसी जानकारियों से भरा पड़ा है कि राष्ट्रपतियों ने कैसे आम लोगों को अपनी बीमारी और चिकित्सीय स्थितियों को लेकर अंधेरे में रखा था।

    American Presidents

    ग्रोवर क्लीवलैंड

    राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड को यह डर था कि अगर उनके खराब स्वास्थ्य के बारे में जनता को पता चलता है तो उन्हें कमजोर रूप में देखा जाएगा और इस वजह से उन्होंने अपनी बीमारी को गुप्त रखते हुए लॉन्ग आइलैंड साउंड में एक निजी जहाज में मुंह का ऑपरेशन कराया था, जिसमें कैंसर वाले हिस्से को हटाया गया था। 2000 में इस जख्म वाले हिस्से की प्रदर्शनी लगी थी।

    American Presidents

    लिंडन बी जॉनसन

    राष्टपति लिंडन बी जॉनसन ने ऐसे ही गुप्त तरीके से 1967 में अपने हाथों के एक घाव को हटवाया था।

    American Presidents

    फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट

    युद्ध और मंदी के समय देश का नेतृत्व करनेवाले फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट को 1944 में उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों का पता चला था। उन्हें कम नमक वाले खाद्य पदार्थों पर रखा गया था और उन्हें धूम्रपान भी बंद करने को कहा गया। इसी बीच चुनाव भी आ रहा था तो रूजवेल्ट और व्हाइट हाउस ने कहा कि उनकी बीमारी उतनी गंभीर नहीं है। रूजवेल्ट चुनाव तो जीत गए लेकिन कुछ महीनों बाद दिल का दौरा पड़ने से 12 अप्रैल 1945 को उनका निधन हो गया।

    American Presidents

    जॉन एफ केनेडी

    इतिहासकार रॉबर्ट डेलेक का कहना है कि राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी भी दर्द और बीमारी का सामना कर रहे थे और दिन में कम से कम आठ गोलियां लेते थे। वहीं केनेडी लगातार अपनी बीमारी को छुपाए रख रहे थे।

    American Presidents

    ड्वाइट डी आइजनहावर

    राष्ट्रपति ड्वाइट डी आइजनहावर को 1955 में गंभीर रूप से दिल का दौरा पड़ा था। वह कोलोराडो में उस समय छुट्टिया मना रहे थे। वह छह सप्ताह अस्पताल में भर्ती रहे थे। ऐसे में उनके डॉक्टर ने उन्हें चुनाव नहीं लड़ने की सलाह के बदले कहा था कि अगर वह कार्यालय में बने रहते हैं तो इससे उनकी सेहत में सुधार होगा।

    American Presidents

    विलियम हेनरी हैरिसन

    वहीं 1841 में विलियम हेनरी हैरिसन निमोनिया की वजह से बीमार पड़े। उनकी बीमारी गंभीर थी। लेकिन व्हाइट हाउस ने जनता को उनकी बीमारी के बारे में नहीं बताया। बीमार पड़ने के नौ दिन बाद उनकी मौत हो गई और उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ लिए हुए भी सिर्फ एक महीना बीता था।

    एपी स्नेहा प्रशांत प्रशांत 0410 1051 वाशिंगटन

    साभार: भाषा

  • बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में सभी आरोपी बरी, अदालत ने कहा- पूर्व नियोजित नहीं थी घटना

    बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में सभी आरोपी बरी, अदालत ने कहा- पूर्व नियोजित नहीं थी घटना

    लखनऊ, 30 सितंबर (भाषा) सीबीआई की विशेष अदालत ने छह दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में बुधवार को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

    Babri masjid Case Judgement

    विशेष अदालत के न्यायाधीश एस के यादव ने अपने फैसले में कहा कि बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, यह एक आकस्मिक घटना थी।

    उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिले, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी।

    Babri masjid Case Judgement

    अदालत द्वारा फैसला सुनाये जाने के बाद किसी अभियुक्त ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया।

    न्यायालय ने कहा कि सीबीआई ने इस मामले की वीडियो फुटेज की कैसेट पेश की, उनके दृश्य स्पष्ट नहीं थे और न ही उन कैसेट्स को सील किया गया। घटना की तस्वीरों के नेगेटिव भी अदालत में पेश नहीं किये गये।

    अदालत ने कहा कि छह दिसम्बर 1992 को दोपहर 12 बजे तक सब ठीक था। मगर उसके बाद ‘‘विवादित ढांचा’’ के पीछे से पथराव शुरू हुआ। विश्व हिन्दू परिषद नेता अशोक सिंघल ‘‘विवादित ढांचे’’ को सुरक्षित रखना चाहते थे क्योंकि ढांचे में रामलला की मूर्तियां रखी थीं। उन्होंने उन्हें रोकने की कोशिश की थी और कारसेवकों के दोनों हाथ व्यस्त रखने के लिए जल और फूल लाने को कहा था।

    Babri masjid Case Judgement

    विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश यादव ने 16 सितंबर को इस मामले के सभी 32 आरोपियों को फैसले के दिन अदालत में मौजूद रहने को कहा था। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, राम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और सतीश प्रधान अलग—अलग कारणों से न्यायालय में हाजिर नहीं हो सके।

    Babri masjid Case Judgement

    कल्याण सिंह बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी इस मामले के आरोपियों में शामिल थे। मामले के कुल 49 अभियुक्त थे, जिनमें से 17 की मृत्यु हो चुकी है।

    फैसला सुनाये जाने से ऐन पहले सभी अभियुक्तों के वकीलों ने अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 437—ए के तहत जमानत के कागजात पेश किये। यह एक प्रक्रियात्मक कार्रवाई थी और इसका दोषसिद्धि या दोषमुक्त होने से कोई लेना—देना नहीं।

    Babri masjid Case Judgement

    उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई अदालत को बाबरी विध्वंस मामले का निपटारा 31 अगस्त तक करने के निर्देश दिए थे लेकिन गत 22 अगस्त को यह अवधि एक महीने के लिए और बढ़ा कर 30 सितंबर कर दी गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले की रोजाना सुनवाई की थी ।

    केंद्रीय एजेंसी सीबीआई ने इस मामले में 351 गवाह और करीब 600 दस्तावेजी सुबूत अदालत में पेश किए।

    Babri masjid Case Judgement

    इस मामले में अदालत में पेश हुए सभी अभियुक्तों ने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताते हुए केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर दुर्भावना से मुकदमे दर्ज कराने का आरोप लगाया था।

    पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने गत 24 जुलाई को सीबीआई अदालत में दर्ज कराए गए बयान में तमाम आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वह पूरी तरह से निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक कारणों से इस मामले में घसीटा गया है।

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    इससे एक दिन पहले अदालत में अपना बयान दर्ज कराने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने भी लगभग ऐसा ही बयान देते हुए खुद को निर्दोष बताया था।

    कल्याण सिंह ने गत 13 जुलाई को सीबीआई अदालत में बयान दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सियासी बदले की भावना से प्रेरित होकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

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    उन्होंने दावा किया था कि उनकी सरकार ने अयोध्या में मस्जिद की त्रिस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित की थी।

    इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साघ्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दूबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धमेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी थे।

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    डिस्क्लेमर– यह आर्टिकल PTI न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • हाथरस सामूहिक बलात्कार मामलाः प्रधानमंत्री मोदी ने की मुख्यमंत्री से बात, योगी ने एसआईटी गठित की

    हाथरस सामूहिक बलात्कार मामलाः प्रधानमंत्री मोदी ने की मुख्यमंत्री से बात, योगी ने एसआईटी गठित की

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की

    हाथरस में दलित लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और मौत के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह जानकारी दी

    एसआईटी का गठन और सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में

    उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी को सात दिन में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में किए जाने के निर्देश दिए।

    होगी कठोरतम कार्रवाई

    मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर जानकारी दी कि हाथरस मामले में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की है। ट्वीट में कहा ‘ आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाथरस की घटना पर वार्ता की है और कहा है कि दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए ।’

    इससे पहले कथित सामूहिक बलात्कार और पीड़िता की मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी ने उप्र शासन के गृह सचिव भगवान स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल के गठन के आदेश दिए। एसआईटी अपनी रिपोर्ट सात दिन में पेश करेगी ।

    मुख्यमंत्री ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने के निर्देश दिये हैं ।

    रिपोर्ट सात दिन में पेश करेगी एसआईटी

    मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर कहा ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाथरस की घटना की जांच हेतु तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष सचिव गृह भगवान स्वरूप एवं चंद्रप्रकाश, पुलिस उप महानिरीक्षक व पूनम, सेनानायक पीएसी आगरा सदस्य होंगे । एसआईटी अपनी रिपोर्ट सात दिन में पेश करेगी ।’

    मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा किये गये दूसरे ट्वीट में कहा गया कि ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस की घटना के लिये दोषी व्यक्तियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने और प्रभावी पैरवी करने के स्पष्ट निर्देश दिये है ।’

    पीड़िता का रात दो बजे पुलिस ने किया अंतिम संस्कार

    हाथरस के पुलिस अधीक्षक विक्रांत सिह ने बताया कि लड़की का अंतिम संस्कार बीती रात दो बजे परिजनों की सहमति से पुलिस बल की मौजूदगी में किया गया ।

    सच है कि हम अपनी बेटी का शव नहीं देख सके, पर उम्मीद है कि न्याय मिलेगा: हाथरस पीड़िता के पिता

    हालांकि लड़की के परिजनों का आरोप है कि अंतिम संस्कार के लिये उनकी सहमति नही ली गयी । लड़की के भाई ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ‘पुलिस जबदरदस्ती शव को ले गयी’ इस बीच, रात में लड़की के अंतिम संस्कार किये जाने पर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है । नेताओं का कहना है कि पुलिस का ऐसा करना संदेह के घेरे में है ।

    Hathras Gangrape Criminals

    मायावती ने क्या कहा

    बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को एक ट्वीट में कहा कि ‘ यूपी पुलिस द्वारा हाथरस की गैंगरेप पीड़िता के शव को उसके परिवार को न सौंपकर उनकी मर्जी के बिना व उनकी गैर-मौजूदगी में ही कल आधी रात को अन्तिम संस्कार कर देना लोगों में काफी संदेह व आक्रोश पैदा करता है। बीएसपी पुलिस के ऐसे गलत रवैये की कड़े शब्दों में निन्दा करती है।’

    मायावती ने दूसरे ट्वीट में कहा ‘अगर माननीय सुप्रीम कोर्ट इस संगीन प्रकरण का स्वयं ही संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करे तो यह बेहतर होगा, वरना इस जघन्य मामले में यूपी सरकार व पुलिस के रवैये से ऐसा कतई नहीं लगता है कि गैंगरेप पीड़िता की मौत के बाद भी उसके परिवार को न्याय व दोषियों को कड़ी सजा मिल पाएगी।’

    अखिलेश यादव ने क्या कहा

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि ‘हाथरस की बेटी बलात्कार-हत्याकांड’ में शासन के दबाव में, परिवार की अनुमति बिना, रात्रि में पुलिस द्वारा अंतिम संस्कार करवाना, संस्कारों के विरुद्ध है। ये सबूतों को मिटाने का घोर निंदनीय कृत्य है। भाजपा सरकार ने ऐसा करके पाप भी किया है और अपराध भी ।’

    संजय सिंह ने क्या कहा

    हाथरस गैंगरेप पीड़िता की मौत पर भड़के संजय सिंह, कहा- दरिंदों की गाड़ी क्यों नहीं पलटी योगी जी

    14 सितम्बर को दलित लड़की का हुआ था सामूहिक बलात्कार

    हाथरस जिले में गत 14 सितम्बर को कथित रूप से सामूहिक बलात्कार और गला दबाये जाने की घटना की शिकार हुई 19 वर्षीय दलित लड़की ने मंगलवार सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

    गौरतलब है कि गत 14 सितंबर को प्रदेश के हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र स्थित एक गांव में 19 साल की एक दलित लड़की के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई थी। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    पुलिस अधीक्षक विक्रांतवीर के मुताबिक लड़की ने अपने साथ बलात्कार की वारदात के बारे में पुलिस को पहले कुछ नहीं बताया था मगर बाद में मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में उसने आरोप लगाया कि संदीप, रामू, लव कुश और रवि नामक युवकों ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया था। विरोध करने पर जान से मारने की कोशिश करते हुए उसका गला दबाया था। चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

    Source–  PTI न्यूज

  • 14 सितम्बर – हिंदी दिवस पर कुछ जानकारी

    14 सितम्बर – हिंदी दिवस पर कुछ जानकारी

    आज हिंदी दिवस है. आइये जानते हैं हिंदी दिवस के बारे में कुछ रोचक तथ्य..

    हिन्दी दिवस

    हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी।

    वर्ष 1918 में गांधी जी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।

    स्वतंत्र भारत की राष्ट्रभाषा के प्रश्न पर 14 सितम्बर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की अनुच्छेद 343(1) में इस प्रकार वर्णित है:

    Hindi

    देवनागरी

    संघ की राष्ट्रभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।

    14 सितम्बर 1949

    यह निर्णय 14 सितम्बर को लिया गया, इसी दिन हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50-वां जन्मदिन था, इस कारण हिन्दी दिवस के लिए इस दिन को श्रेष्ठ माना गया था। हालांकि जब राष्ट्रभाषा के रूप में इसे चुना गया और लागू किया गया तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोग इसका विरोध करने लगे और अंग्रेज़ी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा। इस कारण हिन्दी में भी अंग्रेज़ी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा।

    हिन्दी दिवस के दौरान कई कार्यक्रम होते हैं। जिसमें हिन्दी निबंध लेखन, वाद-विवाद हिन्दी टंकण प्रतियोगिता आदि होता है। लेकिन अगले दिन सभी हिन्दी भाषा को भूल जाते हैं। हिन्दी भाषा को कुछ और दिन याद रखें इस कारण राष्ट्रभाषा सप्ताह का भी आयोजन होता है। जिससे यह कम से कम वर्ष में एक सप्ताह के लिए तो रहती ही है।

    Hindi Alphabet

    हिन्दी दिवस के कार्यक्रम

    हिन्दी निबन्ध लेखन
    वाद-विवाद
    विचार गोष्ठी
    काव्य गोष्ठी
    श्रुतलेखन प्रतियोगिता
    हिन्दी टंकण प्रतियोगिता
    कवि सम्मेलन
    पुरस्कार समारोह
    राजभाषा सप्ताह

    Hindi Numbers

    दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी भाषा हिन्दी

    बोलने वालों की संख्या के अनुसार अंग्रेजी और चीनी भाषा के बाद हिन्दी भाषा पूरे दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। लेकिन उसे अच्छी तरह से समझने, पढ़ने और लिखने वालों में यह संख्या बहुत ही कम है। यह और भी कम होती जा रही। इसके साथ ही हिन्दी भाषा पर अंग्रेजी के शब्दों का भी बहुत अधिक प्रभाव हुआ है और कई शब्द प्रचलन से हट गए और अंग्रेज़ी के शब्द ने उसकी जगह ले ली है। जिससे भविष्य में भाषा के विलुप्त होने की भी संभावना अधिक बढ़ गई है।

    Hindi Quotes

    योग बनाम हिंदी

    हिन्दी तो अपने घर में ही दासी के रूप में रहती है। हिन्दी को आज तक संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नहीं बनाया जा सका है। इसे विडंबना ही कहेंगे कि योग को 177 देशों का समर्थन मिला, लेकिन हिन्दी के लिए 129 देशों का समर्थन क्या नहीं जुटाया जा सकता? इसके ऐसे हालात आ गए हैं कि हिन्दी दिवस के दिन भी कई लोगों को ट्विटर पर हिन्दी में बोलो जैसे शब्दों का उपयोग करना पड़ रहा है।

    अंग्रेज़ी के स्थान पर हिन्दी

    इस एक दिन सभी सरकारी कार्यालयों में अंग्रेज़ी के स्थान पर हिन्दी का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा जो वर्ष भर हिन्दी में अच्छे विकास कार्य करता है और अपने कार्य में हिन्दी का अच्छी तरह से उपयोग करता है, उसे पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया जाता है।

    यहाँ तक कि वाराणसी में स्थित दुनिया में सबसे बड़ी हिन्दी संस्था आज बहुत ही खस्ता हाल में है। हिन्दी भाषा के विकास के लिए कुछ लोगों के द्वारा कार्य करने से कोई खास लाभ नहीं होगा। इसके लिए सभी को एक जुट होकर हिन्दी के विकास को नए आयाम तक पहुँचाना होगा। हिन्दी भाषा के विकास और विलुप्त होने से बचाने के लिए यह अनिवार्य है।

    Hindi Image

    हिन्दी दिवस पर पुरस्कार

    हिन्दी दिवस पर हिन्दी के प्रति लोगों को उत्साहित करने हेतु पुरस्कार समारोह भी आयोजित किया जाता है। जिसमें कार्य के दौरान अच्छी हिन्दी का उपयोग करने वाले को यह पुरस्कार दिया जाता है। यह पहले राजनेताओं के नाम पर था, जिसे बाद में बदल कर राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार और राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार कर दिया गया। राष्ट्रभाषा गौरव पुरस्कार लोगों को दिया जाता है जबकि राष्ट्रभाषा कीर्ति पुरस्कार किसी विभाग, समिति आदि को दिया जाता है।

    राजभाषा गौरव पुरस्कार

    यह पुरस्कार तकनीकी या विज्ञान के विषय पर लिखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को दिया जाता है। इसमें दस हजार से लेकर दो लाख रुपये के 13 पुरस्कार होते हैं। इसमें प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले को २ लाख रूपए, द्वितीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले को डेढ़ लाख रूपए और तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले को पचहत्तर हजार रुपये मिलता है। साथ ही दस लोगों को प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में दस-दस हजार रूपए प्रदान किए जाते हैं। पुरस्कार प्राप्त सभी लोगों को स्मृति चिह्न भी दिया जाता है। इसका मूल उद्देश्य तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में हिन्दी भाषा को आगे बढ़ाना है।

    Hindi Image

    राजभाषा कीर्ति पुरस्कार

    इस पुरस्कार योजना के तहत कुल 39 पुरस्कार दिये जाते हैं। यह पुरस्कार किसी समिति, विभाग, मण्डल आदि को उसके द्वारा हिन्दी में किए गए श्रेष्ठ कार्यों के लिए दिया जाता है। इसका मूल उद्देश्य सरकारी कार्यों में हिन्दी भाषा का उपयोग करने से है।

    Source: Wiki

  • भारत में कोविड-19 के सर्वाधिक 95,735 नए मामले आए सामने, 1,172 और लोगों की मौत

    भारत में कोविड-19 के सर्वाधिक 95,735 नए मामले आए सामने, 1,172 और लोगों की मौत

    Covid-19 Update

    भारत में एक दिन में कोविड-19 के सर्वाधिक 95,735 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमण के मामले बढ़कर बृहस्पतिवार को 44 लाख के पार हो गए। वहीं 1,172 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 75,062 हो गई।

    केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बृहस्पतिवार तक 34,71,783 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं।

    मंत्रालय की ओर से सुबह आठ बजे जारी किए गए अद्यतन आंकड़ों के अनुसार देश में कोविड-19 के कुल 44,65,863 मामले सामने आ चुके हैं।

    उसके अनुसार मृत्यु दर गिरकर 1.68 प्रतिशत हो गई और मरीजों के ठीक होने की दर 77.74 प्रतिशत है।

    आंकड़ों के अनुसार देश में अभी 9,19,018 मरीजों का कोरोना वायरस का इलाज जारी है, जो कुल मामलों का 20.58 प्रतिशत है।

    भारत में कोविड-19 मरीजों की संख्या सात अगस्त को 20 लाख के पार हो गई थी। यह 23 अगस्त को 30 लाख और पांच सितंबर को 40 लाख के पार पहुंच गई थी।

    भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार देश में नौ सितम्बर तक 5,29,34,433 नमूनों की कोविड-19 के लिए जांच की गई है, जिनमें से 11,29,756 नमूनों की जांच बुधवार को ही की गई।

    डिस्क्लेमर– यह आर्टिकल PTI न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • अमेरिकी अंतरिक्षयान का नाम दिवंगत भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला के नाम पर रखा गया

    अमेरिकी अंतरिक्षयान का नाम दिवंगत भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला के नाम पर रखा गया

    अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के लिए उड़ान भरने वाले एक अमेरिकी व्यावसायिक मालवाहक अंतरिक्षयान का नाम नासा की दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के नाम पर रखा गया है। मानव अंतरिक्षयान में उनके प्रमुख योगदानों के लिए उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है।

    कल्पना चावला (Kalpana Chawla)

    अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं।

    अमेरिकी वैश्विक एरोस्पेस एवं रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी, नॉर्थग्रुप ग्रमैन ने घोषणा की कि इसके अगले अंतरिक्षयान सिग्नेस का नाम मिशन विशेषज्ञ की याद में “एस.एस कल्पना चावला” रखा जाएगा जिनकी 2003 में कोलंबिया में अंतरिक्षयान में सवार रहने के दौरान चालक दल के छह सदस्यों के साथ मौत हो गई थी।

    कंपनी ने बुधवार को ट्वीट किया, “आज हम कल्पना चावला का सम्मान कर रहे हैं जिन्होंने भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्षयात्री के तौर पर नासा में इतिहास बनाया था। मानव अंतरिक्षयान में उनके योगदान का दीर्घकालिक प्रभाव रहेगा।”

    कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर कहा, “नॉर्थरोप ग्रमैन एनजी-14 सिग्नस अंतरिक्षयान का नाम पूर्व अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला के नाम पर रख गर्व महसूस कर रहा है। यह कंपनी की परंपरा है कि वह प्रत्येक सिग्नस का नाम उस व्यक्ति के नाम पर रखता है जिसने मानवयुक्त अंतरिक्षयान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”

    इसने कहा, “चावला का चयन इतिहास में उनके प्रमुख स्थान को सम्मानित देने के लिए किया गया है जो अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं।”

    डिस्क्लेमर– यह आर्टिकल PTI न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.

  • सरकार की देश के 69,000 पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग कियोस्क लगाने की योजना

    सरकार की देश के 69,000 पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग कियोस्क लगाने की योजना

    पेट्रोल पंप पर इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग

    सरकार देश के करीब 69,000 पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग कियोस्क लगाने पर विचार कर रही है। इस कदम से देश में बिजलीचालित वाहनों की मांग को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

    इसके अलावा सरकार कंपनियों के स्वामित्व, कंपनियों के परिचालन वाले (सीओसीओ) तथा सरकारी रिफाइनरी कंपनियों के सभी पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग कियोस्क को अनिवार्य करने पर भी विचार कर रही है।

    लोग चुन रहे हैं बैटरी चलित वाहन

    इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग ढांचे पर समीक्षा बैठक के दौरान बिजली मंत्री आर के सिंह ने पेट्रोलियम मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को सुझाव दिया कि वे अपने प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाली पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को सभी सीओसीओ पेट्रोल पंपों पर चार्जिंग कियोस्क लगाने का आदेश जारी कर सकते हैं।

    एक सूत्र ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अन्य फ्रेंचाइजी पेट्रोल पंप परिचालकों को अपने ईंधन स्टेशनों पर कम से कम एक चार्जिंग कियोस्क लगाने की सलाह दी जा सकती है। सूत्र ने कहा कि इससे देश के सभी पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग सुविधा लगाई जा सकेगी।

    पेट्रोल पम्प पर वैकल्पिक ईंधन अनिवार्य होगा

    पेट्रोलियम मंत्रालय के नए दिशानिर्देशों के अनुसार सभी नए पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक वैकल्पिक ईंधन का विकल्प अनिवार्य है।

    सूत्र ने कहा, ‘‘वैकल्पिक ईंधन के तहत ज्यादातर नए पेट्रोल पंप इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सुविधा के विकल्प को चुन रहे हैं। यदि मौजूदा पेट्रोल पंपों पर भी ईवी चार्जिंग कियोस्क लग जाता है, तो इससे देश में बिजलीचालित वाहनों को प्रोत्साहन दिया जा सकेगा।’’

    इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा प्रोत्साहन

    उद्योग के अनुमान के अनुसार देश में करीब 69,000 पेट्रोल पंप हैं। सभी पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग सुविधा से इलेक्ट्रिक वाहनों को जबर्दस्त प्रोत्साहन मिलेगा। अभी चार्जिंग सुविधा के अभाव में लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से कतराते हैं।

    बिजली मंत्रालय ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, वडोदरा ओर भोपाल में ईवी चार्जिंग ढांचा लगाने की योजना बनाई है। इसके अलावा मंत्रालय का इरादा राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी ईवी चार्जिंग ढांचा लगाने का है। इससे लोग बिजलीचालित वाहन खरीदने को प्रोत्साहित होंगे।

    दिल्ली में सार्वजानिक परिवहन होगा पूरी तरह इलेक्ट्रिक

    सूत्र ने कहा, ‘‘मंत्री का मानना है कि किसी शहर में दो या तीन चार्जिंग स्टेशन लगाना पैसे की बर्बादी होगा। केंद्र सरकार दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बिजलीचालित करने की तैयारी कर रही है। इसे बाद में अन्य शहरों द्वारा भी अपनाया जा सकता है।’’

  • हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू, 4 सितम्बर को 10 बजे खुलेंगे कपाट

    हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू, 4 सितम्बर को 10 बजे खुलेंगे कपाट

    उत्तराखंड के चमोली जिले में गोविन्द घाट से बृहस्पतिवार को हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) की यात्रा के लिए पहला जत्था रवाना होने के साथ ही इस वर्ष की हेमकुण्ड यात्रा (Hemkund Travel) की विधिवत शुरुआत हो गयी । हेमकुंड साहिब (Hemkund Sahib) गुरुद्वारे के कपाट शुक्रवार को 10 बजे खुलेंगे ।

    पंचप्यारे

    गोविंदघाट से हुकमनामा लेकर पंचप्यारों की अगुवाई में रवाना हुए इस वर्ष के पहले जत्थे में सीमित संख्या में श्रद्धालु शामिल हैं ।

    शुक्रवार को अरदास के बाद सुबह 10 बजे हेमकुंड सहिब गुरुद्वारे के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए खोले जाएंगे। इसके साथ ही वहां स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर (Laxman Temple) के कपाट भी कल खुल जाएंगे ।

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    शबद कीर्तन

    बृहस्पतिवार सुबह से ही गोविंदघाट (Govindghat) गुरुद्वारे में शबद कीर्तन का आयोजन किया गया और गुरुग्रंथ साहिब (Gurugranth Sahib) के पाठ और अरदास के बाद पंच प्यारों की अगुवाई में इस वर्ष के पहले जत्थे को हेमकुंड साहिब के लिये रवाना किया गया। गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के पदाधिकारियों की ओर से यात्रियों को सरोपा भेंट कर हेमकुंड साहिब के लिये रवाना किया।

    कोविड-19 का यात्रा पर असर

    गोविंद घाट से रवाना हुआ यात्रियों का जत्था आज रात्रि घांघरिया (Ghangharia) में विश्राम करेगा। कोविड-19 के चलते इस बार हेमकुंड साहिब और लक्ष्मण मंदिर की यात्रा तीन माह देरी से शुरू हो रही है।

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    मुश्किलों भरी है चढ़ाई हेमकुंड की

    हेमकुंड साहिब तक की यात्रा की शुरुआत गोविंदघाट से होती है जो अखलनंदा नदी के किनारे समुद्र तल से 1 हजार 828 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। गोविंदघाट तक तो अच्छी सड़कें हैं और यहां तक गाड़ियां आराम से जाती हैं लेकिन इसके ऊपर यानी गोविंदघाट से घांघरिया तक 13 किलोमीटर की चढ़ाई है जो एकदम खड़ी चढ़ाई है। इसके आगे का 6 किलोमीटर का सफर और भी ज्यादा मुश्किलों से भरा है।

    हेमकुंड ट्रेकिंग (Hemkund Trekking) करते हुए जाना होता है

    झूलते हुए ब्रिज (Hanging Bridge) के जरिए अलखनंदा नदी को पारकर गोविंदघाट पहुंचा जाता है। इसके बाद टेढ़ा-मेढ़ा रास्ता सीधा हो जाता है जो नीचे जाती हुई घाटी से होकर जाता है जिसमें खेत भी हैं और कई पेड़-पौधे भी। 3 किलोमीटर बाद लक्षमण गंगा (Laxman Ganga) मिलती है जो आगे चलकर अलखनंदा में मिलती है। आगे एक छोटा सा गांव आता है पुलना। इसके बाद की चढ़ाई और भी ज्यादा एक्साइटिंग हो जाती है क्योंकि रास्ते में आपको पत्थरीले पहाड़ और बर्फ से ढ़की पहाड़ की चोटियां दिखने लगती हैं।

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    प्राकृतिक नजारों से भरपूर है पूरा रास्ता

    पुलना से भयंदर गांव के बीच का 7 किलोमीटर का सफर प्राकृतिक खूबसूरती से भरा है। इसमें आपको कई झरने भी देखने को मिलेंगे। 2 किलोमीटर आगे जाकर घांघरिया बेस कैंप (Ghangharia Base Camp) आता है जहां से आगे वैली ऑफ फ्लावर्स (Valley of Flowers) और हेमकुंड साहिब का रास्ता निकलता है। घांघरिया से हेमकुंड साहिब की दूरी वैसे तो सिर्फ 6 किलोमीटर है लेकिन यहां से पहाड़ की चढ़ाई और भी ज्यादा मुश्किल हो जाती है और इसे पार करने में ही सबसे ज्यादा समय लगता है।

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    हेमकुंड कैसे पहुंचे

    हवाई मार्ग– देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट नजदीकी एयरपोर्ट है। गोविंदघाट से जॉली ग्रांट की दूरी 292 किलोमीटर है। यहां से गोविंदघाट तक टैक्सी या बस के जरिए पहुंच सकते हैं। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 19 किलोमीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है।

    रेल मार्ग– हेमकुंड साहिब का नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (Rishikesh) है जो गोविंदघाट से 273 किलोमीटर दूर है। ऋषिकेश से टैक्सी या बस के जरिए श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, चमोली और जोशीमठ होते हुए गोविंदघाट पहुंच सकते हैं।

  • नहीं रहे भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, काफी दिनों से थे बीमार, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार आज

    नहीं रहे भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, काफी दिनों से थे बीमार, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार आज

    देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukharjee) का सोमवार शाम को यहां आर्मी आरआर (रिसर्च एंड रेफरल) अस्पताल में निधन हो गया। यह जानकारी उनके पुत्र अभिजीत (Abhijeet) ने दी। पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी 84 वषर्ष के थे। मुखर्जी 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे।

    पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। गृह राज्य प.बंगाल की जगह नई दिल्ली में पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्रणब दा का अंतिम संस्कार होगा। मुखर्जी को गत 10 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

    सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। गृह मंत्रालय ने कहा कि दिवंगत सम्मानीय नेता के सम्मान में भारत में 31 अगस्त से लेकर छह सितंबर तक राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान देश भर में उन सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा जहां ध्वज लगा रहता है।

    पूर्व राष्ट्रपति की पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी (Sharmishtha Mukharjee) ने 12 अगस्त को ट्विटर पर लिखा था कि पिछले साल का आठ अगस्त का दिन उनकी जिंदगी का सबसे सुखद दिन था। उस दिन उनके पिता को भारत रत्न (Bharat Ratna) का सम्मान मिला था। ठीक एक साल अब बड़ी दुखद घड़ी आई है।

    Pranab Mukharjee

    भारत के 13वें राष्ट्रपति जो बनना चाहते थे प्रधानमंत्री

    भारतीय राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले प्रणब मुखर्जी को एक ऐसी शख्सियत के तौर पर याद किया जाएगा, जो देश का प्रधानमंत्री (Prime Minister) हो सकता था, लेकिन अंतत: उनका राजनीतिक सफर राष्ट्रपति भवन तक पहुंच कर संपन्न हुआ।

    चार दशक लंबे राजनीतिक कार्यकाल के बाद वर्ष 2012 में प्रणब मुखर्जी देश के प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति बने थे। मुखर्जी 2012 से लेकर 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अहम फैसले भी लिए । इस पद तक उनका पहुंचना आसान नहीं था। दरअसल राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) की पसंद हामिद अंसारी (Hamid Ansari) थे। लेकिन समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) सहित कई क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की पसंद प्रणब दादा (Pranab Da) थे। इससे यह भी पता चला था कि राजनीतिक विभेद के बावजूद प्रणब दा की स्वीकार्यता सभी राजनीतिक दलों में थी।

    Pranab Mukharjee and Narendra Modi

    प्रणब दा का वो सपना अधूरा ही रहा गया

    हालांकि राष्ट्रपति बनने से प्रणब दा का वो सपना अधूरा ही रहा गया, जिसके लिए राजनीतिक हलकों में हमेशा चर्चा होती थी। यह सर्वविदित था कि यूपीए (UPA) और कांग्रेस पार्टी (Congress) के भीतर प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत और बड़े दावेदार थे। इसी वजह से उन्हें पीएम इन वेटिंग भी कहा जाता था। लेकिन उनकी किस्मत में सात रेसकोर्स रोड नहीं बल्कि राष्ट्रपति भवन का पता लिखा था। अपनी जीवनयात्रा पर लिखी पुस्तक “द कोलिशन इयर्स- 1996 – 2012” में खुद प्रणब मुखर्जी ने इस बात का खुलासा किया था कि वो प्रधानमंत्री बनना चाहते थे।

    अपनी किताब ‘‘द् कोलिशन इयर्स’’ में मुखर्जी ने माना कि मई 2004 में जब कांग्रेस अध्यक्ष (Congress President) सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया था तब उन्होंने उम्मीद की थी कि वह पद उन्हें मिलेगा। उन्होंने लिखा है, ‘अंतत: उन्होंने (सोनिया) अपनी पसंद के रूप में डॉक्टर मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) का नाम आगे किया और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। उस वक्त सभी को यही उम्मीद थी कि सोनिया गांधी के मना करने के बाद मैं ही प्रधानमंत्री के रूप में अगली पसंद बनूंगा।’ मुखर्जी ने यह स्वीकार किया था कि शुरुआती दौर में उन्होंने अपने अधीन काम कर चुके मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में शामिल होने से मना कर दिया था लेकिन सोनिया गांधी के अनुरोध पर बाद में वह सहमत हुए।

    Pranab Mukharjee and Mulayam Singh Yadav

    राष्ट्रपति के रूप में एक अमिट छाप छोड़ी

    राष्ट्रपति के रूप में भी उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी। इस दौरान उन्होंने दया याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाया। उनके सम्मुख 34 दया याचिकाएं आईं और इनमें से 30 को उन्होंने खारिज कर दिया। इनमें 2008 मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब (Azmal Kasab) और 2001 में संसद हमलों के मुख्य आरोपी अफजल गुरू (Afjal Guru) को फांसी दिया जाना शामिल है। जनता के राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले मुखर्जी को राष्ट्रपति भवन को जनता के निकट ले जाने के लिए उठाए गए कदमों के लिए भी याद किया जाएगा। उन्होंने जनता के लिए इसके द्वार खोले और एक संग्रहालय भी बनवाया।

    Pranab Mukharjee and Yogi Adityanath

    प्रणब दा के क्‍लर्क से देश के राष्‍ट्रपति बनने की पूरी कहानी

    क्‍या आप जानते हैं कि प्रणब दा राजनीति में आने से पहले एक क्‍लर्क थे। जीहां! ये सच है। उन्‍होंने देश के सर्वोच्‍च पद पर पहुंचने के लिए न सिर्फ कड़ी मेहनत की बल्कि अपनी प्रतिभा का लोहा भी मनवाया। विरोधी भी उनको पूरा सम्‍मान देते थे। प्रणब का जन्‍म बंगाल प्रेसीडेंसी के मिराती गांव में एक बंगाली परिवार में हुआ था। वर्तमान में ये पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के अंतर्गत आता है। उनके पिता ने कमद किंकर मुखर्जी देश की आजादी की लड़ाई में बढ़चढ़कर हिस्‍सा लिया था। इसके अलावा 1952-1964 तक वो पश्चिम बंगाल विधान परिषद में कांग्रेस के सदस्‍य भी थे। साथ ही वे एआईसीसी के भी सदस्‍य थे। इस लिहाज से प्रणब दो एक राजनीतिक परिवार से भी ताल्‍लुक रखते थे।

    प्रणब दा ने बीरभूम के सूरी विद्यासागर कॉलेज से पढ़ाई की थी। कलकत्‍ता यूनिवर्सिटी से उन्‍होंने राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की और फिर बाद में इतिहास की डिग्री भी हासिल की। इसके बाद उन्‍होंने कानून की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। इतना सब कुछ करने के बाद उनकी नौकरी बतौर अपर डिवीजनल क्‍लर्क ऑफिस ऑफ डिप्‍टी अकांउंटेंट जनरल (पोस्‍ट एंड टेलिग्राफ) में लग गई थी। इसके बाद प्रणब दा ने जिस कॉलेज से इतिहास और राजनीति विज्ञान में एमए की डिग्री हासिल की थी वहीं पर उनका चयन बतौर सहायक प्रोफेसर हुआ था। कुछ समय उन्‍होंने इस कॉलेज में अपनी सेवाएं दी। आपको बता दें कि प्रणब एक शिक्षक के अलावा एक पत्रकार भी थे। राजनीति में आने से पहले उन्‍होंने देशर डाक (Call of Motherland) के लिए पत्रकारिता की थी।

    1969 में उन्‍होंने राजनीति की पहली सीढ़ी उस वक्‍त चढ़ी, जब मिदनापुर में हुए उप चुनाव उन्‍होंने एक निर्दलीय प्रत्‍याशी वीके कृष्‍ण मेनन के लिए चुनाव प्रचार किया। इस चुनाव में मेनन को जीत हासिल हुई थी। इस जीत का डंका दिल्‍ली तक सुनाई दे रहा था। यही वो वक्‍त था जब इंदिरा गांधी की नजर प्रणब दा पर पड़ी थी। उन्‍होंने प्रणब मुखर्जी की प्रतिभा को पहचाना और अपनी पार्टी में आने का न्‍यौता दे डाला। प्रणब भी इसको ठुकरा नहीं पाए। कांग्रेस की तरफ से उन्‍हें पहली बार 1969 में राज्‍यसभा सदस्‍य बनाया गया। इसके बाद वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में भी राज्‍यसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद प्रणब दा ने फिर कभी पलटकर पीछे नहीं देखा और सफलता की सीढि़यां एक के बाद एक चढ़ते चले गए।

    वर्ष 1973 में इंदिरा गांधी ने उनकी प्रतिभा को जानते हुए उन्‍हें अपनी केबिनेट में जगह दी और उन्‍हें इंड्रस्ट्रियल डेवलेपमेंट मिनिस्‍टरी में डिप्‍टी मिनिस्‍टर बनाया गया। लेकिन 1975-77 के बीच इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी को लेकर उनकी भी आलोचना हुई। वो इस दौरान भी काफी सक्रिय नेताओं में से एक थे। इमरजेंसी की बदौलत कांग्रेस को 1977 के चुनाव करारी हार मिली थी और जनता पार्टी की सरकार केंद्र में बनी थी। 1979 में प्रणब राज्‍य सभा में कांग्रेस के उपनेता रहे और 1980 में उन्‍हें सदन का नेता बनाया गया। प्रणब के राजनीतिक कद का अंदाजा इस बात से भी लिया जा सकता है कि पीएम की गैर मौजूदगी में वही केबिनेट की बैठक लिया करते थे।

    Pranab Mukharjee and RSS

    इंदिरा गांधी की हत्‍या के बाद जब राजीव गांधी को पीएम बनाया गया तो प्रणब दा को उनकी केबिनेट में जगह नहीं मिल सकी। इससे नाराज होकर प्रणब ने कांग्रेस से अलग होकर एक नई पार्टी बना ली। लेकिन कांग्रेस से अलग होकर वो ज्‍यादा कमाल नहीं दिखा सके। इसी वजह से 1989 में उन्‍होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया था।

    पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सम्मान में केंद्र सरकार ने 7 दिवसीय राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, जिसके बाद आज राष्ट्रपति भवन और संसद भवन के झंडे को झुका दिया गया है।

    माना जा रहा है कि प्रणब मुखर्जी का आज दिल्ली में दोपहर 2.30 बजे लोधी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

    राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, पीएम समते तमाम हस्तियों ने जताया शोक

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें ऐसा प्रबुद्धजन बताया जिसने पूरी निष्ठा से देश की उत्कृष्ट सेवा की है। राष्ट्रपति कोविंद ने ट्वीट किया, ‘पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उनका जाना एक युग का अंत है। सार्वजनिक जीवन में विराट कद हासिल करने वाले प्रणब दा ने भारत माता की सेवा एक संत की तरह की।’

    उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर यह कहते हुए शोक प्रकट किया कि देश ने एक राजनेता खो दिया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुखर्जी के निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए उन्हें सर्वोत्कृष्ट विद्वान और उच्च कोटि का राजनीतिज्ञ बताया और कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में पहले दिन से उन्हें उनका मार्गदर्शन, समर्थन और आशीर्वाद मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

    साभार: जागरण

  • कमला हैरिस में शीर्ष पद में आसीन होने की ‘‘काबिलियत नहीं’’: ट्रंप

    कमला हैरिस में शीर्ष पद में आसीन होने की ‘‘काबिलियत नहीं’’: ट्रंप

    वाशिंगटन,29अगस्त (भाषा) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस पर निशाना साधते हुए कहा कि हैरिस में शीर्ष पद पर आसीन होने की ‘‘काबिलियत नहीं’’है।

    ट्रंप ने शुक्रवार को न्यूहैम्पशायर में रिपब्लिकन पार्टी की प्रचार रैली को संबोधित किया।

    ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका में शीर्ष पद पर किसी महिला को देखने का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी एवं व्हाइट हाउस सलाहकार इवांका ट्रंप ऐसे पद के लिए उचित उम्मीदवार हो सकती हैं।

    हैरिस पिछले साल तक राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दावेदारी कर रहीं थी।

    डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन ने हैरिस को उप राष्ट्रपति पद के लिए चुना है। हैरिस के पिता जमैका से और उनकी मां भारत से थीं।

    ट्रंप ने कहा ,‘‘आप जानते हैं कि मैं भी शीर्ष पद पर एक महिला को देखना चाहता हूं, लेकिन मैं नहीं चाहता कोई महिला इस पद पर इस तरीके से आए और वह काबिल भी नहीं हैं।’’

    ट्रंप के इतना कहते ही लोग तालियां बजाने लगे और कुछ इवांका ट्रंप का नाम चिल्लाने लगे।

    इस पर राष्ट्रपति ने अपने समर्थकों से कहा, ‘‘वे सब भी कह रहे हैं ‘हम इवांका को चाहते हैं। मैं आप पर तोहमत नहीं लगा रहा।’’

    गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए गुरुवार को औपचारिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी के नामांकन को स्वीकार करने के बाद ट्रंप की यह पहली चुनावी रैली थी।

    ट्रंप ने अपने भाषण में बाइडेन की भी आलोचना की।

    डिस्क्लेमर– यह आर्टिकल PTI न्यूज फीड से सीधे प्रकाशित किया गया है.