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टूर पर घूमने जा रहे हैं तो इन बातों का रखें ख्याल, नहीं होंगे बीमार

कहीं बाहर घूमने जाने का मन किसका नहीं होता लेकिन कई दिन तक का बाहर का खाना पीना आपको रास्ते में बीमार कर सकता है. यात्रा से जुडी कुछ आम बीमारिया होती हैं, जिनसे आप कभी भी संक्रमित हो सकते हैं. इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले कुछ सावधानियां वरतनी जरूरी है. आइये इन कुछ…

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Travel Healthcare Tips to avoid Illness

कहीं बाहर घूमने (Outing) जाने का मन किसका नहीं होता लेकिन कई दिन तक का बाहर का खाना पीना आपको रास्ते में बीमार कर सकता है. यात्रा से जुडी कुछ आम बीमारिया होती हैं, जिनसे आप कभी भी संक्रमित हो सकते हैं. इसलिए यात्रा (Travel and Tour) पर निकलने से पहले कुछ सावधानियां वरतनी जरूरी है. आइये इन कुछ टिप्स को जानकर आप यात्रा में बीमारियों से बच सकते हैं.

ट्रैवेलर्स डायरिया:

यात्रा से जुडी यह आम बीमारी है, क्यूंकि बाहर हम खाने – पीने को लेकर लापरवाह हो जाते हैं. ऐसे में यदि 8 घंटे की अवधि में तीन या अधिक बार बुखार या 24 घंटे में पांच या अधिक दस्त हों और इसके साथ जी मिचलाने, उलटी, मरोड़ या मॉल में खून दिखाई दे, तो एंटीबायटिक व डायरियारोधी दवा तुरंत शुरू कर देनी चाहिए. पर्याप्त पेय पदार्थों का सेवन आवश्यक है. बिना बोतल बंद पेय पदार्थ या बर्फ के साथ मिले पेय बिलकुल भी न लें. बिना छिली या पकी फल व सब्जियां न खाएं. ऐसे भोजन से परहेज करें, जो गर्म व पका हुआ न हो. कमरे के सामान्य तापमान पर रखा गया पका भोजन विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है. इस तरह खानपान में आप सावधानी बरतें, तो डायरिया ही नहीं, भोजन से होने वाली अन्य परेशानियों से भी बचे रहेंगे.

मलेरिया:

2000 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों को छोड़कर मलेरिया की आशंका लगभग हर जगह होती है. मलेरिया के अधिकाँश मामले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिसा, गुजरात, राजस्थान, भीहार व कर्णाटक के वनीय क्षेत्रों में सामने आते हैं. ऐसे में कीटों से सुरक्षा के लिए कोई दवा जरूर ले लें. ऐसी जगहों पर लम्बी बाजू वाली कमीजें, पैंट व जूते पहनें. कीटरोधी क्रीम खुली त्वचा पर लगाएं. अतिरिक्त सुरक्षा के लिए कपड़ों व बिस्तर के नेट्स पर परमेथ्रिन वाले यौगिक लगाएं.

ऊँचाई से डर (अल्टीट्यूड सिकनेस):

यह रोग उन यात्रियों को हो सकता है, जो 2500 मीटर से अधिक ऊंचाइयां तेजी से चढ़ते हैं. ऐसीटाजोलामाइड  इसके लिए पसंदीदा दवा है, लेकिन ये गर्भवती महिलाओं को या उन लोगों को नहीं दी जानी चाहिए, जो सल्फा एलर्जी से पीड़ित हों. इसके विकल्प के रूप में दिन में डॉक्टर की सलाह पर चार बार डेक्सामीथासोन 4mg ली जा सकती है.

स्वाइन फ्लू:

इसके लिए खांसते या छींकते समय अपने नाक व मुंह को रुमाल से ढकना चाहिए. रोग को फैलने से रोकने के लिए बार-बार हांथों को साबुन व पानी से धोना चाहिए.

सामान्य सलाह:

सभी दवाइयां, उनकी मूल पैकिंग और पर्याप्त मात्रा में स्पष्ट लेबलिंग करके अपने साथ लानी चाहिए. सभी दवाइयों को हाथ के सामान में पैक करें. यदि आपको कुछ एलर्जी या क्रोनिक समस्याएँ हैं, तो मेडिकल एलर्ट ब्रेसलेट डालें या इसके लिए एक कार्ड अपने पास रखें. बच्चों के साथ यात्रा करने से पहले वहाँ के चिकित्सकों व अस्पतालों के संपर्क नंबर अपने पास जरूर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर आपको कहीं भटकना न पड़े.

साभार: रूपायन

द्वारा: डॉ. ए. के. सिंह, फोर्टिस हॉस्पिटल, वसंत कुंज

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